क्रेडिट कार्ड धारक की मौत के बाद कौन चुकाएगा बकाया बिल? क्या परिवार को चुकाने होंगे पैसे? जानिए नियम
क्रेडिट कार्डधारक की मृत्यु के बाद बकाया बिल का भुगतान कौन करेगा? जानिए भारत में इससे जुड़े नियम, कानूनी उत्तराधिकारियों की जिम्मेदारी, व्यक्तिगत और संयुक्त क्रेडिट कार्ड के बीच अंतर और बैंक को सूचना देने के जरूरी कदम। समझें कि किन परिस्थितियों में परिवार को अपनी जेब से कर्ज नहीं चुकाना पड़ता।
देश में मई 2026 तक करीब 5.2 करोड़ क्रेडिट कार्ड धारक थे, जो लगभग 10.7 करोड़ क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल कर रहे थे। क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल बढ़ने के साथ इससे जुड़े वित्तीय और कानूनी सवाल भी महत्वपूर्ण हो गए हैं। इन्हीं में एक सवाल यह है कि अगर किसी क्रेडिट कार्डधारक की मृत्यु हो जाए और उसके कार्ड पर बकाया बिल रह जाए, तो उसका भुगतान कौन करेगा? क्या बैंक मृतक के परिवार से पूरी रकम वसूल सकता है या इसकी जिम्मेदारी केवल उसकी छोड़ी हुई संपत्ति तक सीमित रहती है? नियमों के मुताबिक, इसका जवाब मृतक की संपत्ति, कानूनी उत्तराधिकार और क्रेडिट कार्ड के प्रकार पर निर्भर करता है।
सबसे पहले किसकी जिम्मेदारी होती है?
किसी क्रेडिट कार्डधारक की मृत्यु होने पर उसके कार्ड का बकाया आमतौर पर उसकी संपत्ति यानी एस्टेट से चुकाया जाता है। इसमें मृत्यु के समय उसके नाम मौजूद संपत्तियां शामिल होती हैं। इनमें बैंक खातों में जमा रकम और नकदी, फिक्स्ड डिपॉजिट, निवेश, मकान या अन्य अचल संपत्ति, वाहन और अन्य कीमती सामान शामिल हो सकते हैं। ऐसी बीमा पॉलिसियां भी संपत्ति का हिस्सा हो सकती हैं, जिनमें कोई नामिनी न हो।
दिए गए विवरण के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशा-निर्देशों के तहत क्रेडिट कार्ड जारी करने वाली संस्थाओं के रिकवरी एजेंट मृतक के परिवार पर बकाया वसूलने के लिए दबाव नहीं डाल सकते। विभिन्न मामलों में अदालतें भी क्रेडिट कार्डधारक की मृत्यु के बाद उसके परिवार को बकाया भुगतान से राहत दे चुकी हैं।
कानूनी वारिसों को कितना पैसा चुकाना पड़ सकता है?
आम धारणा है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके क्रेडिट कार्ड का पूरा बकाया परिवार को चुकाना पड़ता है। हालांकि, कानूनी उत्तराधिकारियों की जिम्मेदारी सामान्य तौर पर उन्हें विरासत में मिली संपत्ति के मूल्य तक सीमित होती है।
इसे एक उदाहरण से समझ सकते हैं। मान लीजिए किसी व्यक्ति के क्रेडिट कार्ड पर 1.2 लाख रुपये बकाया हैं, लेकिन उसके कानूनी उत्तराधिकारी को विरासत में केवल 80 हजार रुपये की संपत्ति मिली है। ऐसी स्थिति में उत्तराधिकारी की जिम्मेदारी विरासत में मिली संपत्ति के मूल्य यानी 80 हजार रुपये तक होगी, न कि पूरे 1.2 लाख रुपये की।
अगर मृतक अपने पीछे कोई संपत्ति नहीं छोड़ता है और उत्तराधिकारियों को कुछ विरासत में नहीं मिलता, तो आमतौर पर उन्हें अपनी जेब से क्रेडिट कार्ड का बकाया चुकाने की जरूरत नहीं होती।
क्रेडिट कार्ड के प्रकार से भी तय होती है जिम्मेदारी
क्रेडिट कार्ड किस आधार पर जारी किया गया था, इसका भी बकाया भुगतान की जिम्मेदारी तय करने में महत्व होता है।
