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ITR भरने के बाद भी Refund नहीं मिला, कहीं ये 5 गलतियां तो नहीं कर रहे आप?

ITR Refund का इंतजार कर रहे करदाताओं के लिए जरूरी खबर है। रिटर्न की प्रोसेसिंग में देरी, TDS या Tax Credit में अंतर, पुरानी टैक्स डिमांड और बैंक खाते की गड़बड़ी से रिफंड अटक सकता है। जानिए Income Tax Refund का स्टेटस कैसे चेक करें और पैसा पाने के लिए क्या करना होगा।
 

Income Tax Refund Delay: आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तारीख बीत चुकी है और बड़ी संख्या में करदाता अब अपने इनकम टैक्स रिफंड का इंतजार कर रहे हैं। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के आंकड़ों के मुताबिक, आकलन वर्ष 2026-27 के लिए 31 अगस्त तक 7.8 करोड़ से अधिक ITR दाखिल किए गए हैं। आयकर विभाग के अनुसार, ई-वेरिफिकेशन के बाद सामान्य तौर पर रिफंड जारी होने में करीब 4 से 5 सप्ताह लग सकते हैं। हालांकि, कई मामलों में रिफंड इससे कम समय में भी जारी हो जाता है।

अगर आपका रिफंड अभी तक नहीं आया है तो इसकी कई वजहें हो सकती हैं। ऐसे में सबसे पहले यह पता लगाना जरूरी है कि आपका रिफंड आखिर किस स्तर पर अटका है।

ITR की प्रोसेसिंग में देरी

ITR दाखिल करने और उसका ई-वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद आयकर विभाग रिटर्न की प्रोसेसिंग करता है। इस दौरान रिटर्न में दी गई जानकारी का विभाग के पास उपलब्ध आंकड़ों से मिलान किया जाता है। इस प्रक्रिया में कभी-कभी सामान्य से अधिक समय लग सकता है।

करदाता ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करके अपने रिटर्न का स्टेटस देख सकते हैं। इसके लिए e-File > Income Tax Returns > View Filed Returns पर जाकर पता लगाया जा सकता है कि रिटर्न वेरिफाइड है या नहीं, उसकी प्रोसेसिंग पूरी हुई है या नहीं और रिफंड जारी, समायोजित या असफल हुआ है।

TDS या Tax Credit में अंतर

रिफंड में देरी की एक बड़ी वजह ITR में बताए गए टैक्स क्रेडिट और आयकर विभाग के रिकॉर्ड में उपलब्ध जानकारी के बीच अंतर भी हो सकता है।

ऐसी स्थिति में करदाता को अपने TDS और TCS की जानकारी जांचनी चाहिए। इसका मिलान Form 26AS, AIS और TIS में उपलब्ध विवरण से करना जरूरी है। अगर किसी रकम या टैक्स क्रेडिट में अंतर दिखाई देता है तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसे ठीक कराया जाना चाहिए।

पुरानी Tax Demand भी बन सकती है वजह

अगर पिछले किसी आकलन वर्ष की टैक्स डिमांड बकाया है तो इसका असर मौजूदा रिफंड पर पड़ सकता है। आयकर विभाग ऐसी बकाया मांग के संबंध में करदाता को सूचना देकर जवाब मांग सकता है।

अगर करदाता की ओर से जवाब नहीं दिया जाता है तो विभाग रिफंड की रकम को बकाया टैक्स के साथ समायोजित कर सकता है।

पुरानी टैक्स डिमांड की जानकारी देखने के लिए ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करें और Pending Actions > Response to Outstanding Demand में जाकर स्थिति जांचें। अगर कोई मांग लंबित है तो उसके संबंध में समय पर जवाब दें।

Bank Account की गलती से भी अटक सकता है Refund

कई बार आयकर विभाग रिफंड जारी कर देता है, लेकिन बैंक खाते से जुड़ी समस्या के कारण रकम खाते में जमा नहीं हो पाती। बैंक अकाउंट का वेरिफाइड नहीं होना, खाता बंद होना, गलत IFSC कोड या बैंक खाते में दर्ज नाम और PAN की जानकारी में अंतर जैसी वजहों से भी रिफंड फेल हो सकता है।

ऐसी स्थिति में करदाता ई-फाइलिंग पोर्टल के My Profile सेक्शन में जाकर बैंक खाते को दोबारा रिवैलिडेट कर सकते हैं। इसके बाद रिफंड के लिए दोबारा अनुरोध करना पड़ सकता है। PAN के निष्क्रिय होने की स्थिति में भी रिफंड मिलने में परेशानी हो सकती है।

Income Tax Department के Email और SMS को नजरअंदाज न करें

रिफंड का इंतजार कर रहे करदाताओं को आयकर विभाग की ओर से आने वाले ईमेल, SMS और ई-फाइलिंग अकाउंट पर मिलने वाली सूचनाओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। विभाग अक्सर रिटर्न में किसी गलती, जानकारी में अंतर या किसी अन्य समस्या के बारे में इन्हीं माध्यमों से जानकारी देता है।

जरूरत पड़ने पर विभाग की ओर से नोटिस भी जारी किया जा सकता है। ऐसे किसी नोटिस या सूचना का समय पर जवाब देना जरूरी है। मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराने से रिटर्न की प्रोसेसिंग और रिफंड से जुड़ी समस्या को दूर करने में मदद मिल सकती है।

इसलिए अगर ITR दाखिल और ई-वेरिफाई करने के कई सप्ताह बाद भी रिफंड नहीं मिला है, तो केवल इंतजार करने के बजाय ITR स्टेटस, TDS क्रेडिट, पुरानी टैक्स डिमांड और बैंक अकाउंट की जानकारी जरूर जांच लें। इससे पता चल सकेगा कि रिफंड की प्रक्रिया किस चरण में रुकी हुई है और उसे ठीक करने के लिए क्या कदम उठाना है।