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Heat Dome और El Nino का डबल अटैक! क्या इस बार भारत में पड़ेगा भीषण सूखा? IMD और NOAA की चेतावनी

भारत इस समय Heat Dome और भीषण गर्मी की चपेट में है। इसी बीच El Niño बनने की आशंका ने कमजोर मानसून, सूखे और खेती संकट की चिंता बढ़ा दी है। जानिए Heat Dome क्या है, मानसून कब आएगा, El Niño कैसे असर डालेगा और किसानों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए।

 
Heat Dome
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देश के ज्यादातर हिस्से इस समय भीषण गर्मी की चपेट में हैं। उत्तर भारत से लेकर मध्य भारत तक तापमान लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि दुनियाभर के मौसम आंकड़े जारी करने वाली वेबसाइट AQI के मुताबिक दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों में 86 शहर भारत के हैं।

दिल्ली, यूपी, राजस्थान, मध्य प्रदेश और बिहार समेत कई राज्यों में दिन ही नहीं बल्कि रातें भी तप रही हैं। लोगों को गर्म हवाओं और उमस से राहत नहीं मिल पा रही है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण “Heat Dome” को माना जा रहा है।

क्या होता है Heat Dome? आसान भाषा में समझिए

Heat Dome यानी गर्म हवा का ऐसा दबाव क्षेत्र, जो किसी इलाके के ऊपर ढक्कन की तरह जम जाता है। इससे गर्म हवा बाहर नहीं निकल पाती और लगातार तापमान बढ़ता जाता है।

इस स्थिति में-

  • गर्म हवाएं लंबे समय तक बनी रहती हैं
  • बादल बनने की संभावना कम हो जाती है
  • बारिश रुक जाती है
  • रात में भी तापमान नीचे नहीं आता

यही वजह है कि कई शहरों में लगातार हीटवेव जैसी स्थिति बनी हुई है।

मानसून कब देगा राहत?

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक अगले सप्ताह मानसून केरल पहुंच सकता है। इसके बाद धीरे-धीरे यह देश के बाकी हिस्सों में आगे बढ़ेगा।

हालांकि केरल से उत्तर भारत तक मानसून पहुंचने में आमतौर पर 4 से 6 हफ्ते लगते हैं। यानी दिल्ली, यूपी और आसपास के इलाकों को अभी कुछ और समय तक भीषण गर्मी झेलनी पड़ सकती है।

मौसम विभाग का अनुमान है कि-

  • 15 से 20 जून तक मानसून आधे से ज्यादा भारत को कवर कर सकता है
  • उत्तर भारत में प्री-मानसून गतिविधियां शुरू हो सकती हैं
  • 20 जून के बाद गर्मी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद हैलेकिन तब तक Heat Dome का असर जारी रह सकता है।

अब क्यों बढ़ गई El Niño की चिंता?

भीषण गर्मी के बीच अब मौसम वैज्ञानिकों की सबसे बड़ी चिंता El Niño को लेकर है। अमेरिका की वैज्ञानिक एजेंसी NOAA और कोलंबिया यूनिवर्सिटी की IRI एजेंसी ने El Niño बनने की प्रबल संभावना जताई है।

NOAA के मुताबिक

  • मई-जुलाई 2026 के बीच El Niño बनने की संभावना 82% है
  • दिसंबर 2026 से फरवरी 2027 तक इसके बने रहने की संभावना 96% बताई गई है

भारतीय मौसम विभाग (IMD) भी मान चुका है कि मानसून सीजन के दौरान El Niño विकसित हो सकता है।

आखिर क्या होता है El Niño?

El Niño और La Niña प्रशांत महासागर से जुड़ी दो बड़ी जलवायु स्थितियां हैं, जिनका असर पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ता है।

जब प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है, तब El Niño बनता है। इसका सबसे बड़ा असर भारत के मानसून पर पड़ता है।

वहीं La Niña की स्थिति में महासागर का पानी ठंडा रहता है और भारत में सामान्य से ज्यादा बारिश होती है।

भारत के लिए क्यों खतरनाक माना जाता है El Niño?

El Niño बनने पर भारत में

  • मानसून कमजोर पड़ सकता है
  • बारिश कम हो सकती है
  • सूखे जैसी स्थिति बन सकती है
  • गर्मी ज्यादा बढ़ सकती है
  • फसलों पर बुरा असर पड़ सकता है

2016 में El Niño के दौरान देश में करीब 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। इस बार वैज्ञानिक उससे भी ज्यादा गंभीर स्थिति की आशंका जता रहे हैं।

खेती और किसानों पर सबसे बड़ा असर

भारत की आधे से ज्यादा खेती मानसून पर निर्भर करती है। ऐसे में कमजोर मानसून का सीधा असर किसानों पर पड़ता है।

कम बारिश होने पर:

  • धान, गन्ना और गेहूं जैसी फसलें प्रभावित होती हैं
  • सिंचाई संकट बढ़ता है
  • फसलों में रोग ज्यादा लगते हैं
  • उत्पादन घटता है
  • किसानों की लागत बढ़ जाती है

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार खेती के लिए रणनीति बदलने की जरूरत पड़ सकती है।

किसानों को क्या करना चाहिए?

कमजोर मानसून की आशंका को देखते हुए विशेषज्ञ किसानों को कुछ अहम सलाह दे रहे हैं।

किसानों के लिए जरूरी सुझाव

  • कम पानी वाली फसलों का चयन करें
  • जल्दी पकने वाली किस्मों को प्राथमिकता दें
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता वाली फसलें चुनें
  • ड्रिप सिंचाई और वैज्ञानिक तकनीकों का इस्तेमाल करें
  • ऑर्गेनिक खेती पर फोकस बढ़ाएं
  • फल और बागवानी आधारित खेती अपनाएं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी प्राकृतिक और ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने की अपील कर चुके हैं।

बिजली और पानी पर भी बढ़ेगा दबाव

भीषण गर्मी के कारण देश में बिजली की मांग लगातार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रही है। AC, कूलर और सिंचाई उपकरणों के बढ़ते इस्तेमाल से बिजली खपत तेजी से बढ़ी है।

अगर मानसून कमजोर रहा तो

  • जल संकट बढ़ सकता है
  • बिजली उत्पादन प्रभावित हो सकता है
  • ग्रामीण इलाकों में परेशानी बढ़ सकती है
  • खाद्य महंगाई बढ़ने का खतरा हो सकता है

क्या 2026 बन सकता है सबसे मुश्किल मौसम वाला साल?

मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर Heat Dome और El Niño दोनों का असर लंबे समय तक बना रहा, तो भारत को भीषण गर्मी, कमजोर मानसून, खेती संकट और पानी की कमी जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल सबसे बड़ी उम्मीद मानसून से ही जुड़ी हुई है। आने वाले कुछ हफ्ते तय करेंगे कि देश को राहत मिलेगी या मौसम की मार और बढ़ेगी।