SEBI New Rules: 10 लाख तक के मामलों का होगा फास्ट-ट्रैक निपटारा, सेटलमेंट का फॉर्मूला भी बदला
SEBI ने सेटलमेंट प्रक्रिया के लिए नए नियम अधिसूचित किए हैं। अब पात्र मामलों में ₹10 लाख तक की सेटलमेंट राशि पर फास्ट-ट्रैक सुविधा मिलेगी। नए फॉर्मूले में उल्लंघन की गंभीरता और पिछली नियामकीय कार्रवाई को महत्व दिया जाएगा। गलत कमाई और निवेशकों के नुकसान की वसूली अलग से हो सकती है।
SEBI New Rules: शेयर बाजार से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने वालों के मामलों के निपटारे के लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने नया सेटलमेंट फ्रेमवर्क अधिसूचित किया है। इसके तहत ₹10 लाख तक की सेटलमेंट राशि वाले पात्र मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक प्रक्रिया शुरू की जाएगी। साथ ही, सेटलमेंट की रकम तय करने का फॉर्मूला भी बदला गया है। नए ढांचे में गलत तरीके से कमाए गए पैसे और निवेशकों को हुए नुकसान की वसूली को सेटलमेंट राशि से अलग रखा जाएगा।
सेटलमेंट की रकम तय करने के लिए नया फॉर्मूला
SEBI के नए नियमों के तहत सेटलमेंट राशि तय करने के लिए सबसे पहले एक आधार राशि निर्धारित की जाएगी। यह संबंधित उल्लंघन के लिए प्रतिभूति कानूनों के तहत तय न्यूनतम जुर्माने से जुड़ी होगी। इसके बाद मामले की स्थिति और गंभीरता के आधार पर रकम में बदलाव किया जाएगा।
राशि तय करते समय इन पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा:
मामले की कार्यवाही किस चरण में पहुंची है।
संबंधित व्यक्ति या संस्था के खिलाफ पहले क्या नियामकीय कार्रवाई हुई है।
उल्लंघन कितना गंभीर है।
मामले को गंभीर बनाने वाले और राहत देने वाले कारक क्या हैं।
कानूनी खर्च कितना हुआ है।
इस व्यवस्था का मकसद सेटलमेंट की रकम तय करने में अनिश्चितता कम करना और अलग-अलग मामलों में अधिक स्पष्ट प्रक्रिया अपनाना है।
₹10 लाख तक के मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक सुविधा
SEBI ने फास्ट-ट्रैक सेटलमेंट के दो रास्ते बनाए हैं। पहला, सेटलमेंट राशि की सीमा के आधार पर और दूसरा, उल्लंघन की प्रकृति के आधार पर।
रकम के आधार पर सेटलमेंट: जिन पात्र मामलों में सेटलमेंट राशि ₹10 लाख तक है, उन्हें आंतरिक समिति से सीधे पूर्णकालिक सदस्यों के पैनल के पास भेजा जा सकेगा। हालांकि, इस सुविधा के लिए नियामकीय शर्तें लागू होंगी। खास तौर पर, नियमों में ऐसे मामलों के लिए अलग व्यवस्था है जिनमें गलत कमाई की वसूली या सुधारात्मक और नियामकीय शर्तें लागू नहीं होतीं।
उल्लंघन के आधार पर सेटलमेंट: कुछ निर्धारित उल्लंघनों के मामलों में SEBI संबंधित व्यक्ति या संस्था को नोटिस देकर तय रकम चुकाने और जरूरी शर्तें पूरी करने का अवसर दे सकेगा। भुगतान और लागू शर्तों के पालन के बाद सेटलमेंट आदेश जारी किया जा सकता है।
इस व्यवस्था से कम गंभीर और निर्धारित श्रेणी के मामलों को लंबी प्रक्रिया से बचाकर तेजी से निपटाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
गलत कमाई और निवेशकों के नुकसान की वसूली अलग होगी
नए फ्रेमवर्क में सेटलमेंट राशि और गलत तरीके से कमाए गए पैसे की वापसी को अलग-अलग रखा गया है। यदि किसी उल्लंघन से गलत कमाई हुई है, किसी व्यक्ति या संस्था ने नुकसान से बचकर फायदा लिया है या निवेशकों को नुकसान पहुंचा है, तो इन रकमों की गणना संभव होने पर उनकी वसूली अलग से की जा सकती है।
पहले ऐसी रकमों को सेटलमेंट की गणना में शामिल करने से दोहरी गणना की आशंका पैदा हो सकती थी। नए ढांचे में सेटलमेंट राशि, गलत कमाई की वापसी और अन्य नियामकीय शर्तों को अलग-अलग हिस्सों में रखा गया है।
इसका मतलब यह नहीं है कि सेटलमेंट करने पर गलत कमाई लौटाने या अन्य जरूरी शर्तें पूरी करने से छूट मिल जाएगी। मामले के तथ्यों के अनुसार अलग वित्तीय और नियामकीय दायित्व लागू हो सकते हैं।
वित्तीय विवरणों में गड़बड़ी और फंड के दुरुपयोग वाले मामले भी शामिल
नए नियमों में वित्तीय विवरणों में गलत जानकारी देने या फंड के दुरुपयोग से जुड़े कुछ मामलों का सेटलमेंट करने का प्रावधान भी है। इसके लिए संबंधित व्यक्ति या संस्था को आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने पड़ सकते हैं।
इनमें वित्तीय विवरणों या अन्य जरूरी दस्तावेजों में उचित खुलासे करना और गलत तरीके से हटाए गए फंड को वापस लाना शामिल हो सकता है। ऐसे मामलों में केवल सेटलमेंट राशि का भुगतान पर्याप्त नहीं होगा; SEBI द्वारा तय अन्य शर्तों का पालन भी जरूरी हो सकता है।
क्या तत्काल लागू हो गए हैं नए नियम?
SEBI ने Securities and Exchange Board of India (Settlement of Administrative and Civil Proceedings) Regulations, 2026 को अधिसूचित किया है। नियमों के मुताबिक, इनका प्रभाव आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशन के 30वें दिन के बाद अगले दिन से शुरू होगा। इसलिए अधिसूचना जारी होने और नियमों के प्रभावी होने की तारीख में अंतर को ध्यान में रखना जरूरी है।
कुल मिलाकर, SEBI का नया फ्रेमवर्क सेटलमेंट की रकम तय करने में स्पष्टता लाने और पात्र छोटे मामलों का तेजी से निपटारा करने की दिशा में बदलाव है। हालांकि, सेटलमेंट का विकल्प मिलने का अर्थ उल्लंघन से जुड़े सभी दायित्वों से छूट मिलना नहीं है। गलत कमाई की वसूली और जरूरी सुधारात्मक कार्रवाई अलग से लागू हो सकती है।