सोने की कीमतों में आग, फिर भी क्यों हो रही रिकॉर्ड खरीदारी! ETF और डिजिटल गोल्ड में भी बंपर निवेश
Gold Price News 2026: सरकार द्वारा सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने के बाद गोल्ड की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। बावजूद इसके भारतीय बाजारों में खरीदारी तेज हो गई है। जानें फिजिकल गोल्ड, ETF, डिजिटल गोल्ड, टैक्स नियम और शादी सीजन में बदलते ट्रेंड की पूरी रिपोर्ट।
Gold Price Hike 2026: भारतीयों का सोने के प्रति लगाव किसी परिचय का मोहताज नहीं है। चाहे शादी-ब्याह हो, त्योहार हों या निवेश का मामला, देश में सोना हमेशा पहली पसंद रहा है। लेकिन इस बार हालात कुछ अलग हैं। सरकार ने सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी में बड़ा इजाफा कर दिया, जिसके बाद घरेलू बाजार में गोल्ड की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला।
हैरानी की बात यह है कि रिकॉर्ड महंगाई के बावजूद देशभर के ज्वेलरी शोरूम, सर्राफा बाजार और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर खरीददारों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सिर्फ फिजिकल गोल्ड ही नहीं, बल्कि गोल्ड ETF और डिजिटल गोल्ड में भी निवेशकों ने जमकर पैसा लगाया है।
सरकार ने बढ़ाई इंपोर्ट ड्यूटी, सोना पहुंचा रिकॉर्ड स्तर पर
दरअसल, केंद्र सरकार ने 13 मई 2026 से सोने पर लगने वाली बेसिक कस्टम ड्यूटी को 5% से बढ़ाकर 10% कर दिया है। इसके साथ ही एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) को भी 1% से बढ़ाकर 5% कर दिया गया।
इन दोनों बदलावों के बाद सोने पर कुल इंपोर्ट ड्यूटी अब 15% हो गई है।
सरकारी फैसले का असर तुरंत बाजार में दिखाई दिया। 24 कैरेट सोना, जो पहले लगभग ₹1,47,160 प्रति 10 ग्राम बिक रहा था, वह कुछ ही घंटों में करीब 10% महंगा होकर ₹1,62,120 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया। दिलचस्प बात यह रही कि 13 मई को बाजार में बिक रहा सोना पुराने स्टॉक का था, फिर भी ज्वेलर्स ने नई ड्यूटी के हिसाब से कीमतें बढ़ा दीं।
पीएम की अपील भी नहीं रोक पाई सोने की खरीदारी
कुछ समय पहले प्रधानमंत्री ने देशवासियों से विदेशी मुद्रा भंडार बचाने और रुपये की कमजोरी को रोकने के लिए एक साल तक सोना कम खरीदने की अपील की थी।
भारत अपनी जरूरत का करीब 90% सोना विदेशों से आयात करता है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 700 से 800 टन तक सोने का आयात किया, जिससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर लगभग 72 अरब डॉलर का दबाव पड़ा।
कच्चे तेल के बाद सोना भारत का दूसरा सबसे बड़ा आयातित उत्पाद बन चुका है। इसके बावजूद शादी सीजन और निवेश की मानसिकता के चलते भारतीय ग्राहकों ने महंगे दामों की परवाह किए बिना जमकर खरीदारी की।
फिजिकल गोल्ड, ETF और डिजिटल गोल्ड में कहां क्या हुआ?
1. फिजिकल गोल्ड की खरीदारी में भारी उछाल
सोने की कीमतें बढ़ने के बावजूद ज्वेलरी शोरूम्स में ग्राहकों की भीड़ लगातार बनी हुई है। शादी सीजन के कारण लोग गहनों की खरीदारी टालना नहीं चाहते।
ज्वेलर्स ग्राहकों से अलग से इंपोर्ट ड्यूटी नहीं लेते, बल्कि उसे सीधे गोल्ड रेट में जोड़ देते हैं। ऐसे में ग्राहकों को बढ़ी हुई कीमत तुरंत महसूस हुई।
2. गोल्ड ETF में रिकॉर्ड निवेश
गोल्ड ETF यानी एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स में भी निवेशकों ने तेजी से पैसा लगाया।
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि ETF की कीमतों में ड्यूटी बढ़ोतरी का असर थोड़ी देरी से दिखता है। इसी वजह से कई निवेशकों ने जल्दी पोजीशन बनाने के लिए ETF में पैसा निवेश किया।
3. डिजिटल गोल्ड की डिमांड भी बढ़ी
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और ऑनलाइन रिफाइनर्स के जरिए बिकने वाले डिजिटल गोल्ड में भी जबरदस्त खरीदारी देखने को मिली। विशेषज्ञों के अनुसार, छोटे निवेशकों ने शॉर्ट-टर्म निवेश के तौर पर डिजिटल गोल्ड को तेजी से चुना क्योंकि इसमें कम रकम से निवेश शुरू किया जा सकता है।
क्यों बढ़ रहा है सोने की तरफ लोगों का भरोसा?
