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कॉमर्स पढ़ने वाली जुड़वां बहनों ने बनाया बैटरी स्टार्टअप, Forbes 30 Under 30 तक पहुंची कहानी 

भुवनेश्वर की जुड़वां बहनें निशिता और निकिता बलियारसिंह ने कॉमर्स की पढ़ाई के बाद डीप-टेक की दुनिया में कदम रखा। इलेक्ट्रिक वाहन बनाने के विचार से शुरू हुआ सफर Nexus Power तक पहुंचा। कृषि अवशेषों से बैटरी तकनीक विकसित करने वाली दोनों बहनों ने Forbes 30 Under 30 में पहचान बनाई।
 

Nishita Nikita Forbes 30 Under 30: भुवनेश्वर की जुड़वां बहनें निशिता और निकिता बलियारसिंह ने स्कूल की गतिविधियों और नेतृत्व की छोटी-छोटी जिम्मेदारियों से शुरू किया सफर आगे चलकर डीप-टेक स्टार्टअप तक पहुंचाया। दोनों ने 2019 में Nexus Power की शुरुआत की और टिकाऊ बैटरी तकनीक पर काम करते हुए Forbes 30 Under 30 में पहचान बनाई। लेकिन उनकी सफलता के पीछे असफल प्रयोगों, तकनीकी चुनौतियों और लगातार सीखने की लंबी कहानी है।

स्कूल में ही दिखी नेतृत्व की झलक

निशिता और निकिता ने भुवनेश्वर के SAI International School से पढ़ाई की। स्कूल के दिनों में दोनों खेल, संगीत, रेडियो और कई अन्य गतिविधियों से जुड़ी रहीं। उन्हें स्कूल के कार्यक्रम UNWIND में वित्त, मार्केटिंग, विज्ञापन, आईटी, संसाधन और लॉजिस्टिक्स जैसी जिम्मेदारियां भी दी गईं।

बहनों के मुताबिक, कम उम्र में पेशेवर तरीके से मीटिंग करना, टीम के साथ काम करना और कार्यक्रमों की जिम्मेदारी संभालना उनके आत्मविश्वास के लिए काफी अहम रहा। उनके स्कूल के प्रिंसिपल बिजया कुमार साहू ने भी उनमें उद्यमी बनने की क्षमता देखी थी।

इलेक्ट्रिक व्हीकल बनाने निकलीं, बैटरी बनी सबसे बड़ी चुनौती

निशिता और निकिता की दिलचस्पी बचपन से ही मशीनों, विमानों और ऑटोमोबाइल में थी। करीब 2017-18 में दोनों ने इलेक्ट्रिक वाहन बनाने का विचार शुरू किया। लेकिन प्रोटोटाइप पर काम करते हुए उन्हें महसूस हुआ कि इलेक्ट्रिक वाहन की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक उसकी बैटरी है।

यहीं से उनका ध्यान बैटरी सेल, मटेरियल और मैन्युफैक्चरिंग की तरफ गया। इसी शोध ने आगे चलकर उन्हें कृषि और औद्योगिक अवशेषों से ऊर्जा भंडारण सामग्री विकसित करने के विचार तक पहुंचाया और 2019 में Nexus Power की शुरुआत हुई। Forbes के अनुसार, कंपनी कृषि अपशिष्ट से ऊर्जा-संग्रहण सेल विकसित करने की तकनीक पर काम करती है।

कॉमर्स पढ़ने वाली बहनों ने खुद सीखी बैटरी की साइंस

इस कहानी की खास बात यह है कि दोनों ने स्कूल में कॉमर्स और बाद में बिजनेस मैनेजमेंट की पढ़ाई की थी। बैटरी और डीप-टेक रिसर्च उनके औपचारिक अध्ययन का हिस्सा नहीं था।

निशिता और निकिता ने वैज्ञानिक पेपर पढ़ने, तकनीकी कोर्स करने और विशेषज्ञों के साथ काम करने के जरिए इस क्षेत्र की जानकारी हासिल की। कोविड के दौरान उन्होंने छह से सात महीने के तकनीकी कोर्स किए। बाद में उन्होंने पीएचडी और शोध का अनुभव रखने वाले विशेषज्ञों की टीम भी तैयार की।

बहनों का मानना था कि केवल विशेषज्ञों को टीम में शामिल करना पर्याप्त नहीं होगा। कंपनी को सही दिशा देने के लिए उन्हें खुद भी तकनीक को समझना जरूरी था।

'राजमा-छोले' प्रयोग ने बढ़ाया भरोसा

Nexus Power का सफर किसी एक बड़ी वैज्ञानिक खोज से शुरू नहीं हुआ। कोविड के दौरान दोनों ने घर पर उपलब्ध चीजों से कई प्रयोग किए। इनमें से एक प्रयोग को उन्होंने मजाकिया अंदाज में 'राजमा-छोले एक्सपेरिमेंट' कहा।

इस प्रयोग में रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली दालों से इलेक्ट्रोड तैयार किए गए और करीब 5 वोल्ट का स्थिर आउटपुट रिकॉर्ड किया गया। इस परिणाम ने दोनों को भरोसा दिया कि जिस केमिस्ट्री पर वे काम कर रही हैं, उसमें आगे बढ़ने की संभावना है।

हर प्रयोग सफल नहीं हुआ, गलतियों से मिली सीख

डीप-टेक कंपनी बनाने के दौरान दोनों को कई असफल प्रयोगों का भी सामना करना पड़ा। एक समय कंपनी की मटेरियल सिंथेसिस और सेल मैन्युफैक्चरिंग टीमों के बीच यह सवाल खड़ा हो गया कि बैटरी सेल अपेक्षित परिणाम क्यों नहीं दे रहे हैं।

बाद में पता चला कि समस्या दोनों टीमों की नहीं, बल्कि एक वेंडर से मिले बाइंडर में थी, जिसमें बुलबुले बन रहे थे। इस अनुभव ने उन्हें यह सिखाया कि रिसर्च और डेवलपमेंट में असफलता प्रक्रिया का हिस्सा है।

Forbes की पहचान के पीछे की असली कहानी

Forbes की पहचान इस सफर का सबसे दिखाई देने वाला हिस्सा है, लेकिन बहनों के मुताबिक इसके पीछे कई ऐसी बातें हैं जो सोशल मीडिया या प्रोफाइल में नजर नहीं आतीं—गलत फैसले, असफल प्रयोग, अनिश्चितता और मुश्किल दौर में परिवार, दोस्तों, संस्थानों, इनक्यूबेटर्स और निवेशकों का सहयोग।

Forbes के रिकॉर्ड के मुताबिक, निशिता और निकिता ने 2019 में Nexus Power की सह-स्थापना की थी। कंपनी का लक्ष्य कृषि अपशिष्ट से ऊर्जा भंडारण के लिए सामग्री विकसित करना है।

अब अगली चुनौती कमर्शियलाइजेशन की

Nexus Power अब तकनीक को व्यावसायिक स्तर तक ले जाने की दिशा में काम कर रही है। इसके सामने सर्टिफिकेशन, लाइसेंसिंग, मैन्युफैक्चरिंग लागत, सप्लाई चेन और तेजी से बदलती बैटरी तकनीक जैसी चुनौतियां हैं।

दोनों बहनों के लिए एक साथ कंपनी चलाना भी हमेशा आसान नहीं रहा। इसके बावजूद उनकी भूमिकाएं अलग-अलग ताकत के आधार पर बंटी हुई हैं—एक अधिक विजनरी भूमिका निभाती हैं, जबकि दूसरी रणनीतिक पक्ष पर ज्यादा ध्यान देती हैं।