Tata Trusts का बड़ा प्लान: देशभर में बनेंगे 40-50 गैर-लाभकारी अस्पताल, जरूरतमंदों को मिलेगा मुफ्त या सस्ता इलाज
टाटा ट्रस्ट देशभर में 40 से 50 गैर-लाभकारी अस्पतालों का नेटवर्क बनाने की तैयारी कर रहा है। नोएल टाटा की इस योजना के तहत पांच साल में 25 लाख लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने, 100 से अधिक सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत करने और कैंसर मरीजों के इलाज को सुलभ बनाने का लक्ष्य है।
देश में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने के लिए टाटा ट्रस्ट 40 से 50 गैर-लाभकारी सामान्य अस्पतालों का नेटवर्क तैयार करने की योजना पर काम कर रहा है। इस मॉडल के तहत इलाज का खर्च उठाने में सक्षम मरीजों से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों की मदद के लिए किया जाएगा। टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने वित्त वर्ष 2025-26 की सालाना रिपोर्ट में संस्था की भविष्य की योजनाओं और समाजसेवा के बदलते दृष्टिकोण की जानकारी दी है।
नोएल टाटा के मुताबिक, ट्रस्ट का जोर केवल सामाजिक कार्यों पर पैसा खर्च करने तक सीमित नहीं है। संस्था ऐसे अस्पताल और संस्थान विकसित करना चाहती है, जो लंबे समय तक लोगों की जरूरतों को पूरा कर सकें और समाज पर उनका स्थायी प्रभाव दिखाई दे।
पांच साल में 25 लाख लोगों तक पहुंचेंगी स्वास्थ्य सेवाएं
टाटा ट्रस्ट ने 2026 से 2031 तक के लिए पांच साल की स्वास्थ्य योजना तैयार की है। इसके तहत करीब 75 ब्लॉक में 25 लाख लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, 100 से अधिक सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत करने की योजना है।
ट्रस्ट गंभीर बीमारियों से जूझ रहे उन परिवारों की सहायता भी जारी रखेगा, जिनके लिए इलाज का खर्च उठाना मुश्किल हो जाता है। कैंसर के उपचार को मरीजों के घर के करीब पहुंचाने के लिए विकेंद्रीकृत कैंसर देखभाल व्यवस्था का विस्तार भी योजना का हिस्सा है।
इस पहल का उद्देश्य मरीजों को इलाज के लिए दूर-दराज के बड़े अस्पतालों पर निर्भर रहने की मजबूरी कम करना और जरूरत के समय बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
कैंसर मरीजों के इलाज में टाटा ट्रस्ट ने क्या किया?
टाटा ट्रस्ट की सालाना रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में उसके कैंसर देखभाल कार्यक्रमों के तहत 1,06,626 मरीजों ने ओपीडी में परामर्श लिया। इस अवधि में मरीजों के इलाज के लिए कीमोथेरेपी के 24,874 चक्र पूरे किए गए, जबकि 2,879 सर्जरी की गईं।
कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का इलाज लंबे समय तक चल सकता है। ऐसे में मरीजों और उनके परिवारों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ता है। ट्रस्ट अपनी स्वास्थ्य योजनाओं के जरिए उपचार की उपलब्धता बढ़ाने और जरूरतमंद परिवारों को सहायता देने पर ध्यान दे रहा है।
समाजसेवा में अब खर्च के साथ नतीजों पर भी जोर
नोएल टाटा ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि किसी संस्था के काम का आकलन केवल इस आधार पर नहीं किया जाना चाहिए कि उसने कितनी रकम खर्च की या कितने लोगों तक मदद पहुंचाई। यह देखना भी जरूरी है कि उस सहायता से लोगों की जिंदगी में कितना बदलाव आया और उसका असर कितने समय तक बना रहा।
उनका मानना है कि समाजसेवा के क्षेत्र में जवाबदेही बढ़ाने की जरूरत है। संस्थाओं को अपने काम के वास्तविक परिणाम सामने रखने चाहिए, ताकि यह समझा जा सके कि उनके प्रयास लोगों की समस्याओं को दूर करने में कितने प्रभावी रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत में सामाजिक क्षेत्र में काम करने वाले उद्यमियों की नई पीढ़ी अधिक महत्वाकांक्षी हो रही है। ऐसे माहौल में स्थापित संस्थानों को भी अपने काम की गुणवत्ता और प्रभावशीलता बेहतर बनानी होगी।
भारत में प्रतिभाशाली युवाओं के लिए बनेंगे बेहतर संस्थान
नोएल टाटा ने भारत में ऐसे संस्थानों की जरूरत पर भी जोर दिया, जो प्रतिभाशाली युवाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध करा सकें। उनके अनुसार, कई युवा उन अवसरों की तलाश में विदेश चले जाते हैं, जो उन्हें अपने देश में नहीं मिल पाते।
टाटा ट्रस्ट राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों के विकास में अपनी भूमिका आगे भी जारी रखेगा। इसके लिए जरूरत पड़ने पर दूसरे परोपकारी संगठनों और समान सोच रखने वाली संस्थाओं के साथ साझेदारी की जा सकती है।
नोएल टाटा ने भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) और टाटा मेमोरियल अस्पताल जैसे संस्थानों का उदाहरण देते हुए बताया कि मजबूत संस्थान लंबे समय तक समाज की जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
Tata Trusts के पास Tata Sons की 66% हिस्सेदारी
टाटा ट्रस्ट की भूमिका केवल स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण तक सीमित नहीं है। इसके पास टाटा संस की कुल 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है। टाटा संस, टाटा समूह की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है, जिसके तहत समूह की कई बड़ी कंपनियां आती हैं।
रतन टाटा के निधन के बाद नोएल टाटा ने टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन की जिम्मेदारी संभाली। उनकी अगुवाई में संस्था स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों के विकास पर काम आगे बढ़ा रही है।
बड़ा बनने से ज्यादा जरूरी बेहतर काम करना
नोएल टाटा ने अपने संदेश में कहा कि संस्थाओं को केवल अपना आकार बढ़ाने की दौड़ में शामिल होने के बजाय अपने काम की गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए। उनके मुताबिक, सामाजिक क्षेत्र में सफलता का पैमाना यह होना चाहिए कि किसी पहल से लोगों को कितना वास्तविक और लंबे समय तक टिकने वाला लाभ मिला।
टाटा ट्रस्ट की प्रस्तावित अस्पताल योजना इसी सोच के तहत अहम मानी जा रही है। यदि यह नेटवर्क योजना के मुताबिक विकसित होता है, तो इलाज का खर्च उठाने में सक्षम मरीजों से मिलने वाले राजस्व के जरिए आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की चिकित्सा सहायता करने का रास्ता तैयार हो सकता है।