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पेट्रोल में 20% इथेनॉल, लेकिन असर खाने की थाली पर? जानिए क्या है कनेक्शन

 

New Delhi : भारत में पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण यानी E20 की जरूरत पूरी करने के लिए इथेनॉल खरीद की नई व्यवस्था का असर सिर्फ ईंधन बाजार तक सीमित नहीं रह सकता। इसका प्रभाव खेती, पशु-पक्षियों के चारे और खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है। खासतौर पर इथेनॉल उत्पादन में मक्के का इस्तेमाल बढ़ने से पोल्ट्री उद्योग की लागत बढ़ सकती है, जिसका असर अंडे और चिकन की कीमतों पर पड़ सकता है।

हालांकि, अंडे और चिकन की कीमतों में बढ़ोतरी तय नहीं है। यह मक्के की उपलब्धता, उसकी बाजार कीमत, इथेनॉल उद्योग की मांग और पोल्ट्री उत्पादन लागत जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगा।

क्या है इथेनॉल खरीद की नई व्यवस्था?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, तेल विपणन कंपनियों ने इथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2026-27 के लिए लगभग 1,100 करोड़ लीटर इथेनॉल खरीदने के उद्देश्य से बोलियां आमंत्रित की हैं।

बताया जा रहा है कि नए टेंडर में गन्ने के रस, सिरप और बी-हैवी मोलासेस से बनने वाले इथेनॉल को शामिल नहीं किया गया है। इस व्यवस्था को चीनी उत्पादन और इथेनॉल की मांग के बीच संतुलन बनाए रखने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

ऐसे में इथेनॉल की जरूरत पूरी करने के लिए मक्का और सी-हैवी मोलासेस जैसे अन्य स्रोतों पर निर्भरता बढ़ सकती है।

मक्का आधारित इथेनॉल क्यों है महंगा?

उपलब्ध कीमतों के अनुसार, मक्का आधारित इथेनॉल का खरीद मूल्य 68.86 रुपये प्रति लीटर बताया गया है, जबकि बी-हैवी मोलासेस से तैयार इथेनॉल की कीमत 60.73 रुपये प्रति लीटर है। इस हिसाब से मक्का आधारित इथेनॉल करीब 8.13 रुपये प्रति लीटर यानी लगभग 13.4 प्रतिशत महंगा है।

यदि तेल कंपनियों को अपेक्षाकृत महंगे स्रोतों से अधिक इथेनॉल खरीदना पड़ता है, तो उनकी खरीद लागत बढ़ सकती है। हालांकि, इसका सीधा अर्थ यह नहीं है कि पेट्रोल की खुदरा कीमत भी उसी अनुपात में बढ़ जाएगी।

अंडे और चिकन की कीमतों पर कैसे पड़ सकता है असर?

- मक्का पोल्ट्री उद्योग में इस्तेमाल होने वाले चारे का एक महत्वपूर्ण घटक है। उपलब्ध अनुमानों के अनुसार, देश में उत्पादित मक्के का लगभग 55 से 60 प्रतिशत हिस्सा पोल्ट्री उद्योग में इस्तेमाल होता है।

- यदि इथेनॉल बनाने वाली कंपनियों की ओर से मक्के की मांग बढ़ती है और उसी अनुपात में उत्पादन या आपूर्ति नहीं बढ़ती, तो मक्के की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है।

- मक्का महंगा होने से मुर्गीपालकों की चारा लागत बढ़ सकती है। ऐसे में पोल्ट्री उत्पादकों को अंडे और चिकन की बिक्री कीमतों में बदलाव करना पड़ सकता है।

किसानों के लिए अवसर, पोल्ट्री उद्योग के सामने चुनौती

इथेनॉल उद्योग में मक्के की मांग बढ़ने से मक्का उत्पादक किसानों को बेहतर बाजार और कीमत मिलने की संभावना बन सकती है। दूसरी ओर, पोल्ट्री उद्योग को कच्चे माल की बढ़ती लागत का सामना करना पड़ सकता है।

विशेषज्ञों के लिए मुख्य सवाल यह है कि ईंधन उत्पादन के लिए अनाज की बढ़ती मांग और खाद्य एवं पशु आहार की जरूरतों के बीच संतुलन कैसे बनाए रखा जाए।

क्या E20 पेट्रोल से महंगाई बढ़ेगी?

E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है। इथेनॉल मिश्रण का उद्देश्य जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना और घरेलू जैव ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।

लेकिन जब इथेनॉल बनाने के लिए मक्का जैसे कृषि उत्पादों का इस्तेमाल बढ़ता है, तो इसका प्रभाव दूसरे उद्योगों पर भी पड़ सकता है।

फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि नई खरीद व्यवस्था के कारण अंडे, चिकन या अन्य खाद्य पदार्थ निश्चित रूप से महंगे होंगे। इसके लिए मक्के की वास्तविक मांग, उत्पादन, उपलब्धता और बाजार कीमतों पर नजर रखना जरूरी होगा।

नई नीति की पुष्टि

16 अक्टूबर 2026 को जारी तेल कंपनियों के टेंडर में करीब 1,100 करोड़ लीटर इथेनॉल की मांग की गई है। गन्ने के रस, चीनी, सिरप और बी-हैवी मोलासेस से बने इथेनॉल को इस खरीद प्रक्रिया से बाहर रखा गया है, जबकि मक्का, चावल और सी-हैवी मोलासेस जैसे स्रोत पात्र हैं।