बीमा का प्रीमियम जानने के लिए अब फोन-ईमेल देने की जरूरत नहीं! IRDAI ने कंपनियों को लगाई फटकार
बीमा पॉलिसी खरीदने से पहले ग्राहकों का फोन नंबर, ई-मेल और अन्य निजी डाटा लेने पर IRDAI ने सख्ती दिखाई है। कंपनियों को बिना विस्तृत जानकारी लिए बीमा उत्पाद और प्रीमियम की जानकारी देने को कहा गया है। साथ ही मिस सेलिंग रोकने के लिए एजेंट की जवाबदेही भी तय होगी।
IRDAI New Rules: बीमा पॉलिसी खरीदने से पहले अलग-अलग कंपनियों के प्रीमियम और कवरेज की जानकारी लेने के लिए अब ग्राहकों को अपना फोन नंबर, ई-मेल, उम्र समेत निजी जानकारी देने की जरूरत नहीं होगी। भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बीमा उत्पादों की तुलना कराने वाली कंपनियों से ग्राहकों का विस्तृत डाटा लिए बिना ही जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है।
प्रीमियम जानने के लिए लिया जाता है पूरा ब्योरा
दरअसल, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बीमा उत्पादों की तुलना करते समय ग्राहकों से पहले उनकी उम्र, मोबाइल नंबर, ई-मेल आईडी और अन्य व्यक्तिगत जानकारी मांगी जाती है। इसके बाद ही उन्हें अलग-अलग बीमा उत्पादों का प्रीमियम, कवरेज और दूसरी जानकारी दिखाई जाती है।
इस प्रक्रिया को लेकर ग्राहकों की निजता और डाटा के इस्तेमाल पर सवाल उठते रहे हैं। कई मामलों में बीमा की जानकारी लेने के बाद लोगों को लगातार अनचाही कॉल और संदेश मिलने लगते हैं। इतना ही नहीं, ग्राहकों का डाटा दूसरी संस्थाओं के साथ साझा या बेचे जाने की आशंका भी रहती है।
डाटा दिए बिना मिलेगी बीमा की जानकारी
IRDAI ने कंपनियों को निर्देश दिया है कि सिर्फ बीमा उत्पाद की जानकारी देने या उसकी तुलना कराने के लिए ग्राहकों से इस तरह का विस्तृत व्यक्तिगत डाटा न लिया जाए। यानी ग्राहक को पहले यह पता चल सकेगा कि किसी पॉलिसी का प्रीमियम कितना है और उसमें कितना बीमा कवर मिलेगा, इसके लिए उसे अपनी निजी जानकारी देने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।
इस कदम का मकसद बीमा खरीदने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के साथ ग्राहकों के व्यक्तिगत डाटा की सुरक्षा को मजबूत करना है।
DPDP कानून लागू होने के बाद और सख्त होंगे नियम
ग्राहकों के डाटा की सुरक्षा को लेकर डिजिटल पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन (DPDP) कानून भी महत्वपूर्ण है। यह कानून पिछले साल नवंबर में आंशिक रूप से लागू किया गया था और अगले साल मध्य तक इसके पूरी तरह लागू होने की उम्मीद है।
इसके तहत कंपनियों को किसी व्यक्ति का डाटा लेने और उसका इस्तेमाल करने के लिए उसकी सहमति से जुड़ी व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। नवंबर से कंपनियों के लिए डाटा लेने और उसके इस्तेमाल से जुड़े मामलों में कंसेंट मैनेजर की व्यवस्था भी लागू होने वाली है।
जानकारों का कहना है कि व्यक्तिगत डाटा का इस तरह इस्तेमाल केवल बीमा क्षेत्र तक सीमित नहीं है। शैक्षणिक संस्थानों में दाखिले के दौरान भी छात्रों और अभिभावकों से बड़ी मात्रा में व्यक्तिगत जानकारी ली जाती है। ऐसे में डाटा सुरक्षा के नए नियमों का असर दूसरे क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है।
मिस सेलिंग पर भी IRDAI की सख्ती
IRDAI बीमा पॉलिसियों की मिस सेलिंग यानी गलत दावे या अधूरी जानकारी देकर पॉलिसी बेचने की समस्या पर भी सख्ती कर रहा है। नए नियमों के तहत किसी बीमा उत्पाद की जिम्मेदारी तय करने के लिए कंपनियों को पॉलिसी के साथ उस एजेंट की जानकारी देना अनिवार्य होगा, जिसने ग्राहक को उत्पाद की पेशकश की और उसे बेचा है।
इससे ग्राहक को बाद में अगर लगता है कि उसे पॉलिसी के बारे में गलत जानकारी देकर बीमा बेचा गया है, तो जिम्मेदार एजेंट की पहचान आसानी से की जा सकेगी।
सिर्फ एजेंट की पहचान से नहीं रुकेगी मिस सेलिंग
हालांकि, बीमा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि सिर्फ यह पता चलना पर्याप्त नहीं है कि मिस सेलिंग के लिए कौन-सा एजेंट जिम्मेदार है। असली बदलाव तभी आएगा जब गलत तरीके से पॉलिसी बेचने वाले एजेंटों के खिलाफ आर्थिक दंड, इंसेंटिव वापस लेने या दूसरी कड़ी कार्रवाई की व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होगी।