GST के 10 साल पूरे: टैक्स चोरी रोकने के लिए AI की एंट्री, जानिए क्या-क्या बदलने वाला है
GST 10 Years: देश की सबसे बड़ी कर सुधार प्रणाली वस्तु एवं सेवा कर (GST) एक जुलाई 2026 को अपने 10 वर्ष पूरे करने जा रही है। एक दशक पहले लागू हुई 'वन नेशन-वन टैक्स' व्यवस्था अब नए दौर में प्रवेश कर रही है। सरकार का फोकस अब केवल टैक्स कलेक्शन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा इंटीग्रेशन, तेज रिफंड सिस्टम और आसान टैक्स अनुपालन के जरिए पूरी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है।
AI करेगा टैक्स चोरी की पहचान, कारोबारियों को मिलेगी राहत
सरकार अब जीएसटी, आयकर और सीमा शुल्क (कस्टम) के डेटाबेस को एकीकृत कर रही है। इससे टैक्स चोरी की पहचान पहले से कहीं अधिक आसान होगी और जोखिम का स्वतः आकलन किया जा सकेगा।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स की मदद से संदिग्ध लेन-देन पर नजर रखी जाएगी, जबकि ईमानदार कारोबारियों, खासकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए अनुपालन प्रक्रिया आसान बनाने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का मानना है कि इससे मैन्युअल हस्तक्षेप कम होगा और कारोबारियों की अनुपालन लागत भी घटेगी।
देश के सबसे बड़े आर्थिक सुधारों में शामिल है GST
1 जुलाई 2017 की आधी रात संसद के केंद्रीय कक्ष में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने जीएसटी का शुभारंभ किया था। उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे 'गुड एंड सिंपल टैक्स' बताते हुए कहा था कि यह देश की कर व्यवस्था को सरल बनाएगा और व्यापारियों को कई तरह की जटिलताओं से राहत मिलेगी।
आज जीएसटी को भारत के सबसे बड़े आर्थिक सुधारों में गिना जाता है। इसने अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को एकीकृत किया, करदाताओं की संख्या बढ़ाई और सरकार के राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज कराई।
'वन नेशन-वन टैक्स' का सपना कैसे हुआ साकार
जीएसटी लागू होने से पहले देश में केंद्र और राज्यों के 17 अलग-अलग कर और 13 प्रकार के उपकर (सेस) लागू थे। जीएसटी ने इन्हें एकीकृत कर पूरे देश के लिए समान अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था लागू की, जिससे 'एक राष्ट्र-एक कर' की अवधारणा को मजबूती मिली।
इस ऐतिहासिक सुधार को लागू करने में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने राज्यों और विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाकर दुनिया की सबसे जटिल अप्रत्यक्ष कर प्रणालियों में से एक को सफलतापूर्वक लागू कराया।
66 लाख से बढ़कर 1.6 करोड़ हुए GST करदाता
जीएसटी लागू होने के समय देश में करीब 66.5 लाख पंजीकृत करदाता थे। वर्ष 2026 तक यह संख्या बढ़कर लगभग 1.6 करोड़ पहुंच चुकी है। विशेषज्ञ इसे भारतीय अर्थव्यवस्था के तेजी से संगठित होने और डिजिटल टैक्स सिस्टम की सफलता का संकेत मान रहे हैं।
टैक्स स्लैब में भी हुआ बड़ा बदलाव
शुरुआत में जीएसटी के तहत 5%, 12%, 18% और 28% के चार टैक्स स्लैब लागू किए गए थे। वहीं विलासिता और अहितकर वस्तुओं पर अतिरिक्त सेस भी लगाया गया।
इसके बाद 22 सितंबर 2025 से नई दो-स्तरीय जीएसटी व्यवस्था लागू की गई। इसके तहत अधिकांश आवश्यक वस्तुओं को 5 प्रतिशत और सामान्य वस्तुओं एवं सेवाओं को 18 प्रतिशत टैक्स स्लैब में रखा गया, जबकि केवल लक्जरी और अहितकर वस्तुओं पर 40 प्रतिशत की उच्च दर लागू रखी गई। सरकार का दावा है कि इस बदलाव से अधिकांश वस्तुएं सस्ती हुई हैं और उपभोक्ताओं के हाथ में अधिक बचत हो रही है।
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा GST कलेक्शन
वित्त वर्ष 2017-18 में जीएसटी लागू होने के समय औसत मासिक जीएसटी संग्रह लगभग 89,700 करोड़ रुपये था।
वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में औसत मासिक संग्रह बढ़कर लगभग 1.85 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। पूरे वित्त वर्ष में सकल जीएसटी संग्रह 22.27 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 8.3 प्रतिशत अधिक है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि नई जीएसटी व्यवस्था का उद्देश्य आम लोगों की क्रय शक्ति बढ़ाना और कर प्रणाली को अधिक सरल एवं प्रभावी बनाना है।
पेट्रोल-डीजल अभी भी GST से बाहर
जीएसटी लागू करते समय यह प्रावधान रखा गया था कि भविष्य में कच्चा तेल, पेट्रोल, डीजल, विमान ईंधन (ATF) और प्राकृतिक गैस को भी जीएसटी के दायरे में लाया जा सकता है। हालांकि इस पर अंतिम निर्णय जीएसटी परिषद को लेना है। अब तक विमान ईंधन (ATF) को जीएसटी में शामिल करने पर चर्चा हुई, लेकिन राज्यों की सहमति नहीं बन सकी।
सरकारी सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार फिलहाल राज्यों की पहल का इंतजार कर रही है। जब तक राज्यों की ओर से प्रस्ताव नहीं आता, तब तक पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाने की संभावना कम मानी जा रही है।