ITR Filing के बाद कब आएगा Tax Refund? जानिए कितने दिन लगते हैं और देरी की वजह
ITR Refund 2026: इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने के बाद टैक्स रिफंड खाते में आने में कितना समय लगता है? जानिए दो से छह सप्ताह की संभावित समयसीमा, रिफंड में देरी की वजह, Form 26AS, AIS, TIS और बैंक अकाउंट से जुड़ी जरूरी बातें और देरी होने पर क्या करना चाहिए।
ITR Filing : टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने के बाद सबसे ज्यादा इंतजार टैक्स रिफंड का रहता है। कई करदाता यह जानना चाहते हैं कि रिटर्न फाइल करने के कितने दिन बाद अतिरिक्त जमा टैक्स की रकम बैंक खाते में वापस आती है। टैक्स विशेषज्ञों के मुताबिक, सही तरीके से दाखिल और समय पर ई-वेरिफाई किया गया ITR आमतौर पर तेजी से प्रोसेस होता है, लेकिन रिफंड के लिए कोई तय कानूनी समयसीमा नहीं है। सामान्य मामलों में रिफंड आने में करीब दो से छह सप्ताह लग सकते हैं। हालांकि, रिटर्न में किसी तरह की गड़बड़ी या जानकारी का मिलान नहीं होने पर यह प्रक्रिया लंबी हो सकती है।
ITR Refund आने में कितना समय लगता है?
इनकम टैक्स विभाग की ओर से रिफंड जारी करने के लिए कोई निश्चित कानूनी समयसीमा तय नहीं है। टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ITR सही तरीके से दाखिल किया गया है, समय पर ई-वेरिफिकेशन हो चुका है और रिटर्न में कोई विसंगति नहीं है, तो आमतौर पर दो से छह सप्ताह में रिफंड खाते में आ सकता है।
हालांकि, वास्तविक समय रिटर्न की प्रोसेसिंग, विभाग के पास मौजूद रिटर्न की संख्या और अतिरिक्त जांच की जरूरत पर निर्भर करता है।
किन वजहों से Tax Refund में हो सकती है देरी?
रिफंड कितनी जल्दी आएगा, यह सिर्फ ITR दाखिल करने की तारीख पर निर्भर नहीं करता। रिटर्न में दर्ज जानकारी की सटीकता भी बेहद महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, Form 26AS, AIS और TIS में मौजूद जानकारी का ITR में दर्ज आय और TDS विवरण से सही मिलान होना चाहिए। इसके अलावा बैंक खाते का प्री-वैलिडेटेड होना भी जरूरी है।
अगर इन जानकारियों में मामूली अंतर भी मिलता है तो विभाग की ओर से अतिरिक्त जांच की जा सकती है, जिससे रिफंड में देरी हो सकती है।
क्या जल्दी ITR भरने से जल्दी मिलेगा Refund?
समयसीमा से पहले ITR दाखिल करने की कोई कानूनी प्राथमिकता नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि जल्दी रिटर्न भरने से कुछ फायदा हो सकता है।
जल्दी दाखिल किया गया रिटर्न प्रोसेसिंग की कतार में पहले आ सकता है। साथ ही, अगर किसी जानकारी में गड़बड़ी सामने आती है तो उसे सुधारने के लिए करदाता के पास पर्याप्त समय रहता है। हालांकि सिर्फ जल्दी ITR भरना ही काफी नहीं है। रिटर्न सही होना और उसका समय पर ई-वेरिफिकेशन होना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
Refund नहीं आया तो सबसे पहले क्या करें?
अगर तय समय के बाद भी टैक्स रिफंड खाते में नहीं आया है तो सबसे पहले इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर अपने रिफंड और ITR का स्टेटस चेक करें।
अगर रिटर्न प्रोसेस हो चुका है लेकिन पैसा खाते में नहीं पहुंचा है, तो बैंक अकाउंट के प्री-वैलिडेशन और PAN से लिंक होने की स्थिति की जांच करनी चाहिए। इसके साथ ही इनकम टैक्स विभाग की ओर से भेजे गए किसी नोटिस या ई-मेल को भी जरूर देखें। अगर रिफंड लंबित है और सभी जानकारी सही है, तो आधिकारिक पोर्टल के जरिए शिकायत दर्ज की जा सकती है।
देरी से Refund मिलने पर ब्याज भी मिल सकता है
कुछ परिस्थितियों में रिफंड में देरी होने पर करदाता को ब्याज मिलने का प्रावधान भी है। टैक्स विशेषज्ञों के मुताबिक, इनकम टैक्स एक्ट की धारा 244A के तहत पात्र मामलों में देरी से मिलने वाले रिफंड पर ब्याज दिया जा सकता है।
कानून में निर्धारित शर्तों के अधीन यह ब्याज सामान्य तौर पर 0.5 प्रतिशत प्रति माह या उसके हिस्से की दर से हो सकता है। हालांकि ब्याज मिलने की पात्रता मामले की परिस्थितियों और लागू नियमों पर निर्भर करती है।
जल्दी Tax Refund पाने के लिए क्या करें?
टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार रिफंड में देरी से बचने के लिए कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए।
- ITR को समयसीमा से पहले दाखिल करें।
- रिटर्न दाखिल करने के तुरंत बाद ई-वेरिफिकेशन पूरा करें।
- Form 16 की जानकारी को Form 26AS, AIS और TIS से मिलाएं।
- बैंक खाते को पहले से प्री-वैलिडेट रखें।
- आय के सभी स्रोतों की सही जानकारी दें।
- TDS से जुड़ी जानकारी में किसी तरह का अंतर न रहने दें।
- इनकम टैक्स विभाग की ओर से आने वाले नोटिस या संदेश का समय पर जवाब दें।
यानी ITR दाखिल करते समय कुछ अतिरिक्त मिनट सावधानी बरतना आगे चलकर कई हफ्तों के इंतजार और परेशानी से बचा सकता है।