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RBI का बड़ा बयान: भारत में क्रिप्टोकरेंसी को नहीं मिलेगी कानूनी मान्यता, अर्थव्यवस्था के लिए बताया खतरा

 

Mumbai : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि वह भारत में क्रिप्टोकरेंसी को कानूनी मान्यता देने के पक्ष में नहीं है। केंद्रीय बैंक ने संसद की एक समिति के समक्ष कहा कि वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) जैसी क्रिप्टोकरेंसी भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम पैदा कर सकती हैं, इसलिए इन्हें वैध नहीं बनाया जाना चाहिए।

संसदीय समिति के सामने रखा पक्ष

RBI ने सांसद भर्तृहरि महताब की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहा कि क्रिप्टोकरेंसी का अनियंत्रित उपयोग देश की वित्तीय स्थिरता के लिए खतरा बन सकता है। केंद्रीय बैंक ने यह भी बताया कि चीन और कतर जैसे देशों ने क्रिप्टो गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया है, जबकि यूरोपीय देशों में इसे कड़े नियामकीय ढांचे के तहत सीमित अनुमति दी गई है।

RBI ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल आतंकवादी फंडिंग, मादक पदार्थों की तस्करी (नार्कोटिक्स स्मगलिंग), मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य अवैध गतिविधियों में किया जा सकता है। ऐसे लेन-देन की निगरानी करना मुश्किल होता है, खासकर जब वे सीमा पार किए जाते हैं।

बैंकिंग और वित्तीय व्यवस्था पर असर

केंद्रीय बैंक का कहना है कि यदि क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल भुगतान और सेटलमेंट सिस्टम में बढ़ता है, तो इससे बैंकिंग प्रणाली और वित्तीय स्थिरता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

RBI ने समिति से कहा कि क्रिप्टो के उपयोग पर सख्त नियंत्रण या रोक लगाने से बैंकिंग क्षेत्र के जोखिम कम होंगे और वित्तीय प्रणाली को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।

पहले भी जता चुका है विरोध

RBI पहले भी कई बार क्रिप्टोकरेंसी को लेकर चिंता जता चुका है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि निजी डिजिटल मुद्राएं देश की मौद्रिक नीति और वित्तीय प्रणाली के लिए चुनौती बन सकती हैं। इसी कारण RBI लगातार सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) यानी डिजिटल रुपया को बढ़ावा दे रहा है।