{"vars":{"id": "130921:5012"}}

IMF ने दुनिया की अर्थव्यवस्था को लेकर दी चेतावनी, AI बबल और युद्ध समेत 3 बड़े खतरे

IMF ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने AI निवेश में संभावित गिरावट, मध्य पूर्व में जारी युद्ध और बढ़ते सरकारी कर्ज को तीन बड़े जोखिम बताया है। संस्था ने 2026 में दुनिया की विकास दर 3.1% रहने का अनुमान जताया है। जानिए तेल की कीमतों और वैश्विक व्यापार पर इसका क्या असर पड़ सकता है।

 

IMF Global Economy Warning: वैश्विक अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर तीन बड़े खतरे मंडरा रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में निवेश की तेजी अगर अचानक कमजोर पड़ती है, मध्य पूर्व में युद्ध लंबा खिंचता है और सरकारों पर कर्ज का बोझ बढ़ता रहता है, तो इसका असर दुनिया की आर्थिक वृद्धि पर पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में इन जोखिमों को लेकर आगाह किया है।

IMF ने 2026 में वैश्विक अर्थव्यवस्था की विकास दर 3.1 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। जुलाई में यह अनुमान 3 प्रतिशत था। AI से जुड़े बुनियादी ढांचे में लगातार हो रहे निवेश ने महंगे तेल और युद्ध से पैदा हुए दबाव के बावजूद आर्थिक वृद्धि को सहारा दिया है। हालांकि, IMF का कहना है कि मौजूदा हालात को देखते हुए वैश्विक अर्थव्यवस्था की मजबूती को हल्के में नहीं लिया जा सकता।

1. AI में निवेश की तेजी थमी तो शेयर बाजार पर क्या होगा असर?

दुनिया भर में AI तकनीक, डेटा सेंटर और इससे जुड़े बुनियादी ढांचे पर भारी निवेश किया जा रहा है। इस निवेश ने खासकर तकनीक से जुड़ी कंपनियों और उनके बाजार मूल्यांकन को मजबूती दी है। लेकिन IMF को आशंका है कि यदि AI कंपनियां उम्मीद के मुताबिक कमाई और उत्पादकता बढ़ाने में सफल नहीं रहीं, तो निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ सकता है।

ऐसी स्थिति में AI से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट आ सकती है। इसका असर केवल शेयर बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कंपनियों की वित्तीय स्थिति, कर्ज चुकाने की क्षमता और उपभोक्ताओं के खर्च पर भी पड़ सकता है।

IMF के एक प्रतिकूल परिदृश्य के मुताबिक, AI में निवेश में बड़ी गिरावट आने पर 2028 तक वैश्विक GDP में 1.1 प्रतिशत तक की कमी का जोखिम हो सकता है। इसी परिदृश्य में अमेरिकी अर्थव्यवस्था के उत्पादन पर भी गंभीर असर पड़ने का अनुमान है।

AI से जुड़ा कारोबार वैश्विक व्यापार के लिए भी महत्वपूर्ण बन गया है। IMF के मुताबिक, 2023 से 2025 के बीच AI से संबंधित वस्तुओं के व्यापार में 29 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि इसी अवधि में कुल वैश्विक व्यापार 8.3 प्रतिशत बढ़ा। ऐसे में AI निवेश में सुस्ती आने पर तकनीकी उत्पादों की आपूर्ति करने वाले देशों और कंपनियों को भी नुकसान हो सकता है।

2. मध्य पूर्व में युद्ध लंबा चला तो महंगा हो सकता है तेल

IMF की दूसरी बड़ी चिंता मध्य पूर्व में जारी संघर्ष है। युद्ध के कारण तेल की कीमतों और समुद्री परिवहन पर दबाव बना हुआ है। यदि संघर्ष लंबा खिंचता है, तो ऊर्जा की लागत बढ़ सकती है और इसका असर महंगाई तथा आर्थिक विकास पर पड़ सकता है।