व्यक्तिगत क्रेडिट कार्ड: अगर कार्ड किसी व्यक्ति ने अपने नाम पर लिया है, तो उसकी मृत्यु के बाद बकाया भुगतान की जिम्मेदारी उसकी संपत्ति के मूल्य तक सीमित रहती है। सामान्य तौर पर परिवार के सदस्यों पर व्यक्तिगत रूप से पूरा कर्ज चुकाने की जिम्मेदारी नहीं आती।
संयुक्त क्रेडिट कार्ड: यदि कार्ड दो या उससे अधिक लोगों ने संयुक्त रूप से लिया है, तो एक कार्डधारक की मृत्यु के बाद जीवित संयुक्त कार्डधारक पर बकाया भुगतान की जिम्मेदारी आ सकती है। दिए गए विवरण के अनुसार, ऐसी स्थिति में जीवित कार्डधारक को पूरा बकाया चुकाना पड़ सकता है।
केवल अधिकृत उपयोगकर्ता वाला कार्ड: कई कंपनियां या फर्म अपने मालिकों और कर्मचारियों को इस्तेमाल के लिए क्रेडिट कार्ड देती हैं। ऐसे मामलों में यदि अधिकृत उपयोगकर्ता की मृत्यु हो जाती है, तो केवल कार्ड इस्तेमाल करने के आधार पर वह व्यक्ति व्यक्तिगत रूप से बकाया रकम के लिए जिम्मेदार नहीं माना जाता।
कार्डधारक की मृत्यु के बाद परिवार को क्या करना चाहिए?
क्रेडिट कार्डधारक की मृत्यु के बाद परिवार को बैंक से संपर्क करने में देरी नहीं करनी चाहिए। कुछ जरूरी कदम उठाकर खाते और बकाया भुगतान से जुड़ी स्थिति स्पष्ट की जा सकती है।
1. बैंक को तुरंत सूचना दें: कार्ड जारी करने वाले बैंक या वित्तीय संस्था को कार्डधारक की मृत्यु की जानकारी दें। साथ ही खाते को फ्रीज या बंद करने का अनुरोध करें, ताकि आगे कार्ड पर शुल्क या अन्य लेनदेन न हों।
2. जरूरी दस्तावेज जमा करें: बैंक को मृत्यु प्रमाण पत्र और उसके द्वारा मांगे गए अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराएं। इनमें मृतक का पहचान प्रमाण, कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र या उपलब्ध होने पर वसीयत शामिल हो सकती है। विवादित मामलों में उत्तराधिकार प्रमाण पत्र की जरूरत पड़ सकती है।
3. बकाया राशि का पूरा विवरण मांगें: बैंक से क्रेडिट कार्ड का विस्तृत स्टेटमेंट लें। इसमें मूल बकाया रकम, ब्याज और अन्य शुल्कों का अलग-अलग विवरण होना चाहिए।
4. मृत्यु के बाद हुए लेनदेन की जांच करें: कार्डधारक की मृत्यु की तारीख के बाद कार्ड से हुए किसी भी लेनदेन को ध्यान से जांचें। यदि कोई ऐसा लेनदेन सामने आता है जिसे परिवार ने नहीं किया है या जिसकी जानकारी नहीं है, तो बैंक के सामने उस पर आपत्ति दर्ज कराएं।
5. मृतक की संपत्ति से भुगतान की व्यवस्था करें: बकाया रकम का भुगतान मृतक की छोड़ी हुई संपत्ति से किया जाना चाहिए। यदि संपत्ति की कीमत बकाया रकम से कम है, तो बैंक से बातचीत कर भुगतान या निपटान की स्थिति स्पष्ट करें।
परिवार के लिए क्यों जरूरी है ये जानकारी?
क्रेडिट कार्डधारक की मृत्यु के बाद बैंक का बकाया अपने आप परिवार के हर सदस्य की व्यक्तिगत देनदारी नहीं बन जाता। भुगतान की जिम्मेदारी इस बात पर निर्भर करती है कि कार्ड व्यक्तिगत था या संयुक्त, मृतक ने कितनी संपत्ति छोड़ी और कानूनी उत्तराधिकारियों को कितनी संपत्ति विरासत में मिली। इसलिए बैंक से लिखित बकाया विवरण लेना और दस्तावेजों के आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है।