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बजट 2026: इनकम टैक्स में बड़े बदलाव! नया 'इनकम टैक्स एक्ट 2025' से HRA, स्टैंडर्ड डिडक्शन और स्लैब तक क्या-क्या हो सकता है अपडेट?
 

 

नई दिल्ली I इस साल का बजट सत्र 28 जनवरी 2026 से शुरू हो रहा है और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 (रविवार) को सुबह 11 बजे संसद में यूनियन बजट 2026-27 पेश करेंगी। यह बजट कई मायनों में खास है, क्योंकि इसमें आयकर नियमों में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। विशेष रूप से, पुराने आयकर अधिनियम 1961 को पूरी तरह खत्म कर नया इनकम टैक्स एक्ट 2025 1 अप्रैल 2026 से लागू होने जा रहा है। यह नया कानून टैक्स सिस्टम को सरल, पारदर्शी और समझने में आसान बनाने का लक्ष्य रखता है।

हालांकि बजट में अंतिम घोषणाएं 1 फरवरी को होंगी, लेकिन विशेषज्ञों और मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर टैक्सपेयर्स, खासकर सैलरीड क्लास के लिए कई संभावित बड़े बदलावों की चर्चा जोरों पर है। आइए जानते हैं प्रमुख अपेक्षाएं और संभावित बदलाव:

1. नया इनकम टैक्स एक्ट 2025: पुराने कानून का अंत
- 1961 का पुराना एक्ट 1 अप्रैल 2026 से पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
- नया एक्ट सरल भाषा में लिखा गया है, जिसमें छूट और डिडक्शन को 'शेड्यूल' सिस्टम में शिफ्ट किया जा सकता है।
- इससे ITR भरना आसान होगा और टैक्स नियम समझने में कम Confusion रहेगा।
- बजट 2026 में नए एक्ट में ही कोई भी टैक्स नीति बदलाव जोड़े जाएंगे।

2. HRA (हाउस रेंट अलाउंस) में बड़ा अपडेट संभव
- फिलहाल केवल दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई को मेट्रो सिटी माना जाता है, जहां सैलरी का 50% HRA क्लेम कर सकते हैं।
- बजट में बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे जैसे शहरों को मेट्रो सिटी लिस्ट में शामिल करने की मांग जोरदार है।
- इससे इन शहरों में रहने वाले लाखों कर्मचारियों को ज्यादा टैक्स बचत होगी।
- न्यू टैक्स रिजीम में HRA छूट नहीं मिलती, लेकिन इसे लोकप्रिय बनाने के लिए सीमित HRA छूट जोड़ी जा सकती है।

3. स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाने की पुरजोर मांग
- न्यू टैक्स रिजीम में फिलहाल स्टैंडर्ड डिडक्शन 75,000 रुपये है।
- महंगाई को देखते हुए इसे 1 लाख रुपये तक बढ़ाने की अपेक्षा है।
- इससे सैलरीड क्लास और पेंशनर्स की टैक्सेबल इनकम सीधे 25,000 रुपये तक कम हो सकती है।

4. न्यू टैक्स रिजीम को और आकर्षक बनाने पर फोकस
- सरकार न्यू रिजीम को डिफॉल्ट और पॉपुलर बनाने पर जोर दे रही है।
- फिलहाल स्टैंडर्ड डिडक्शन के साथ 7.75 लाख रुपये तक की आय प्रभावी रूप से टैक्स-फ्री है।
- इसे 8.5-9 लाख रुपये तक बढ़ाने या 5% और 10% स्लैब के दायरे को चौड़ा करने की संभावना है।
- इससे मध्यम वर्ग के पास खर्च के लिए ज्यादा पैसा बचेगा।

5. ओल्ड टैक्स रिजीम में 80C और होम लोन पर राहत
- 80C निवेश की लिमिट 1.5 लाख से बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये करने की मांग है (2014 से नहीं बदली)।
- होम लोन ब्याज पर छूट 2 लाख से बढ़ाकर 3 लाख रुपये की जा सकती है, ताकि रियल एस्टेट सेक्टर को बूस्ट मिले।

ये सभी बदलाव संभावित हैं और विशेषज्ञों की अपेक्षाओं पर आधारित हैं। पिछले बजट में न्यू रिजीम को काफी आकर्षक बनाया गया था, जहां 12 लाख तक की आय पर टैक्स जीरो हो गया था। इस बार फोकस सरलता, महंगाई राहत और मध्यम वर्ग को सपोर्ट देने पर है। अंतिम फैसला 1 फरवरी को बजट भाषण में ही पता चलेगा। टैक्सपेयर्स को सलाह है कि बजट के बाद ITR प्लानिंग अपडेट करें।