मिडिल ईस्ट तनाव से शेयर बाजार में हाहाकार, सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान पर बंद
Mumbai : पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर बुधवार को भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। कारोबार के दौरान निवेशकों में घबराहट के चलते बीएसई सेंसेक्स 1,157 अंक तक लुढ़क गया, हालांकि बाद में कुछ रिकवरी देखने को मिली। दिन के अंत में सेंसेक्स 303.67 अंक यानी 0.41 प्रतिशत गिरकर 74,346.17 अंक पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी-50 सूचकांक 77.95 अंक यानी 0.33 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,405.60 अंक पर बंद हुआ।
कारोबार के दौरान सेंसेक्स 73,493 अंक और निफ्टी 23,151 अंक के स्तर तक फिसल गया था। दोपहर बाद खरीदारी लौटने से बाजार ने शुरुआती नुकसान का बड़ा हिस्सा रिकवर कर लिया।
आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 18 गिरावट के साथ बंद हुए। सबसे ज्यादा दबाव आईटी सेक्टर पर रहा। टीसीएस के शेयरों में 8.30 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, इन्फोसिस, आईटीसी, इटरनल और लार्सन एंड टुब्रो के शेयर भी नुकसान में रहे।
दूसरी ओर भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), इंडिगो, आईसीआईसीआई बैंक, पावरग्रिड और कोटक महिंद्रा बैंक के शेयरों में बढ़त दर्ज की गई, जिसने बाजार को कुछ सहारा दिया।
ब्रॉडर मार्केट भी दबाव में
ब्रॉडर मार्केट में भी कमजोरी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.42 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.11 प्रतिशत नीचे बंद हुआ। सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी बैंक, निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी हेल्थकेयर इंडेक्स में मजबूती देखने को मिली।
वहीं, निफ्टी आईटी इंडेक्स कारोबार के दौरान 6 प्रतिशत से अधिक टूट गया, जो दिन का सबसे कमजोर सेक्टर साबित हुआ।
क्यों टूटा बाजार?
विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के बयान के बाद बाजार में बेचैनी बढ़ी, जिसमें उन्होंने दावा किया कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बड़े हिस्से में बारूदी सुरंगें बिछा दी हैं और कुछ वाणिज्यिक जहाजों पर फायरिंग भी की है।
इस घटनाक्रम ने अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति वार्ता को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है। निवेशकों को आशंका है कि यदि तनाव और बढ़ा तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
मध्य-पूर्व में संकट गहराने का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी पड़ा। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में करीब 2.89 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 98.77 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया।
विश्लेषकों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि इससे महंगाई और कंपनियों की लागत दोनों पर दबाव बढ़ सकता है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक बाजारों की दिशा पर बनी रहेगी।