रिलायंस-HDFC-ICICI की कमजोरी से बाजार में भूचाल, सेंसेक्स 1200+ अंक गिरा
Mumbai : भारतीय शेयर बाजार में तीन दिनों की लगातार तेजी के बाद गुरुवार को अचानक ब्रेक लग गया। शुरुआती कारोबार में मिली बढ़त के बावजूद बैंकिंग, ऑटो, मेटल और एफएमसीजी सेक्टरों में जोरदार बिकवाली देखी गई, जिससे निवेशकों को करीब 7.55 लाख करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ। बीएसई सेंसेक्स इंट्रा-डे में 1400 अंक तक फिसला और अंत में 1236 अंक (1.48%) की गिरावट के साथ 82,498 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी 50 भी लगभग 400 अंक (1.55%) टूटकर 25,454 पर बंद हुआ।
बीएसई पर कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन घटकर लगभग 464 लाख करोड़ रुपये के आसपास आ गया।
गिरावट के प्रमुख कारण
1. हैवीवेट शेयरों में बिकवाली का दबाव : रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, लार्सन एंड टुब्रो, हिंदुस्तान यूनिलीवर और आईटीसी जैसे प्रमुख शेयरों में कमजोरी रही। इन हैवीवेट स्टॉक्स की बिकवाली ने सूचकांकों को नीचे धकेला।
2. आईटी सेक्टर से मिला कुछ सहारा, लेकिन अपर्याप्त : आईटी शेयरों में मामूली तेजी देखी गई। इंफोसिस और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के शेयरों में हल्की बढ़त रही, लेकिन यह बाजार को संभालने के लिए काफी नहीं थी।
3. वैश्विक संकेतों का नकारात्मक असर : एशियाई बाजारों में मजबूती दिखी—दक्षिण कोरिया का KOSPI करीब 3% चढ़ा और जापान का Nikkei 225 1% बढ़ा। लेकिन हांगकांग और चीन के बाजार चंद्र नववर्ष अवकाश के कारण बंद रहे। अमेरिकी बाजार बुधवार को बढ़त के साथ बंद हुए थे, लेकिन घरेलू बाजार पर इसका सीमित असर रहा।
4. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी : ब्रेंट क्रूड तेल की कीमत 0.37% बढ़कर 70.61 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई का खतरा बढ़ता है, जिससे बाजार में दबाव बढ़ा।
संस्थागत निवेशकों का रुख
- विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) बुधवार को लिवाल रहे और उन्होंने 1,154.34 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
- घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) ने भी 440.34 करोड़ रुपये की खरीदारी की।
इसके बावजूद वैश्विक अस्थिरता, भू-राजनीतिक तनाव और ब्याज दरों की अनिश्चितता के कारण निवेशक जोखिम वाले एसेट्स से पैसा निकालकर सोना और सरकारी बॉन्ड जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।
निवेशकों के लिए सलाह
- बाजार में वोलैटिलिटी बनी हुई है। वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और संस्थागत फ्लो पर नजर रखें।
- हैवीवेट सेक्टरों में मुनाफावसूली का दौर चल रहा है, इसलिए शॉर्ट-टर्म में सावधानी बरतें।
- लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए यह गिरावट खरीदारी का मौका हो सकता है, लेकिन फंडामेंटल्स मजबूत कंपनियों पर फोकस करें।