जेब पर पड़ेगा महंगाई का असर, मोबाइल-फ्रिज और कार खरीदना हो सकता है महंगा!
अगर आप आने वाले दिनों में नया मोबाइल, टीवी, फ्रिज, एसी या गाड़ी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आपकी जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। मशहूर रेटिंग एजेंसी CRISIL की ताजा ‘क्विकोनॉमिक्स’ रिपोर्ट में संकेत दिए गए हैं कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारतीय बाजार पर भी दिखाई देने लगा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। अब तक कंपनियां इस बढ़ी हुई लागत को खुद वहन कर रही थीं, लेकिन आने वाले समय में वे अपने प्रॉडक्ट्स की कीमतें बढ़ाकर इसकी भरपाई कर सकती हैं।
44 महीनों में पहली बार बढ़ा लागत का दबाव
क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2026 में कंपनियों का लागत-उत्पाद अनुपात (Input-Output Ratio) बढ़कर 1.02 पर पहुंच गया। पिछले लगभग पौने चार साल में यह पहली बार है जब यह आंकड़ा 1.0 के ऊपर गया है।
इसका मतलब साफ है कि कंपनियों के लिए सामान बनाना पहले के मुकाबले काफी महंगा हो गया है, लेकिन उन्होंने ग्राहकों पर अभी तक उसका पूरा बोझ नहीं डाला है।
क्या कहते हैं आंकड़े?
- अप्रैल में कच्चे माल की लागत करीब 6.2% बढ़ी।
- वहीं कंपनियों ने तैयार सामान की कीमतों में सिर्फ 0.7% की बढ़ोतरी की।
यानी कंपनियां फिलहाल अपना मुनाफा कम करके बाजार को संभाल रही हैं, लेकिन यह स्थिति लंबे समय तक बने रहना मुश्किल माना जा रहा है।
इन कच्चे मालों के दाम में सबसे ज्यादा उछाल
रिपोर्ट में बताया गया है कि पश्चिम एशिया संकट और विशेष रूप से Strait of Hormuz में व्यापारिक गतिविधियों पर असर से वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर औद्योगिक कच्चे माल की कीमतों पर पड़ा है।
अप्रैल में कीमतों में बढ़ोतरी
- क्रूड ऑयल से जुड़े उत्पाद: 49.3%
- एल्युमिनियम: 20.6%
- गैस आधारित उत्पाद: 19.1%
- तांबा: 17.3%
क्यों अहम हैं तांबा और एल्युमिनियम?
तांबा और एल्युमिनियम को मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री की रीढ़ माना जाता है। इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों, बिजली के उपकरणों, मोबाइल फोन, टीवी, एसी, फ्रिज और सोलर एनर्जी उपकरणों में बड़े पैमाने पर होता है।
इन धातुओं की कीमत बढ़ने का सीधा असर उन सभी चीजों पर पड़ता है, जिनका इस्तेमाल आम लोग रोजमर्रा की जिंदगी में करते हैं।
किन सेक्टर्स पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?
क्रिसिल के मुताबिक आने वाले समय में सबसे ज्यादा असर इन सेक्टर्स पर देखने को मिल सकता है:
ऑटोमोबाइल सेक्टर
कार, बाइक और कमर्शियल वाहनों की कीमतें बढ़ सकती हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स और होम एप्लायंसेज
मोबाइल फोन, टीवी, फ्रिज, एसी और वाशिंग मशीन महंगे हो सकते हैं।
फार्मा और केमिकल इंडस्ट्री
दवाइयों और पैकेजिंग लागत में बढ़ोतरी का असर ग्राहकों तक पहुंच सकता है।
कंस्ट्रक्शन और टेक्सटाइल
घर बनाने के सामान और कपड़ों की कीमतों में भी उछाल संभव है।
घरेलू बजट पर कब दिखेगा असर?
रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल इसका असर थोक महंगाई (WPI) में ज्यादा दिख रहा है, लेकिन धीरे-धीरे यह खुदरा बाजार तक पहुंचेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि देश में ग्राहकों की मांग मजबूत होने की वजह से कंपनियों के लिए कीमतें बढ़ाना आसान होगा। ऐसे में आने वाले महीनों में खाद्य पदार्थों और ईंधन के अलावा अन्य जरूरी सामानों की महंगाई यानी कोर इंफ्लेशन में तेजी देखने को मिल सकती है।