वस्तु और सेवा कर (GST) 2.0 और भारतीय अर्थव्यवस्था
मिथिलेश कुमार पाण्डेय
जीएसटी 2.0 जिसे सरकार बृहद कर सुधार के रूप में प्रस्तुत कर रही है। इसका क्रियान्वयन का समय कुछ ऐसा है जब कि न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया में ट्रम्प के MAGA अभियान ने एक कौतूहलपूर्ण अनिश्चयता बना रखी है l भारत और प्रधानमंत्री मोदी को अपना प्रिय दोस्त बतानेवाले ट्रम्प ने भारत पर विशेष कृपा दिखाते हुए 50% टैरीफ लग रखा है l देश के अर्थशास्त्री, विशेषज्ञ, व्यापारी, उद्योगपति, निर्यातक आदि जिस समय टैरीफ के आर्थिक नुकसान के मूल्यांकन और इसकी भरपायी के उपायों की चर्चा कर रहे थे उसी समय भारत सरकार ने GST में व्यापक सुधार की घोषणा करके देशवासिओं को राहत देने की कोशिश की है l
देश और दुनिया की आर्थिक गतिविधिओं में रुचि रखनेवाले इस बात का मूल्यांकन करने की चेष्टा करेंगे कि व्यापक कर सुधार टैरीफ के कारण अर्थव्यवस्था के संभावित नुकसान के प्रभाव को किस हद तक कम कर सकेंगे l आइए हमलोग भी इस गंभीर विषय पर कुछ चर्चा करते हैं l
टैरिफ का बढ़ा हुआ दर लागू हो चुका है इसलिए पहले इसी की चर्चा करते हैं l यह तो सच है कि अमेरिका हमारा एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है जिसके साथ हमारा ट्रैड सर्प्लस रहता है अर्थात भारत अमेरिका को निर्यात ज्यादा करता है और आयात कम जो कि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में अच्छा माना जाता है l भारत से अमेरिका को वस्तुयों का निर्यात (2024 में ) लगभग 10,000 करोड़ डॉलर के समतुल्य था जो कि भरत के GDP का लगभग 2% होता है l इनमे से भी सभी वस्तुओं पर 50% टैरीफ नहीं लगाया गया है l
अतः इस टैरीफ का भारत के सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था पर प्रभाव सीमित ही होगा लेकिन कुछ विशेष क्षेत्रों ( वस्त्र परिधान, रत्न आभूषण, ऑटो पार्ट्स, स्टील अलुमिनिअम आदि ) में तकलीफ ज्यादा महशुस किया जाएगा l हालांकि अमेरिका से व्यापार समझौते का प्रयास जारी है और अगर समझौता नहीं हुआ तो भारत विश्व में अन्य बाजार तलाश करके अपने उत्पादों को बेच सकता है और टैरीफ के नुकसान की भरपायी कर सकेगा l परंतु उपरोक्त क्षेत्रों में तात्कालिक व्यापार और रोजगार के कमी से इनकार नहीं किया जा सकता है l ऐसे समय में जबकि पूरे देश में एक नकारात्मक व्यापारिक माहौल तैयार हो रहा था उस समय भारत सरकार ने व्यापक कर सुधार के निर्णय से माहौल को सकारात्मक बनाने का सफल प्रयास किया है l
एक राष्ट्र एक कर की परिकल्पना को साकार करने के उद्देश्य से 01/07/2017 को भारत में GST की शुरुआत की गई थी l परिवर्तन कहीं भी सहज स्वीकार्य नहीं होता है और खास करके प्रजातान्त्रिक व्यवस्था में तो विपक्ष सरकार की नीतियों का विरोध करता ही रहा है l वर्तमान में GST की 4 दरें (5%, 12%, 18% & 28%) लागू है l वस्तुयों के प्रकार और उनके उपयोग के आधार पर उन्हे इन 4 दरों में से किसी एक में डाला गया था l GST के लागू होने के बाद कर संग्रह में काफी वृद्धि हुयी l वर्ष 2018-19 में जीएसटी संग्रह 11,77,368 करोड़ रुपया था जो कि 2024-25 में बढ़कर 22,08,861 करोड़ रुपए हो गया l GST लागू होने से पहले ( 2016-17) में कुल अप्रत्यक्ष कर संग्रह 11.19 लाख करोड़ रुपये था l