IMF का 2027 के लिए 3.4 प्रतिशत वैश्विक विकास दर का अनुमान इस उम्मीद पर आधारित है कि मार्च 2027 तक होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुल जाएगा और अक्टूबर 2027 तक समुद्री परिवहन की स्थिति युद्ध से पहले जैसी हो जाएगी।

लेकिन यदि हालात और बिगड़ते हैं तथा 2027 की पहली तिमाही तक कच्चे तेल की कीमत 130 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती है, तो वैश्विक आर्थिक विकास दर में 0.5 प्रतिशत अंक की कमी आ सकती है।

तेल महंगा होने से परिवहन और उत्पादन की लागत बढ़ सकती है। इसका दबाव कंपनियों के कारोबार, आम लोगों के खर्च और सरकारों की आर्थिक नीतियों पर भी पड़ेगा। महंगाई बढ़ने की स्थिति में केंद्रीय बैंकों के लिए आर्थिक विकास और कीमतों को नियंत्रित करने के बीच संतुलन बनाना और मुश्किल हो सकता है।

3. बढ़ता सरकारी कर्ज भी बड़ी चुनौती

IMF ने तीसरे बड़े जोखिम के तौर पर सरकारों पर बढ़ते कर्ज और बॉन्ड पर मिलने वाली ऊंची यील्ड को रेखांकित किया है। जब सरकारों को कर्ज लेने के लिए ज्यादा ब्याज देना पड़ता है, तो बजट का बड़ा हिस्सा ब्याज भुगतान में खर्च हो सकता है। इससे विकास योजनाओं और अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए उपलब्ध संसाधन सीमित हो जाते हैं।

विकासशील देशों के लिए यह चुनौती और गंभीर है। रिपोर्ट में चर्चा के दौरान यह भी रेखांकित किया गया कि विकासशील देश विकसित देशों की तुलना में कर्ज भुगतान पर करीब 500 अरब डॉलर अधिक खर्च कर रहे हैं। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और अन्य विकास प्राथमिकताओं के लिए धन जुटाना कठिन हो सकता है।

IMF ने सरकारों से सार्वजनिक वित्त को मजबूत करने और कर्ज को टिकाऊ स्तर पर लाने के लिए विश्वसनीय योजनाएं तैयार करने की अपील की है। हालांकि, खर्च और कर्ज से जुड़े फैसले राजनीतिक रूप से कठिन हो सकते हैं, लेकिन लगातार बढ़ता वित्तीय दबाव भविष्य में आर्थिक जोखिम बढ़ा सकता है।

क्या दुनिया मंदी की ओर बढ़ रही है?

IMF की चेतावनी का अर्थ यह नहीं है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था निश्चित रूप से मंदी में जाने वाली है। संस्था ने 2026 के लिए 3.1 प्रतिशत और 2027 के लिए 3.4 प्रतिशत विकास दर का अनुमान दिया है। लेकिन ये अनुमान कई परिस्थितियों पर निर्भर हैं, जिनमें AI निवेश की मजबूती, मध्य पूर्व के हालात और ऊर्जा आपूर्ति में सुधार शामिल हैं।

अगर AI कंपनियों से जुड़ी उम्मीदें कमजोर पड़ती हैं, युद्ध के कारण तेल महंगा बना रहता है और सरकारों का कर्ज बढ़ता है, तो आर्थिक वृद्धि का मौजूदा अनुमान प्रभावित हो सकता है।

कुल मिलाकर, IMF का संदेश साफ है: वैश्विक अर्थव्यवस्था अभी विकास कर रही है, लेकिन उसकी मजबूती कई ऐसे कारकों पर टिकी है जिनमें अचानक बदलाव बाजारों और देशों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है। आने वाले महीनों में AI से होने वाली वास्तविक कमाई, तेल की कीमतें और सरकारों की कर्ज संबंधी नीतियां वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।