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होटल-अस्पतालों में आधार की फोटोकॉपी से मिलेगी राहत! अब ऐप से भी होगा पहचान का वेरिफिकेशन
 

 

नई दिल्ली। होटल में कमरा बुक कराने, अस्पताल में इलाज करवाने या अन्य सेवाओं का लाभ लेने के दौरान पहचान के लिए आधार कार्ड की फोटोकॉपी देने की जरूरत अब धीरे-धीरे कम हो सकती है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने डिजिटल पहचान सत्यापन को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत आधार ऐप की मदद से बिना कागजी दस्तावेज जमा किए पहचान की पुष्टि की जा सकेगी। इस पहल का उद्देश्य लोगों की निजी जानकारी को सुरक्षित रखना और आधार कार्ड की फोटोकॉपी के संभावित दुरुपयोग को रोकना है।

UIDAI ने 5 नवंबर 2026 को जानकारी दी कि इस साल जनवरी से अब तक 300 संस्थानों को आधार आधारित ऑफलाइन वेरिफिकेशन प्रणाली से जोड़ा जा चुका है। इनमें होटल, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, आयोजन और अन्य क्षेत्रों से जुड़े संस्थान शामिल हैं।

होटल और अस्पतालों में आसान होगा पहचान सत्यापन

अब आधार ऐप आधारित वेरिफिकेशन की सुविधा अपनाने वाले होटलों और अस्पतालों में लोगों को पहचान सत्यापन के लिए आधार कार्ड की फोटोकॉपी जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। संबंधित संस्थान डिजिटल माध्यम से व्यक्ति की पहचान की पुष्टि कर सकेंगे।

हालांकि, यह सुविधा फिलहाल सभी होटल और अस्पतालों में अनिवार्य रूप से लागू नहीं हुई है। इसका लाभ उन संस्थानों में मिलेगा, जिन्होंने UIDAI की ऑफलाइन वेरिफिकेशन प्रणाली को अपनाया है।

आधार नंबर बताए बिना हो सकेगा वेरिफिकेशन

इस नई व्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पहचान सत्यापन के दौरान व्यक्ति का 12 अंकों वाला आधार नंबर संबंधित संस्थान को साझा करने की जरूरत नहीं होगी।

आधार ऐप के माध्यम से उपयोगकर्ता अपनी सहमति से पहचान से जुड़ी आवश्यक जानकारी साझा कर सकेंगे। इससे संस्थानों को केवल सत्यापन के लिए जरूरी विवरण उपलब्ध कराने और अनावश्यक व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से बचने में मदद मिलेगी।

इस प्रक्रिया में संस्थानों को पहचान जांचने के लिए UIDAI के केंद्रीय आधार डेटाबेस से सीधे जुड़ने की भी आवश्यकता नहीं होगी।

निजी जानकारी की सुरक्षा पर विशेष जोर

UIDAI की इस पहल के पीछे एक प्रमुख उद्देश्य नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। कई बार होटल, अस्पताल और अन्य संस्थानों में जमा की गई आधार कार्ड की फोटोकॉपी के गलत इस्तेमाल की आशंका बनी रहती है।

डिजिटल वेरिफिकेशन के माध्यम से कागजी दस्तावेजों पर निर्भरता कम होगी। साथ ही पहचान सत्यापन की प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित बनाई जा सकेगी।

आधार ऐप के करीब 7.5 करोड़ डाउनलोड

UIDAI के अनुसार, आधार ऐप को अब तक करीब 7.5 करोड़ बार डाउनलोड किया जा चुका है। वहीं, 86 लाख से अधिक लोगों ने ऐप के माध्यम से अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर अपडेट किए हैं।

इसके अलावा ऐप के जरिए 4.6 करोड़ से अधिक बायोमेट्रिक लॉक और अनलॉक ट्रांजैक्शन भी दर्ज किए गए हैं। ये आंकड़े डिजिटल आधार सेवाओं के बढ़ते उपयोग को दर्शाते हैं।

आम लोगों को क्या होगा फायदा?

आधार ऐप आधारित ऑफलाइन वेरिफिकेशन के विस्तार से लोगों को बार-बार आधार कार्ड की फोटोकॉपी कराने और अलग-अलग संस्थानों में जमा करने की परेशानी से राहत मिल सकती है। पहचान सत्यापन में लगने वाला समय भी कम हो सकता है।

हालांकि, UIDAI ने आधार कार्ड की फोटोकॉपी पर देशव्यापी प्रतिबंध लगाने की घोषणा नहीं की है। नई पहल का उद्देश्य डिजिटल वेरिफिकेशन को बढ़ावा देना और फोटोकॉपी पर निर्भरता कम करना है।

इस व्यवस्था के विस्तार से आने वाले समय में होटल, अस्पताल और अन्य सेवाओं में पहचान सत्यापन की प्रक्रिया और आसान हो सकती है।