कर संरचना के सरलीकरण, अर्थव्यवस्था के प्रोत्साहन और अनुपालन को आसान बनाने के उद्देश्य से GST में व्यापक बदलाव लाया जा रहा है जो कि 22/09/2025 से प्रभावी होगा l देश में विभिन्न अंशधरकों द्वारा कर के दर को तर्कसंगत बनाने की मांग की जा रही थी l परिवर्तित व्यवस्था में 28% और 12% के दर को समाप्त कर दिया गया है l अब GST के मुख्य 2 दरें होंगी जो 5% और 18% होंगी l विलासिता संबंधी वस्तुओं और नशीली/ हानिकारक वस्तुओं पर 40% का टैक्स लगाने का निर्णय लिया गया है l पूर्व में 12% कर के दायरे में आने वाले लगभग सभी वस्तुओं को 5% कर के दायरे में लाया गया है और 28% कर वाले लगभग 90% वस्तुओं को 18% कर के दायरे में रखा गया है l GST 2.0 के लागू हो जाने के कारण चालू वित्त वर्ष में सरकार का GST संग्रह लगभग 50,000 करोड़ रुपये कम होने की संभावना है l लेकिन सामानों के सस्ते होने से विक्री में वृद्धि होगी जिससे कर संग्रह में हुए कमी की भरपायी हो जाएगी और आने वाले वर्षों में इसमे इजाफा होता रहेगा l 1200 CC से कम की कारे, दुपहिया वाहन, टेलीविजन, फ्रिज, AC आदि अन्य उपभोक्ता सामग्री सस्ते होंगे जिससे इनकी मांग बढ़ेगी जिसके फलस्वरूप आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी और अर्थव्यवस्था की गति तेज होगी l
कर संग्रह के आंकड़ों से स्पष्ट है कि कुल कर संग्रह का लगभग 70% से ज्यादा 18% वाले दर से होता रहा है, करीब 15% कर संग्रह 28% वाले दर से होता है तथा 12% और 5% वाले दर से लगभग समान रूप से 6-7% कर संग्रह होता है l 12% कर वाले वस्तुओं को 5% कर के दायरे में लाने से कर राजस्व में कोई विशेष कमी नहीं आएगी परंतु 28% को 18% में लाने से राजस्व में कमी आएगी l आंकड़ों के विश्लेषण से ऐसा प्रतीत होता है कि यदि विक्री का स्तर यही रहा तो कर राजस्व में लगभग 2-2.25% की कमी हो सकती है l
आय कर के दरों में कमी से डिस्पोज़बल इनकम बढ़ी है और GST में कमी से समान सस्ते होंगे जिससे बाजार में मांग की वृद्धि होगी और निश्चित रूप से विक्री बढ़ेगी और फलस्वपरूप अप्रत्यक्ष कर संग्रह बढ़ेगा जिससे कर संग्रह में आई तात्कालिक कमी की न केवल भरपाई होगी बल्कि आगे वृद्धि भी होगी l परंतु यहाँ पर इस बात का ध्यान रखना होगा कि आजकल आईटी सेक्टर में नौकरियों की कमी हो रही है l बड़ी कंपनियां कर्मचारिओ की छटनी कर रही हैं l भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनी TCS ने 12,000 कर्मचारिओ को नौकरी से निकाल दिया है और अन्य छोटो बड़ी कंपनियां भी इसी रास्ते पर चल रही हैं l नौकरी की अनिश्चयता के इस दौर में GenZ, Millennials ( नवयुवक/ युवतियाँ ) खर्च के मामले में थोड़ा सावधानी बरतेंगे जिसका प्रभाव बाजार पर पड़ेगा l
बोस्टन कंसलटींग ग्रुप के अध्ययन के अनुसार कुल उपभोक्ता खर्च ( 8,60,000 करोड़ डॉलर ) का लगभग 43% खर्च GenZ के द्वारा किया जाता है ( खुद के द्वारा या इनके द्वारा प्रभावित ) l यदि इनमें मिलेननीयल्स को शामिल कर लिया जाय तो यह रकम और भी बढ़ जाएगी क्योंकि बहुत बडा कार्य बल इस श्रेणी में आते हैं l इस छोटे से गति अवरोधक के बावजूद आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और राजस्व संग्रह भी I
त्योहारी सीजन के शुरुआत से लागू हो रहे GST 2.0 को लेकर देश में एक व्यापक रूप से सकारात्मक माहौल है l उत्पादक, विक्रेता और ग्राहक सभी इस परिवर्तन से उत्साहित हैं और निश्चित तौर पर आने वाले समय में बाजार में जबरदस्त उछाल देखने को मिलेगा ऐसा प्रतीत होता है l यह परिवर्तन अवश्य ही देश के GDP पर टैरीफ के नकारात्मक प्रभाव को खत्म करेगा और भारत की अर्थव्यवस्था में तेज वृद्धि लाएगा l उच्च टैरीफ से कुछ खास क्षेत्रों में हुए नुकसान की तात्कालिक भरपाई करने के लिए सरकार को आवश्यक सहायता पैकेज लाकर संबंधित कार्यबल को सहारा देना होगा ताकि अर्थव्यवस्था की तेजी के लाभ से वे वंचित न रह जाएं l सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ प्रयास कर भी रही है जिससे समाज का कोई हिस्सा पिछड़ न जाय l विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा जबकि देश का समग्र विकास हो l
( लेखक पूर्व सहायक महाप्रबंधक, बैंक ऑफ बड़ौदा एवं आर्थिक विश्लेषक हैं )