{"vars":{"id": "130921:5012"}}

होर्मुज संकट के बीच भारत का बड़ा दांव, रूस से फिर बढ़ेगा कच्चे तेल का आयात

 

New Delhi : मध्य पूर्व में ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और Strait of Hormuz पर हमलों की आशंका ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत ने मिडिल ईस्ट से तेल आयात बढ़ाने के बाद अब फिर रूस की ओर रुख करना शुरू कर दिया है। भारत अपनी कुल तेल जरूरतों का लगभग 90 प्रतिशत आयात करता है और हाल के महीनों में उसने रूस के बजाय मिडिल ईस्ट से तेल खरीद बढ़ा दी थी। लेकिन अब ईरान से जुड़े युद्ध जैसे हालात के कारण भारत जोखिम कम करने के लिए रूसी कच्चे तेल की खरीद की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।

रूस से तेल खरीद में तेजी  

Bloomberg की रिपोर्ट के अनुसार, शिप-ट्रैकिंग डेटा से पता चलता है कि पूर्वी एशिया की ओर जा रहे रूसी कच्चे तेल के कुछ शिपमेंट को अब भारत की ओर मोड़ा गया है। जहाज निगरानी प्लेटफॉर्म Kpler और Vortexa के आंकड़ों के मुताबिक दो टैंकरों में करीब 1.4 मिलियन बैरल कच्चा तेल है, जिसे इस सप्ताह भारतीय बंदरगाहों पर उतारा जा सकता है।

हाल के कुछ हफ्तों में भारतीय तेल कंपनियों ने अमेरिका के साथ चल रही संभावित ट्रेड डील को ध्यान में रखते हुए रूस से कच्चे तेल की खरीद कुछ हद तक कम कर दी थी। माना जा रहा था कि इससे व्यापारिक समझौते पर असर पड़ सकता है। लेकिन अब हालात बदलते दिख रहे हैं। रूस ने अतिरिक्त तेल की आपूर्ति चीन की ओर मोड़ दी थी, लेकिन अब भारत की ओर दोबारा शिपमेंट बढ़ रहे हैं।

Strait of Hormuz पर खतर

वास्तविक आपूर्ति बाधित होने से पहले ही बाजार में कीमतें बढ़ने लगी हैं, क्योंकि निवेशकों को आशंका है कि रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण Strait of Hormuz प्रभावित हो सकता है। दुनिया में होने वाले कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत इसी संकरे समुद्री मार्ग से गुजरता है, जो ईरान, ओमान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच स्थित है। एक तेल टैंकर पर हमले और समुद्री यातायात में बाधा की खबरों ने बाजार की चिंता और बढ़ा दी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऊर्जा बाजार में केवल व्यवधान की आशंका भी कीमतों को ऊपर ले जाने के लिए काफी होती है। तेल केवल एक सामान्य वस्तु नहीं बल्कि वैश्विक भू-राजनीति को प्रभावित करने वाला अहम संसाधन है। इतिहास में कई बार ऊर्जा आपूर्ति को दबाव के औजार के रूप में इस्तेमाल किया गया है।

तेल कीमतों में तेजी 

ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमलों के बाद वैश्विक मानक Brent Crude की कीमत लगभग 76 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जो कुछ सप्ताह पहले करीब 68 डॉलर के आसपास थी। यह बढ़ोतरी भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल सकती है, क्योंकि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है।