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US-Iran तनाव का शेयर मार्केट पर असर, Sensex-Nifty में फिर भारी गिरावट, जानें क्यों टूटे बाजार

Stock Market Today: 2 सितंबर 2026 को सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट के पीछे अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमत और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल प्रमुख कारण रहे। महंगे क्रूड से भारत के इंपोर्ट बिल और महंगाई पर दबाव की चिंता बढ़ी, जबकि ऊंची US yields ने निवेशकों को सतर्क किया।
 

2 September 2026:भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार, 2 सितंबर 2026 को कमजोर शुरुआत की और शुरुआती कारोबार में बिकवाली और तेज हो गई। इसके पीछे सिर्फ घरेलू वजहें नहीं, बल्कि अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल जैसे वैश्विक संकेत प्रमुख कारण रहे। इन घटनाक्रमों ने महंगाई और ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।

सुबह 10:05 बजे तक सेंसेक्स 561.24 अंक यानी 0.73% गिरकर 76,383.04 पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 50 में 200.55 अंक यानी 0.83% की गिरावट थी और यह 23,855.25 के स्तर पर आ गया था। बाजार की गिरावट केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी दबाव देखने को मिला।

अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ना बाजार के लिए पहला झटका

बाजार में अचानक बिकवाली की सबसे बड़ी वजहों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ा सैन्य तनाव शामिल है। दोनों देशों के बीच ताजा सैन्य कार्रवाई के बाद निवेशकों को पश्चिम एशिया में संघर्ष और बढ़ने तथा तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका सताने लगी है।

वैश्विक बाजारों के लिए इसका सीधा असर कच्चे तेल पर पड़ा। ब्रेंट क्रूड करीब 95.42 डॉलर प्रति बैरल और WTI करीब 90.68 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। ब्रेंट इससे पहले करीब छह सप्ताह के उच्च स्तर तक भी पहुंच गया था।

महंगा कच्चा तेल भारत के लिए क्यों बड़ी चिंता?

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने पर देश का इंपोर्ट बिल बढ़ सकता है, चालू खाते पर दबाव आ सकता है और महंगाई को लेकर चिंता बढ़ सकती है।

इसी वजह से बुधवार को तेल की कीमतों से सीधे प्रभावित होने वाले शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली। एशियन पेंट्स और इंडिगो जैसे शेयर दबाव में रहे। टायर कंपनियों और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर भी महंगे कच्चे तेल का असर दिखा।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ी, ब्याज दरों की चिंता लौटी

बाजार में गिरावट की दूसरी बड़ी वजह अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी है। तेल की कीमत बढ़ने से महंगाई फिर बढ़ने की आशंका पैदा हुई है। इससे निवेशकों को डर है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो सकता है और दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने का असर उभरते बाजारों पर भी पड़ता है। जब अमेरिका में अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश पर रिटर्न बढ़ता है, तो विदेशी निवेशकों के लिए भारत जैसे उभरते बाजारों की तुलना में अमेरिकी परिसंपत्तियां ज्यादा आकर्षक हो सकती हैं। इससे भारतीय शेयरों में विदेशी निवेश पर दबाव आने की आशंका रहती है।

5% तक पहुंची US 10-Year Yield तो बढ़ सकता है बड़ा जोखिम

बाजार विशेषज्ञ वीके विजयकुमार के मुताबिक, फिलहाल अमेरिकी 10-year bond yield पर नजर रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगर यह 5% तक पहुंचती है तो वैश्विक इक्विटी बाजार में बड़ी गिरावट का जोखिम पैदा हो सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि भारत की मजबूत विदेशी मुद्रा स्थिति और कम चालू खाता घाटा फिलहाल कुछ राहत देते हैं।

सिर्फ सेंसेक्स-निफ्टी नहीं, पूरे बाजार में बिकवाली

बुधवार की गिरावट की तीसरी बड़ी वजह बाजार में बिकवाली का व्यापक होना है। शुरुआती कारोबार में Nifty Auto 2.15%, Nifty Realty 1.80%, Nifty IT 1.05%, Nifty Financial Services 0.93% और Nifty FMCG 0.92% नीचे थे। वहीं Nifty Midcap 50 में 1.07% और Nifty Midcap 100 में 0.97% की गिरावट दर्ज की गई। India VIX भी करीब 3.80% बढ़कर 11.93 पर पहुंच गया, जो बाजार में बढ़ी हुई अस्थिरता का संकेत है।

अब निवेशकों की नजर किन संकेतों पर?

फिलहाल बाजार के लिए कच्चे तेल की कीमत, अमेरिका की 10-year bond yield और अमेरिका-ईरान संघर्ष की अगली दिशा सबसे अहम संकेत बन गए हैं। अगर तेल 95-96 डॉलर के आसपास बना रहता है या और ऊपर जाता है तो निवेशक महंगाई, रुपये, भारत के इंपोर्ट बिल और कंपनियों की लागत पर इसके असर का आकलन करेंगे।