नई दिल्ली I लोकसभा ने वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 (Waqf Amendment Bill) को गुरुवार सुबह तक चली 12 घंटे की लंबी बहस के बाद पारित कर दिया। इस विधेयक को 288 वोटों के समर्थन और 232 वोटों के विरोध में स्वीकृति मिली। सरकार इसे वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार और पारदर्शिता लाने का कदम बता रही है, जबकि विपक्ष ने इसे मुस्लिम समुदाय के अधिकारों पर हमला करार दिया है। अब यह विधेयक राज्यसभा में चर्चा के लिए जाएगा, जहां यह मुद्दा और तेजी पकड़ सकता है।

NDA का दावा
लोकसभा में बुधवार को शुरू हुई चर्चा रात भर चली, जिसमें एनडीए और इंडिया ब्लॉक के बीच तीखी नोकझोंक देखी गई। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि यह किसी धर्म के खिलाफ नहीं है, बल्कि वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन और भ्रष्टाचार को रोकने के लिए है। उन्होंने डेटा का हवाला देते हुए कहा कि भारत में 8.7 लाख वक्फ संपत्तियां हैं, जो 9.4 लाख एकड़ में फैली हुई हैं और इनकी कीमत लगभग ₹1.2 लाख करोड़ है। इनमें से कई संपत्तियां अतिक्रमण और कुप्रबंधन का शिकार हैं, जिसकी वजह से यह विधेयक जरूरी हो गया था। सरकार के मुताबिक, विधेयक में नए प्रावधान जैसे 5 साल से इस्लाम का अभ्यास करने की शर्त और गैर-मुस्लिमों को वक्फ बोर्ड में शामिल करना, समावेशिता और जवाबदेही बढ़ाएगा।

विपक्ष का दावा
दूसरी तरफ, विपक्ष ने इस विधेयक को मुस्लिम विरोधी और असंवैधानिक बताया। कांग्रेस, टीएमसी, समाजवादी पार्टी और AIMIM जैसे दलों ने इसका विरोध किया, यह कहकर कि यह संविधान के अनुच्छेद 25 (धर्म की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 14 (समानता) का उल्लंघन करता है। टीएमसी सांसद नदीमुल हक ने सवाल उठाया कि 5 साल से मुस्लिम होने का सर्टिफिकेट कौन देगा? विपक्ष का यह भी कहना है कि जिला कलेक्टर को संपत्ति विवादों में अंतिम प्राधिकारी बनाने से वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता खत्म हो जाएगी। सोनिया गांधी ने इसे समाज को बांटने की साजिश करार दिया, जबकि AIMPLB जैसे मुस्लिम संगठन इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं।

विधेयक के समर्थक, जैसे बीजेपी और उसके सहयोगी, इसे एक सुधार के रूप में देखते हैं जो वक्फ बोर्ड को भ्रष्टाचार के अड्डों से मुक्त करेगा। गृह मंत्री अमित शाह ने बहस में कहा कि 1913 से 2013 तक वक्फ बोर्ड के पास 18 लाख एकड़ जमीन थी, लेकिन 2013 के बाद 21 लाख एकड़ और जुड़ गए, जो पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है। उन्होंने यह भी जिक्र किया कि विधेयक सेक्शन 40 जैसे कठोर प्रावधानों को हटा रहा है, जो किसी भी संपत्ति को वक्फ घोषित करने की ताकत देता था।

अब यह विधेयक राज्यसभा में जाएगा, जहां सरकार के पास बहुमत नहीं है, वहां यह क्या रूप लेगा, यह देखना बाकी है। इसके साथ ही, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने डीएमके की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का ऐलान किया है। दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं, लेकिन यह विधेयक भारतीय राजनीति और समाज में एक नए विचार-विमर्श का मुद्दा बन गया है।
वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 के पारित होने से एक तरफ सुधारों की उम्मीद जगी है, तो दूसरी तरफ सांप्रदायिक विभाजन का खतरा भी सामने आया है। इसका असली असर तब पता चलेगा जब यह राज्यसभा से गुजरेगा और कानूनी चुनौतियों का सामना करेगा। तब तक, यह मुद्दा चर्चा और बहस का केंद्र बना रहेगा।