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि रुपये के अवमूल्यन, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और बढ़ती महंगाई के बीच सोना अब भी सबसे सुरक्षित निवेश विकल्प माना जा रहा है।
वहीं, मालाबार ग्रुप के चेयरमैन एम पी अहमद के अनुसार, पहली बार सोना खरीदने वाले और निवेश के मकसद से आने वाले ग्राहक फिलहाल नई रणनीति बना रहे हैं, लेकिन गोल्ड की डिमांड लंबे समय तक कमजोर पड़ती नहीं दिख रही।
हल्के वजन वाली ज्वेलरी की मांग बढ़ी
महंगे सोने के कारण अब ग्राहक भारी गहनों की बजाय हल्के वजन वाली ज्वेलरी खरीदना पसंद कर रहे हैं। ज्वेलर्स का कहना है कि लोग कम बजट में स्टाइलिश डिजाइन चाहते हैं, इसलिए लाइट वेट ज्वेलरी की डिमांड तेजी से बढ़ी है। हालांकि एक्सपर्ट्स सलाह दे रहे हैं कि खरीदारी करते समय हॉलमार्क और क्वालिटी की जांच जरूर करें।
पुराने सोने के एक्सचेंज का ट्रेंड तेज
बाजार में पुराने सोने को बदलकर नई ज्वेलरी लेने का चलन भी तेजी से बढ़ रहा है। हालांकि एक्सचेंज करते समय ग्राहकों के पास ओरिजिनल बिल और सर्टिफिकेट होना जरूरी है। इनके बिना ज्वेलर्स मेकिंग चार्ज और मौजूदा मार्केट रेट के हिसाब से ज्यादा कटौती कर सकते हैं।
डायमंड ज्वेलरी पर भारी डिस्काउंट
सोने की ऊंची कीमतों के बीच ज्वेलर्स अब डायमंड ज्वेलरी पर बड़े ऑफर्स दे रहे हैं। शादी सीजन को देखते हुए कई ब्रांड्स जीरो मेकिंग चार्ज, भारी डिस्काउंट और एक्सचेंज बोनस जैसी स्कीमें चला रहे हैं।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि डायमंड ज्वेलरी का बायबैक और वैल्यूएशन गोल्ड से काफी अलग होता है, इसलिए ग्राहकों को खरीदारी से पहले नियमों को ध्यान से समझ लेना चाहिए।
पुराना सोना बेचने पर टैक्स का बड़ा नियम
अगर आप पुराना सोना, डिजिटल गोल्ड या ETF बेचकर नया निवेश करने की योजना बना रहे हैं, तो टैक्स नियमों को समझना बेहद जरूरी है। यदि सोना खरीदने के 1 साल के भीतर बेचा जाता है, तो उससे होने वाला मुनाफा आपकी कुल आय में जोड़कर टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लिया जाएगा। वहीं, फाइनेंस एक्ट 2024 के अनुसार यदि फिजिकल गोल्ड को 24 महीने से ज्यादा समय तक रखने के बाद बेचा जाता है, तो उस पर बिना इंडेक्सेशन के 12.5% की दर से टैक्स लगेगा।
टैक्स बचाने का क्या है तरीका?
टैक्स एक्सपर्ट्स के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति सोने की बिक्री से हुए मुनाफे पर टैक्स बचाना चाहता है, तो आयकर अधिनियम की धारा 54F के तहत राहत ले सकता है।
इसके तहत सोना बेचकर मिली रकम को नया रेजिडेंशियल मकान खरीदने या बनवाने में निवेश करने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स से छूट मिल सकती है। नियम के अनुसार, बिक्री के 2 साल के भीतर नया घर खरीदना या 3 साल के भीतर मकान निर्माण पूरा करना जरूरी होता है। हालांकि इस छूट की अधिकतम सीमा ₹10 करोड़ तय की गई है।
क्या अभी सोना खरीदना सही रहेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव आगे भी जारी रह सकता है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े निवेश से बचते हुए चरणबद्ध तरीके से निवेश करना चाहिए। वहीं शादी और पारंपरिक जरूरतों के कारण भारत में सोने की मांग निकट भविष्य में कमजोर पड़ती नजर नहीं आ रही।