इंपोर्ट टैरिफ बढ़ते ही सोना-चांदी की कीमतों में आई बड़ी उछाल, जानें आज का ताजा भाव
केंद्र सरकार ने सोने और चांदी पर इंपोर्ट टैरिफ को 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया है। सरकार का यह बड़ा कदम सोने-चांदी के आयात को कम करने, बढ़ते चालू खाता घाटे (CAD) पर नियंत्रण पाने और भारतीय रुपये को मजबूती देने के उद्देश्य से उठाया गया है।
सरकार के फैसले के तुरंत बाद घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल देखने को मिला। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी की कीमत बढ़कर 2,95,805 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गई, जबकि सोना 1,62,648 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर तक चढ़ गया। चांदी में 6% का अपर सर्किट भी लगा।
आज का सोने का भाव
देश के प्रमुख शहरों में 24 और 22 कैरेट सोने की कीमतों में तेजी दर्ज की गई।
| शहर | 24 कैरेट (प्रति ग्राम) | 22 कैरेट (प्रति ग्राम) |
|---|---|---|
| दिल्ली | ₹16,804 | ₹14,331 |
| मुंबई | ₹16,789 | ₹15,390 |
| चेन्नई | ₹15,634 | ₹14,331 |
| कोलकाता | ₹16,789 | ₹15,390 |
| बेंगलुरु | ₹16,789 | ₹15,390 |
| केरल | ₹16,789 | ₹15,390 |
| वडोदरा | ₹16,794 | ₹15,395 |
| अहमदाबाद | ₹16,794 | ₹15,395 |
| पुणे | ₹16,789 | ₹15,390 |
चांदी की कीमतों में भारी उछाल
इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने के बाद चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी देखी गई। MCX पर जुलाई कॉन्ट्रैक्ट करीब 7.25% उछलकर 2,99,283 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया।
चेन्नई में चांदी का रेट 3,00,100 रुपये प्रति किलोग्राम के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया, जबकि दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों में कीमत करीब 2,90,100 रुपये प्रति किलो बनी हुई है।
सरकार ने क्यों बढ़ाई ड्यूटी?
भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर सोना और चांदी विदेशों से आयात करता है और इसका भुगतान डॉलर में किया जाता है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ रहा है।
सरकार का मानना है कि गैर-जरूरी आयात कम करके डॉलर की निकासी को रोका जा सकता है। इसी वजह से कीमती धातुओं पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने का फैसला लिया गया है।
बढ़ता व्यापार घाटा बना चिंता
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल गोल्ड इंपोर्ट 24% बढ़कर 71.98 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इसके चलते देश का व्यापार घाटा बढ़कर 333.2 अरब डॉलर हो गया, जबकि चालू खाता घाटा (CAD) GDP के 1.3% तक पहुंच गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का यह कदम आयात कम करने और आर्थिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में अहम माना जा रहा है।