कच्चे तेल ने बढ़ाई टेंशन! 105 डॉलर के पार पहुंचा भाव, क्या फिर भारत में बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?
New Delhi : ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध का असर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के बाजार पर दिखाई देने लगा है। कुछ दिनों तक संघर्ष में अपेक्षाकृत शांति के बाद एक बार फिर तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का भाव बढ़कर 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है।
कच्चे तेल की कीमतों में इस उछाल का असर भारत समेत दुनिया के कई देशों पर पड़ सकता है। खासतौर पर भारत के लिए यह स्थिति महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है।
भारत पर कितना पड़ेगा असर?
दुनियाभर में कच्चे तेल की सप्लाई के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। भारत भी इस रास्ते से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने पर तेल की आपूर्ति और कीमतों पर असर पड़ने की आशंका रहती है।
युद्ध शुरू होने के बाद से ही कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। इससे पहले मई में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम में लगातार चार बार बढ़ोतरी देखने को मिली थी।
क्या फिर बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?
कच्चे तेल की कीमतों में वैश्विक तेजी के बाद भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतें निश्चित रूप से बढ़ेंगी।
भारत कच्चे तेल के आयात के लिए किसी एक देश पर पूरी तरह निर्भर नहीं है। देश अलग-अलग देशों से कच्चा तेल खरीदता है, जिससे किसी एक स्रोत या समुद्री मार्ग पर निर्भरता कम रहती है।
इसके अलावा, मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए देश में पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त भंडारण होने का दावा किया गया है। ऐसे में सरकार के पास तत्काल आपूर्ति को बनाए रखने के लिए पर्याप्त विकल्प मौजूद हो सकते हैं।
डॉलर मजबूत, रुपया भी कमजोर
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर भारतीय मुद्रा पर भी देखने को मिला है। वैश्विक स्तर पर डॉलर को मजबूती मिलने के बीच भारतीय रुपया 0.2 फीसदी गिरकर 95.30 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया। यह करीब 10 दिनों में रुपये का सबसे निचला स्तर बताया जा रहा है।
अगर ईरान-अमेरिका तनाव लंबे समय तक जारी रहता है और कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहती हैं, तो भारत के आयात बिल, रुपये की स्थिति और आने वाले समय में ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।