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E20 पेट्रोल से खराब हो सकती है आपकी कार? जानिए एथेनॉल मिश्रित ईंधन से किन पार्ट्स पर पड़ सकता है सबसे ज्यादा असर
 

 

नई दिल्ली: देश में प्रदूषण कम करने और कच्चे तेल पर निर्भरता घटाने के उद्देश्य से एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। अब देश के अधिकांश पेट्रोल पंपों पर E20 फ्यूल उपलब्ध है। हालांकि, इसके साथ ही सोशल मीडिया और ऑटो मैकेनिकों के बीच यह बहस भी तेज हो गई है कि क्या एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पुरानी गाड़ियों के इंजन और अन्य पार्ट्स को नुकसान पहुंचा सकता है।

सरकार इन दावों को अफवाह और भ्रामक जानकारी बताती है, जबकि ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री का कहना है कि जिन वाहन मॉडलों को E20 ईंधन के अनुरूप (E20 Compatible) डिजाइन नहीं किया गया है, उनमें कुछ तकनीकी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से गाड़ी के किन हिस्सों पर सबसे पहले असर पड़ सकता है।

रबर होज और फ्यूल लाइन्स पर बढ़ता है खतरा

एथेनॉल में ऐसे रासायनिक गुण होते हैं जो समय के साथ पुराने रबर और कुछ प्रकार के प्लास्टिक को कमजोर कर सकते हैं। पुरानी गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाले रबर होज और फ्यूल पाइप E20 ईंधन के लिए तैयार नहीं किए गए थे। लगातार एथेनॉल के संपर्क में रहने से ये पाइप सख्त होकर फट सकते हैं, जिससे फ्यूल लीक होने और आग लगने जैसी गंभीर दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है।

फ्यूल पंप और इंजेक्टर्स भी हो सकते हैं प्रभावित

एथेनॉल हवा से नमी (पानी) तेजी से सोखने की क्षमता रखता है। यदि फ्यूल टैंक में पानी की मात्रा बढ़ जाती है तो इससे फ्यूल सिस्टम के धातु वाले हिस्सों में जंग लगने का खतरा बढ़ जाता है। जंग के छोटे-छोटे कण फ्यूल इंजेक्टर्स के बारीक छिद्रों को बंद कर सकते हैं, जिससे इंजन को सही मात्रा में ईंधन नहीं मिल पाता। इसका असर गाड़ी की परफॉर्मेंस पर पड़ता है और वाहन चलते समय झटके देने लगता है।

जल्दी चोक हो सकता है फ्यूल फिल्टर

एथेनॉल एक प्रभावी सॉल्वेंट माना जाता है। यह फ्यूल टैंक के अंदर वर्षों से जमी गंदगी और अवशेषों को साफ कर देता है। हालांकि, यह गंदगी फ्यूल फिल्टर में जमा होकर उसे जल्दी ब्लॉक कर सकती है। इसके कारण ईंधन की सप्लाई प्रभावित होती है और इंजन की कार्यक्षमता घटने लगती है।

माइलेज और पिकअप पर भी पड़ सकता है असर

यदि फ्यूल सिस्टम में नमी और गंदगी बढ़ जाती है तो इंजन के सिलेंडर और इनटेक वाल्व्स पर कार्बन जमा होने की संभावना भी बढ़ जाती है। इससे वाहन का पिकअप कमजोर हो सकता है और माइलेज में भी गिरावट आ सकती है।

क्या सभी गाड़ियों को है खतरा?

ऑटो विशेषज्ञों के अनुसार, नई पीढ़ी की E20 Compatible कारों और बाइक में ऐसे मैटेरियल और इंजन कंपोनेंट्स का इस्तेमाल किया गया है जो एथेनॉल मिश्रित ईंधन को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। इसलिए इन वाहनों में सामान्य रूप से किसी बड़ी समस्या की आशंका नहीं होती। वहीं, पुराने वाहन मालिकों को निर्माता कंपनी की सलाह के अनुसार ही E20 पेट्रोल का इस्तेमाल करना चाहिए।