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31 जुलाई से पहले भरें ITR वरना लगेगा भारी जुर्माना, घर बैठे ऐसे भरें इनकम टैक्स रिटर्न

 

अगर आपने अभी तक वित्त वर्ष 2025-26 (असेसमेंट ईयर 2026-27) का इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल नहीं किया है, तो समय रहते इसे पूरा कर लें। ITR फाइल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई है। तय समय के बाद रिटर्न दाखिल करने पर आय के आधार पर ₹1,000 से ₹5,000 तक की लेट फीस देनी पड़ सकती है।

आयकर विभाग ने ई-फाइलिंग प्रक्रिया को पहले की तुलना में काफी आसान बना दिया है। अब टैक्सपेयर्स बिना किसी एजेंट या चार्टर्ड अकाउंटेंट की मदद के घर बैठे ऑनलाइन ITR फाइल कर सकते हैं।

नई और पुरानी टैक्स व्यवस्था में क्या है अंतर?

चार्टर्ड अकाउंटेंट दीपक तिवारी के अनुसार, असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए नई टैक्स व्यवस्था डिफॉल्ट विकल्प है। यानी यदि आप कोई विकल्प नहीं चुनते हैं, तो आपका रिटर्न स्वतः नई टैक्स व्यवस्था के तहत दाखिल होगा।

नई टैक्स व्यवस्था में ₹12 लाख तक की टैक्स योग्य आय पर धारा 87A के तहत टैक्स रिबेट का लाभ मिलता है, जिससे टैक्स देनदारी शून्य हो सकती है। वहीं नौकरीपेशा लोगों को ₹75,000 तक का स्टैंडर्ड डिडक्शन भी मिलता है।

दूसरी ओर, पुरानी टैक्स व्यवस्था में 80C, 80D, HRA और अन्य टैक्स छूट का लाभ मिलता है। यदि आपने टैक्स बचाने के लिए निवेश किए हैं, तो यह विकल्प आपके लिए फायदेमंद हो सकता है।

ऐसे करें ऑनलाइन ITR फाइल

आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करें।
E-File > Income Tax Returns > File Income Tax Return विकल्प चुनें।
असेसमेंट ईयर 2026-27 का चयन करें।
ऑनलाइन मोड में नई फाइलिंग शुरू करें या सेव ड्राफ्ट को आगे बढ़ाएं।
अपनी आय के अनुसार सही ITR फॉर्म चुनें।
₹50 लाख तक की सैलरी, एक मकान और ब्याज आय वाले अधिकांश लोगों के लिए ITR-1।
शेयर, म्यूचुअल फंड, F&O, बिजनेस या प्रोफेशनल आय होने पर ITR-3।
पहले से भरी गई जानकारी (AIS और Form-16) का मिलान करें।
यदि टैक्स बनता है तो ऑनलाइन भुगतान करें।
रिटर्न सबमिट करने के बाद 30 दिनों के भीतर ई-वेरिफिकेशन अवश्य करें।

ई-वेरिफिकेशन क्यों है जरूरी?

ITR दाखिल करने के बाद आधार OTP, नेट बैंकिंग या बैंक खाते के माध्यम से ई-वेरिफिकेशन करना अनिवार्य है। यदि ऑनलाइन वेरिफिकेशन संभव न हो, तो ITR-V पर हस्ताक्षर कर 30 दिनों के भीतर CPC, बेंगलुरु भेजना होगा। तय समय में वेरिफिकेशन नहीं होने पर रिटर्न अमान्य माना जाएगा।

अलग-अलग आय की जानकारी सही तरीके से भरें

मकान का किराया: इसे Income from House Property में दिखाएं। कुल किराए पर 30% स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ मिलता है।
बैंक ब्याज: सेविंग अकाउंट और FD से मिलने वाला ब्याज Income from Other Sources में दर्ज करें।
शेयर और म्यूचुअल फंड: कैपिटल गेन की गणना स्वयं कर सही विवरण भरें। डिविडेंड आय भी अलग से दिखाना जरूरी है।

रिफंड अटकने की सबसे बड़ी वजह

यदि रिफंड नहीं मिल रहा है, तो सबसे पहले जांच लें कि आपका बैंक अकाउंट आयकर पोर्टल पर Pre-Validated है या नहीं। साथ ही बैंक खाते में दर्ज नाम और PAN की जानकारी पोर्टल से पूरी तरह मेल खानी चाहिए।

किन मामलों में ITR भरना जरूरी है?

भले ही आपका टैक्स शून्य हो, लेकिन निम्न परिस्थितियों में ITR दाखिल करना जरूरी हो सकता है—

विदेशी संपत्ति या विदेशी बैंक खाते से जुड़ाव।
करंट अकाउंट में ₹50 लाख या सेविंग अकाउंट में ₹10 लाख से अधिक नकद जमा।
विदेश यात्रा पर ₹2 लाख से ज्यादा खर्च।
एक वर्ष में ₹1 लाख से अधिक का बिजली बिल।
कानूनी वारिस भी भर सकते हैं ITR

यदि किसी टैक्सपेयर्स का निधन हो जाता है, तो उसका कानूनी वारिस आयकर पोर्टल पर Legal Heir के रूप में पंजीकरण कर मृतक की ओर से ITR दाखिल कर सकता है। यदि रिफंड बनता है, तो वह सत्यापित बैंक खाते में जमा किया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि ITR केवल टैक्स रिटर्न नहीं, बल्कि आय का आधिकारिक रिकॉर्ड भी है। भविष्य में लोन, वीजा, बीमा दावों और सड़क दुर्घटना मुआवजे जैसे मामलों में भी यह महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित हो सकता है।