Bharat NCAP 2.0: अब सिर्फ 5 स्टार रेटिंग से तय नहीं होगी कार की सेफ्टी, 2027 से बदल सकता है पूरा सिस्टम
Bharat NCAP 2.0: भारत में कारों की सुरक्षा को लेकर सरकार बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने SIAM के 66वें वार्षिक सम्मेलन में कहा कि अक्टूबर 2027 से Bharat NCAP 2.0 शुरू करने की योजना है। नए सिस्टम में कार की सुरक्षा को सिर्फ क्रैश टेस्ट और स्टार रेटिंग तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि दुर्घटना से पहले, दुर्घटना के दौरान और उसके बाद की पूरी सेफ्टी चेन को ध्यान में रखकर मूल्यांकन किया जाएगा।
सरकार का फोकस सड़क हादसों में होने वाली मौतों को कम करने पर है। इसके लिए सुरक्षित वाहनों के साथ-साथ ड्राइवर के व्यवहार और सड़क सुरक्षा व्यवस्था में भी बदलाव की तैयारी की जा रही है।
क्या है Bharat NCAP?
Bharat NCAP यानी भारत न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम देश में पैसेंजर कारों की सुरक्षा जांचने वाला आधिकारिक वाहन सुरक्षा रेटिंग सिस्टम है। इसके तहत कारों का क्रैश टेस्ट किया जाता है और प्रदर्शन के आधार पर उन्हें 1 से 5 स्टार तक सुरक्षा रेटिंग दी जाती है।
क्रैश टेस्ट के दौरान यह देखा जाता है कि दुर्घटना की स्थिति में कार अपने अंदर बैठे वयस्क यात्रियों और बच्चों को कितनी सुरक्षा देती है। आम तौर पर ज्यादा स्टार रेटिंग का मतलब बेहतर क्रैश सुरक्षा से होता है।
अब सरकार इसी व्यवस्था को और व्यापक बनाने की तैयारी कर रही है। Bharat NCAP 2.0 में वाहन की सुरक्षा को केवल क्रैश टेस्ट के नतीजे से नहीं, बल्कि व्यापक सुरक्षा व्यवस्था के तौर पर देखने की योजना है।
Bharat NCAP 2.0 में क्या होगा बड़ा बदलाव?
नए सिस्टम में कार के क्रैश टेस्ट के साथ उसकी पूरी सेफ्टी चेन का मूल्यांकन करने पर जोर रहेगा। नितिन गडकरी के मुताबिक, अक्टूबर 2027 से इस दिशा में काम शुरू करने की योजना है।
इसका सीधा मतलब यह है कि भविष्य में वाहन निर्माता कंपनियों के लिए सिर्फ 5 स्टार क्रैश रेटिंग हासिल करना पर्याप्त नहीं होगा। कार में इस्तेमाल होने वाली सुरक्षा तकनीक, इंजीनियरिंग और दुर्घटना से जुड़े दूसरे सुरक्षा पहलुओं पर भी ध्यान देना होगा।
इस प्रक्रिया में नई तकनीकों और भारतीय स्टार्टअप्स द्वारा विकसित सुरक्षा तकनीक को शामिल करने की भी बात कही गई है। इससे ऑटोमोबाइल सेक्टर में सेफ्टी टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
हर साल 5 लाख सड़क हादसे, 1.80 लाख मौतें
सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती देश में सड़क दुर्घटनाओं का आंकड़ा है। नितिन गडकरी ने बताया कि भारत में हर साल करीब 5 लाख सड़क हादसे होते हैं और इनमें लगभग 1.80 लाख लोगों की जान चली जाती है।
उन्होंने यह भी कहा कि सड़क हादसों में जान गंवाने वालों में बड़ी संख्या 18 से 36 साल की उम्र के लोगों की है। यानी सड़क दुर्घटनाओं का असर देश की युवा आबादी पर भी गंभीर रूप से पड़ रहा है।
ऐसे में सरकार का लक्ष्य सिर्फ कारों को सुरक्षित बनाना नहीं है। वाहन, सड़क और चालक—इन तीनों से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि हादसों के साथ-साथ उनमें होने वाली मौतों को भी कम किया जा सके।
कार कंपनियों पर बढ़ेगी सेफ्टी की जिम्मेदारी
Bharat NCAP 2.0 लागू होने के बाद वाहन निर्माता कंपनियों को सुरक्षा के क्षेत्र में ज्यादा निवेश करना पड़ सकता है। बेहतर इंजीनियरिंग, नई सुरक्षा तकनीक और भारतीय सड़क परिस्थितियों के मुताबिक वाहनों को सुरक्षित बनाने पर कंपनियों का फोकस बढ़ेगा।
भारतीय स्टार्टअप्स की तकनीक को भी इस पूरी व्यवस्था में इस्तेमाल करने की बात कही गई है। इससे ऑटो सेफ्टी से जुड़े नए उत्पादों और तकनीकों के लिए बाजार तैयार हो सकता है।
भारत में वाहन टेस्टिंग की लागत और समय वैश्विक स्तर की तुलना में कम होने का फायदा भी घरेलू वाहन उद्योग को मिल सकता है। इससे स्थानीय स्तर पर सुरक्षा परीक्षण और नई तकनीकों के विकास को गति मिलने की उम्मीद है।
भारत दुनिया का तीसरा बड़ा पैसेंजर व्हीकल मार्केट
भारत दुनिया के सबसे बड़े ऑटोमोबाइल बाजारों में शामिल है। गडकरी के मुताबिक, देश दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा पैसेंजर व्हीकल मार्केट है।
सड़कों पर कारों और दूसरे वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ सड़क सुरक्षा की चुनौती भी बढ़ रही है। ऐसे में मजबूत सेफ्टी स्टैंडर्ड और आधुनिक सुरक्षा तकनीक जरूरी हो जाती है। सरकार का मानना है कि सुरक्षित वाहन और बेहतर सेफ्टी सिस्टम सड़क हादसों में होने वाली मौतों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
ड्राइविंग लाइसेंस में आ सकता है नया पॉइंट सिस्टम
सरकार की तैयारी सिर्फ वाहनों तक सीमित नहीं है। ड्राइवर के व्यवहार को सुधारने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट में ग्रेडेड पॉइंट सिस्टम लाने की योजना भी बताई गई है।
इस सिस्टम के तहत ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने पर ड्राइविंग लाइसेंस से पॉइंट काटे जा सकते हैं। अगर कोई चालक बार-बार नियम तोड़ता है और उसके पॉइंट एक तय सीमा तक कम हो जाते हैं, तो उसका लाइसेंस निलंबित या रद्द किया जा सकता है।
यानी आने वाले समय में लगातार ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर सिर्फ जुर्माना ही नहीं, बल्कि लाइसेंस पर भी सीधा असर पड़ सकता है।
अच्छे ड्राइविंग रिकॉर्ड वालों को मिल सकता है फायदा
प्रस्तावित व्यवस्था में नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई के साथ अच्छी ड्राइविंग को प्रोत्साहित करने की भी योजना है। गडकरी के मुताबिक, जिन लोगों का ड्राइविंग रिकॉर्ड अच्छा रहेगा, उन्हें इंश्योरेंस कंपनियों की ओर से प्रोत्साहन और दूसरे फायदे मिल सकते हैं। इसका उद्देश्य लोगों में सुरक्षित ड्राइविंग की आदत विकसित करना है।
यानी आने वाले समय में सड़क सुरक्षा का मॉडल केवल दुर्घटना के बाद कार्रवाई करने पर आधारित नहीं रहेगा, बल्कि सुरक्षित कार, जिम्मेदार ड्राइवर और बेहतर सुरक्षा व्यवस्था- तीनों पर एक साथ जोर दिया जा सकता है।