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SEBI का बड़ा फैसला: 1 अगस्त से कंपनियां फिर खरीद सकेंगी अपने ही शेयर, निवेशकों पर क्या होगा असर?

सेबी ने 1 अगस्त 2026 से ओपन मार्केट शेयर बायबैक व्यवस्था दोबारा लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है। नए नियमों के तहत कंपनियां नियमित ट्रेडिंग के जरिए अपने शेयर वापस खरीद सकेंगी। जानिए बायबैक के नए नियम, समय सीमा और निवेशकों पर इसका क्या असर पड़ेगा।
 

SEBI Share Buyback: भारतीय शेयर बाजार के लिए एक अहम फैसले में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने ओपन मार्केट के जरिए शेयर बायबैक (Share Buyback) की व्यवस्था दोबारा लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है। नए नियम 1 अगस्त 2026 से प्रभावी होंगे। इस फैसले के बाद सूचीबद्ध कंपनियां नियमित ट्रेडिंग सिस्टम के जरिए फिर से अपने ही शेयर बाजार से खरीद सकेंगी।

सेबी का मानना है कि इस कदम से बायबैक प्रक्रिया पहले से अधिक आसान, पारदर्शी और तेज होगी। साथ ही कंपनियों को पूंजी प्रबंधन (Capital Allocation) का प्रभावी विकल्प भी मिलेगा।

पहले क्यों बंद की गई थी यह व्यवस्था?

सेबी ने वर्ष 2025 में चरणबद्ध तरीके से ओपन मार्केट शेयर बायबैक पर रोक लगा दी थी। उस समय नियामक ने आशंका जताई थी कि इस व्यवस्था से सभी शेयरधारकों को समान अवसर नहीं मिल पाता और टैक्स से जुड़ी असमानताएं भी पैदा होती हैं। इसलिए इसे बंद करने का फैसला लिया गया था।

अब संशोधित नियमों के साथ इस व्यवस्था को दोबारा लागू किया गया है, ताकि कंपनियां जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त नकदी शेयरधारकों को लौटा सकें और बाजार में गिरावट के दौरान अपने शेयरों को सहारा दे सकें।

क्या हैं नए नियम?

नई अधिसूचना के अनुसार, ओपन मार्केट के जरिए किया जाने वाला शेयर बायबैक कंपनी की चुकता पूंजी और मुक्त भंडार (Paid-up Capital & Free Reserves) के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा। इसकी गणना कंपनी के एकल (Standalone) और समेकित (Consolidated) दोनों वित्तीय विवरणों के आधार पर की जाएगी।

सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब कंपनियों को बायबैक के लिए अलग से 'बायबैक विंडो' बनाने की जरूरत नहीं होगी। वे सामान्य ट्रेडिंग व्यवस्था के माध्यम से ही शेयरों की पुनर्खरीद कर सकेंगी।

66 कार्य दिवस में पूरी होगी प्रक्रिया

नए नियमों के तहत बायबैक की पेशकश सार्वजनिक घोषणा के चार कार्य दिवस के भीतर शुरू करनी होगी और 66 कार्य दिवस के भीतर पूरी करनी होगी। पहले यह प्रक्रिया अधिकतम छह महीने तक चल सकती थी। इस बदलाव से बायबैक प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और समयबद्ध हो जाएगी।

मर्चेंट बैंकर की अनिवार्यता खत्म

सेबी ने कंपनियों को एक और बड़ी राहत देते हुए बायबैक के लिए मर्चेंट बैंकर नियुक्त करना अनिवार्य नहीं रखा है। यदि कंपनी मर्चेंट बैंकर नियुक्त नहीं करती है तो उसकी जिम्मेदारियां कंपनी, अनुपालन अधिकारी, वैधानिक ऑडिटर, सचिवीय ऑडिटर और संबंधित स्टॉक एक्सचेंज मिलकर निभाएंगे।

ऑडिटर और अनुपालन अधिकारी की होगी अहम जिम्मेदारी

नई व्यवस्था में वैधानिक ऑडिटर एस्क्रो खाते की निगरानी करेगा। इसमें बैंक गारंटी, नकद जमा, एस्क्रो फंड के उपयोग और उसे जारी करने जैसी प्रक्रियाएं शामिल होंगी। वहीं, कंपनी का अनुपालन अधिकारी यह सुनिश्चित करेगा कि बायबैक के तहत खरीदे गए शेयर नियमानुसार निरस्त (Extinguish) किए जाएं।

SEBI ने जोड़ी नई शर्त

सेबी ने स्पष्ट किया है कि कोई भी कंपनी ऐसा बायबैक घोषित नहीं कर सकेगी, जिससे न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (Minimum Public Shareholding - MPS) के नियमों का उल्लंघन हो। इसके अलावा दो बायबैक ऑफर के बीच न्यूनतम अंतर अब कंपनी अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के अनुरूप रखा गया है।

निवेशकों और कंपनियों के लिए क्यों अहम है फैसला?

विशेषज्ञों का मानना है कि ओपन मार्केट बायबैक की वापसी से कंपनियों को पूंजी प्रबंधन में अधिक लचीलापन मिलेगा। वहीं, बाजार में कमजोरी के समय कंपनियां अपने शेयर खरीदकर निवेशकों का भरोसा मजबूत कर सकेंगी। तेज और पारदर्शी प्रक्रिया से निवेशकों और सूचीबद्ध कंपनियों, दोनों को फायदा मिलने की उम्मीद है।