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Crude Oil : रूस-अमेरिका तनाव से बढ़ा तेल संकट का खतरा, कच्चे तेल की कीमतों में आ सकती है जोरदार उछाल

 

New Delhi : रूस और अमेरिका के बीच लगातार बढ़ रहे भू-राजनीतिक तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार (Global Oil Market) पर गहराता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ये टकराव और बढ़ा, तो इसका सीधा प्रभाव Crude Oil की कीमतों और वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ सकता है।

न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में Oil मार्केट विशेषज्ञों ने बताया कि यदि रूस पर और अधिक प्रतिबंध लगाए गए, तो आने वाले महीनों में ब्रेंट Crude Oil की कीमतें 80 से 82 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।

वेंचुरा कमोडिटीज के सीआरएम हेड एनएस रामास्वामी ने कहा कि ब्रेंट Oil (अक्टूबर 2025) की कीमतें वर्तमान 72.07 डॉलर से बढ़कर साल के अंत तक 80-82 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं। उन्होंने बताया कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस को यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के लिए 10-12 दिनों की समयसीमा दी है। यदि रूस इस समयसीमा में पीछे नहीं हटता, तो रूस से व्यापार करने वाले देशों पर अतिरिक्त प्रतिबंध और 100 प्रतिशत सेकेंडरी टैरिफ लगाए जा सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रंप के इस सख्त रुख से वैश्विक स्तर पर तेल व्यापार में बड़ी उथल-पुथल हो सकती है। रूस से Crude Oil खरीदने वाले देशों को या तो अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना होगा या फिर महंगे दामों पर कहीं और से तेल खरीदना पड़ेगा।

वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) Crude Oil के लिए भी ऐसा ही परिदृश्य बन रहा है। एक्सपर्ट्स के अनुसार WTI (सितंबर 2025) की कीमत मौजूदा 69.65 डॉलर से बढ़कर 73 डॉलर तक जा सकती है। वहीं, साल के अंत तक कीमतें 76 से 79 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। इस दौरान कीमत का निचला समर्थन स्तर 65 डॉलर रहेगा।

एनर्जी एक्सपर्ट नरेंद्र तनेजा ने चेतावनी दी है कि अगर रूस को वैश्विक तेल सप्लाई सिस्टम से बाहर किया गया, तो कच्चे तेल की कीमतें 100 से 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। उन्होंने बताया कि रूस प्रतिदिन लगभग 50 लाख बैरल कच्चे तेल का निर्यात करता है। ऐसे में किसी भी तरह की बाधा वैश्विक सप्लाई चेन को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रूस-अमेरिका टकराव में कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो 2026 तक कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंचाई पर बनी रह सकती हैं, जिससे वैश्विक आर्थिक स्थिरता पर भी असर पड़ेगा।