इंटरनेट बंद फिर भी पेमेंट चालू, जानिए RBI के ई-रुपया का पूरा सिस्टम
Mumbai : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से शुरू किया गया ई-रुपया (e-Rupee) अब धीरे-धीरे डिजिटल पेमेंट की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना रहा है। हालांकि अभी भी बड़ी संख्या में लोग इसके बारे में पूरी जानकारी नहीं रखते। ई-रुपया दरअसल भारतीय मुद्रा का डिजिटल रूप है, जिसे RBI द्वारा जारी किया जाता है। यह बिल्कुल नकद नोट और सिक्कों की तरह ही वैध करेंसी है, फर्क सिर्फ इतना है कि यह डिजिटल फॉर्म में मोबाइल वॉलेट में मौजूद रहती है।
कैसे काम करता है ई-रुपया?
ई-रुपया को ब्लॉकचेन और डिस्ट्रीब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी के जरिए तैयार किया गया है। इसका इस्तेमाल करने के लिए यूजर्स को बैंक द्वारा उपलब्ध कराया गया डिजिटल वॉलेट ऐप डाउनलोड करना होता है। इसके बाद बैंक खाते से रकम निकालकर उसे ई-रुपया में बदला जा सकता है।
पेमेंट करते समय यूजर QR कोड स्कैन करके या सीधे मोबाइल नंबर के जरिए डिजिटल टोकन ट्रांसफर कर सकता है। खास बात यह है कि इसमें ‘वॉलेट-टू-वॉलेट’ ट्रांजैक्शन होता है, यानी हर लेनदेन के लिए बैंक की मध्यस्थता जरूरी नहीं होती।
ई-रुपया के बड़े फायदे
ई-रुपया की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे इस्तेमाल करने के लिए हर बार बैंक खाते पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ती। इसे 10, 20, 50 रुपये जैसे छोटे मूल्यवर्ग में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
इसके अलावा ई-रुपया दूसरे डिजिटल वॉलेट और क्रिप्टोकरेंसी की तुलना में ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। इसमें ट्रांजैक्शन फेल होने की संभावना भी कम रहती है क्योंकि भुगतान सीधे दो वॉलेट के बीच होता है। सबसे अहम बात यह है कि ई-रुपया ऑफलाइन मोड में भी काम कर सकता है, यानी इंटरनेट न होने पर भी भुगतान संभव है।
UPI और ई-रुपया में क्या अंतर है?
अक्सर लोग ई-रुपया और UPI को एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों पूरी तरह अलग हैं। UPI केवल एक पेमेंट सिस्टम है, जो बैंक खाते से दूसरे खाते में रकम ट्रांसफर करने का माध्यम है।
वहीं ई-रुपया खुद डिजिटल करेंसी है। UPI में बैंक सर्वर डाउन होने पर पेमेंट प्रभावित हो सकता है, लेकिन ई-रुपया में ऑफलाइन ट्रांजैक्शन की सुविधा भी संभव है। यही वजह है कि भविष्य में इसे डिजिटल कैश के तौर पर देखा जा रहा है।