चीनी की कीमतों में 15% से ज्यादा उछाल, सरकार ने 10 लाख टन आयात और स्टॉक लिमिट का किया ऐलान
New Delhi : चीनी की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बीच केंद्र सरकार ने त्योहारी सीजन में इसकी उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक 20 जुलाई को चीनी की औसत कीमत 48.18 रुपये प्रति किलो थी, जो 20 अगस्त को बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो हो गई।
चीनी के दाम बढ़ने की क्या है वजह?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि चीनी की कीमतों में मौजूदा तेजी की मुख्य वजह एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी का डायवर्जन नहीं है। आंकड़ों के अनुसार, एथेनॉल के लिए डायवर्ट होने वाली चीनी की हिस्सेदारी 2022-23 में करीब 12 प्रतिशत से घटकर 2025-26 में करीब 9 प्रतिशत रह गई है।
वहीं, इस साल देश में चीनी उत्पादन अनुमान से कम रहने की संभावना है। राज्यों ने शुरुआत में करीब 343 लाख टन उत्पादन का अनुमान लगाया था, लेकिन अब उत्पादन लगभग 306 लाख टन रहने का अनुमान है।
गन्ने की फसल में रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियों, भारी बारिश और जलभराव से भी फसल को नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा त्योहारी सीजन में मांग बढ़ना, कुछ कारोबारियों और मिलों द्वारा जमाखोरी तथा वैश्विक स्तर पर चीनी की कम आपूर्ति भी कीमतों में तेजी की वजह मानी जा रही है।
दुनियाभर में भी चीनी की सप्लाई पर दबाव
चीनी की कीमतों में तेजी केवल भारत तक सीमित नहीं है। सरकार के अनुसार 2026-27 में वैश्विक स्तर पर करीब 33 लाख टन चीनी की कमी रहने का अनुमान है।
इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी पड़ा है। चीनी की कीमत 30 जून को 474 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 20 अगस्त को 552 डॉलर प्रति टन हो गई। यानी करीब दो महीने में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में 16 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है।
जमाखोरी रोकने के लिए 400 टन की स्टॉक लिमिट
चीनी की कृत्रिम कमी और जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए सरकार ने डीलरों पर 400 टन की स्टॉक लिमिट लागू की है। यह व्यवस्था 1 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी।
इसके अलावा 1 सितंबर से बड़े खरीदार यानी बल्क कंज्यूमर्स 15 दिन की खपत से ज्यादा चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेंगे। केंद्र और राज्य सरकार की टीमें चीनी मिलों में जाकर स्टॉक की जांच भी करेंगी।
10 लाख टन चीनी का ड्यूटी-फ्री आयात
घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति देने का फैसला किया है। इसके साथ ही राज्यों और चीनी मिलों को 15 अक्टूबर से क्रशिंग शुरू करने की सलाह दी गई है।
सरकार का अनुमान है कि इससे अक्टूबर में चीनी का उत्पादन सामान्य 3-4 लाख टन के मुकाबले बढ़कर 10 लाख टन से अधिक हो सकता है।
सरकार का कहना है कि ड्यूटी-फ्री आयात, स्टॉक लिमिट और जल्द क्रशिंग शुरू करने जैसे कदमों से त्योहारी सीजन में बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ेगी और बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी।