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भारत का ई-रिटेल बाजार 2025 में 65-66 अरब डॉलर पहुंचा, 2030 तक 170-180 अरब डॉलर का अनुमान: बैन एंड कंपनी-फ्लिपकार्ट रिपोर्ट
 

 

नई दिल्ली: बैन एंड कंपनी और फ्लिपकार्ट की संयुक्त रिपोर्ट "How India Shops Online 2026" के अनुसार, भारत में ऑनलाइन खुदरा व्यापार (ई-रिटेल) ने 2025 में मजबूत प्रदर्शन किया है। इस बाजार का ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (GMV) 65-66 अरब डॉलर (लगभग 5.5 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच गया, जो 19-21 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्शाता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 के दूसरे छमाही से वृद्धि में तेजी आई, जो 2026 की शुरुआत में भी जारी रही। पिछले पांच वर्षों में ई-रिटेल बाजार दोगुना से अधिक हो गया है और ऑनलाइन खरीदारों की संख्या 290-300 मिलियन तक पहुंच गई है। विक्रेताओं का इकोसिस्टम भी तीन गुना बढ़ा है, जिससे ग्रामीण और टियर-2/3 शहरों में पहुंच गहरी हुई है।

2030 तक 20%+ CAGR से 170-180 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का ई-रिटेल बाजार अगले वर्षों में 20 प्रतिशत से अधिक की कंपाउंड वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) बनाए रखते हुए 2030 तक 170-180 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच सकता है। तब तक कुल खुदरा खर्च का लगभग 10-12 प्रतिशत और नॉन-ग्रॉसरी खर्च का 28-30 प्रतिशत ऑनलाइन होने की उम्मीद है।

इस वृद्धि के प्रमुख कारणों में शामिल हैं:
- पूरे भारत में विश्वसनीय और तेज इंटरनेट की बढ़ती उपलब्धता।
- Gen Z और युवा उपभोक्ताओं द्वारा ऑनलाइन खरीदारी की बढ़ती लोकप्रियता।
- क्विक कॉमर्स (10-30 मिनट में डिलीवरी) का तेज उछाल, जो 2025 में 10-11 अरब डॉलर का बाजार बन चुका है और 2030 तक 65-70 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है।
- खरीदारों की संख्या और प्रति उपभोक्ता खर्च में वृद्धि।

भारत में ई-रिटेल अभी भी GDP का केवल 1.6 प्रतिशत है, जबकि चीन में 13-14 प्रतिशत और इंडोनेशिया में 4-4.5 प्रतिशत है। इससे साफ है कि इस क्षेत्र में अभी भी बहुत बड़ा विकास का अवसर बाकी है। रिपोर्ट में क्विक कॉमर्स को ई-रिटेल की अगली बड़ी ताकत बताया गया है, जो ग्रॉसरी जैसे बड़े सेगमेंट को ऑनलाइन ला रहा है।

फ्लिपकार्ट और बैन की यह रिपोर्ट भारत को ई-कॉमर्स क्षेत्र में विश्व स्तर पर अग्रणी बनाने वाले कारकों—सस्ते डेटा, डिजिटल पेमेंट्स, AI आधारित शॉपिंग और युवा जनसांख्यिकी—को रेखांकित करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती उपभोक्ता भावना, जीएसटी सुधार और आयकर राहत जैसी सरकारी पहलों ने भी 2025 में निजी खपत को 10.5 प्रतिशत की वृद्धि दी, जिससे ई-रिटेल को बल मिला।