Loan, Credit Card और Insurance बेचने के लिए अब नहीं चलेंगी चालाकियां, 11 डिजिटल चालों पर RBI की रोक
RBI ने बैंकों और उनके एजेंटों द्वारा ग्राहकों को गुमराह करने वाली 11 डिजिटल तरकीबों पर रोक लगा दी है। 1 जनवरी 2027 से बैंक ऐप्स में फर्जी ऑफर, छिपे चार्ज, जबरन सब्सक्रिप्शन और भ्रामक विज्ञापन जैसी गतिविधियां प्रतिबंधित होंगी। नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई होगी।
RBI Dark Pattern Rules: अगर आपने कभी बैंक के मोबाइल ऐप पर कोई पॉप-अप बंद करने की कोशिश की हो और सीधे पर्सनल लोन के पेज पर पहुंच गए हों, या फिर आसानी से क्रेडिट कार्ड ले लिया हो लेकिन उसे बंद करने में परेशानियां झेलनी पड़ी हों, तो यह खबर आपके लिए अहम है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ग्राहकों को भ्रमित करने और अनजाने में उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर करने वाली डिजिटल तरकीबों पर सख्त रुख अपनाया है।
RBI ने 15 जून 2026 को जारी नई अधिसूचना में बैंकों और उनके डायरेक्ट सेलिंग एजेंट्स (DSA) के लिए "डार्क पैटर्न" पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। ये नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे।
क्या है डार्क पैटर्न?
RBI के अनुसार, डार्क पैटर्न ऐसे डिज़ाइन या डिजिटल तरीके हैं, जिनका उद्देश्य ग्राहकों को भ्रमित कर उनसे वह काम करवाना होता है, जो वे सामान्य परिस्थितियों में नहीं करना चाहते। इससे ग्राहकों की स्वतंत्र पसंद और निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती है।
RBI ने किन 11 तरीकों पर लगाई रोक?
1. False Urgency (झूठी जल्दबाजी)
ग्राहकों को "Act Now", "Offer Ends Soon" या "आज ही लोन लें, कल ब्याज दर बढ़ जाएगी" जैसे संदेशों से दबाव बनाना अब प्रतिबंधित होगा।
2. Basket Sneaking
लोन आवेदन या किसी अन्य सेवा के दौरान ग्राहक की अनुमति के बिना बीमा या अतिरिक्त सेवाएं जोड़ना अब नहीं चलेगा।
3. Confirm Shaming
"नहीं, मुझे अपने खाते की सुरक्षा नहीं चाहिए" जैसे अपराधबोध पैदा करने वाले विकल्प दिखाना भी नियमों के खिलाफ होगा।
4. Forced Action
ऐसे पॉप-अप जिन्हें बंद करने पर भी ग्राहक को किसी लोन या उत्पाद पेज पर भेज दिया जाए, अब प्रतिबंधित रहेंगे।
5. Subscription Trap
क्रेडिट कार्ड या बीमा लेना आसान लेकिन उसे बंद करना मुश्किल बनाना अब गैरकानूनी माना जाएगा।
6. Interface Interference
किसी एक विकल्प को बड़े और आकर्षक तरीके से दिखाकर दूसरे विकल्प को छिपाना या कठिन बनाना प्रतिबंधित होगा।
7. Bait and Switch
कम ब्याज दर दिखाकर बाद में ज्यादा दर या अतिरिक्त शुल्क वसूलना अब नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।
8. Drip Pricing
प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्क अंतिम चरण में बताना या पहले से स्पष्ट न करना अब नहीं चलेगा।
9. Disguised Advertisement
जरूरी बैंक अलर्ट की तरह दिखने वाले विज्ञापन या प्रमोशनल नोटिफिकेशन भेजने पर रोक रहेगी।
10. Nagging
ग्राहक के मना करने के बाद भी बार-बार एक ही अनुमति या ऑफर दिखाना नियमों के खिलाफ होगा।
11. Trick Wording
डबल नेगेटिव या भ्रमित करने वाली भाषा का इस्तेमाल कर ग्राहक से सहमति लेना प्रतिबंधित रहेगा।
बैंकों को क्या करना होगा?
RBI ने सभी बैंकों और DSAs को निर्देश दिया है कि वे अपनी वेबसाइट, मोबाइल ऐप और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म का ऑडिट कर इन सभी डार्क पैटर्न को हटाएं। साथ ही उन्हें केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) की गाइडलाइंस का भी पालन करना होगा।
नियम तोड़ने पर क्या होगा?
यदि 1 जनवरी 2027 के बाद किसी बैंक द्वारा इन प्रतिबंधित तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है, तो ग्राहक पहले बैंक के शिकायत निवारण अधिकारी से शिकायत कर सकते हैं। समाधान न मिलने पर मामला RBI Ombudsman तक ले जाया जा सकता है।
RBI का मानना है कि यह कदम डिजिटल बैंकिंग को अधिक पारदर्शी, भरोसेमंद और ग्राहक-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। इससे ग्राहकों को बैंकिंग सेवाओं का उपयोग करते समय बेहतर जानकारी और स्वतंत्र निर्णय लेने का अवसर मिलेगा।