AI कंपनियों पर Microsoft अधिकारी ने उठाए सवाल, इंटरनेट से कंटेंट उठाने को बताया ‘सबसे बड़ी लेबर चोरी’
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनियों द्वारा इंटरनेट से बड़ी मात्रा में कंटेंट लेकर अपने AI मॉडल को ट्रेन करने का विवाद अब और गहरा गया है। हाल ही में सार्वजनिक किए गए कोर्ट दस्तावेजों में Microsoft के एक वरिष्ठ अधिकारी की आंतरिक टिप्पणी सामने आई है, जिसमें उन्होंने AI मॉडल की ट्रेनिंग के लिए इंटरनेट कंटेंट के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल को बेहद गंभीर मुद्दा बताया था। अधिकारी ने इसे “मानव इतिहास में श्रम की सबसे बड़ी चोरी” तक करार दिया।
यह मामला अमेरिका में चल रहे कॉपीराइट विवाद से जुड़े दस्तावेजों के सार्वजनिक होने के बाद सामने आया है। विवाद का केंद्र यह सवाल है कि क्या AI कंपनियां लेखकों, पत्रकारों और दूसरे कंटेंट क्रिएटर्स की सामग्री को उनकी अनुमति के बिना AI मॉडल की ट्रेनिंग में इस्तेमाल कर सकती हैं।
Microsoft के अंदर भी उठे थे सवाल
सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों के अनुसार, Microsoft के अधिकारी ब्रेंट हेच्ट ने AI ट्रेनिंग के लिए इंटरनेट से कंटेंट जुटाने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर चिंता जाहिर की थी। उन्होंने इसे बेहद बड़ा और अभूतपूर्व मामला बताया।
उनकी टिप्पणी उस व्यापक बहस को सामने लाती है जिसमें AI कंपनियों के सामने एक तरफ तेजी से बेहतर मॉडल तैयार करने की जरूरत है, तो दूसरी तरफ उन लोगों के अधिकारों का सवाल है जिनका बनाया कंटेंट इन मॉडलों की ट्रेनिंग में इस्तेमाल किया जाता है।
AI मॉडल की ट्रेनिंग में इंटरनेट कंटेंट क्यों अहम है?
बड़े AI मॉडल को तैयार करने के लिए विशाल मात्रा में टेक्स्ट, किताबें, वेबसाइट, समाचार सामग्री और दूसरे डिजिटल डेटा की जरूरत होती है। इंटरनेट इस तरह के डेटा का सबसे बड़ा स्रोत है।
AI कंपनियों ने लंबे समय से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध इंटरनेट डेटा के इस्तेमाल को अपने मॉडल की ट्रेनिंग का हिस्सा बनाया है। लेकिन विवाद तब बढ़ता है जब इसमें कॉपीराइट वाली सामग्री, पेड या पेवॉल के पीछे मौजूद कंटेंट और ऐसे काम शामिल हों जिनके लिए लेखक या प्रकाशक ने अनुमति नहीं दी है।
यही वजह है कि AI कंपनियों और कंटेंट इंडस्ट्री के बीच कॉपीराइट को लेकर कई मुकदमे चल रहे हैं।
न्यूयॉर्क टाइम्स ने OpenAI और Microsoft पर किया है मुकदमा
इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण कानूनी लड़ाइयों में से एक The New York Times और AI कंपनियों के बीच चल रही है। अखबार ने आरोप लगाया है कि OpenAI और Microsoft ने उसके लाखों लेखों का बिना अनुमति इस्तेमाल किया और उन्हें AI सिस्टम की ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल किया।
OpenAI और Microsoft ने अपने AI सिस्टम के इस्तेमाल को लेकर fair use जैसे कानूनी तर्क दिए हैं। कंपनियों का पक्ष है कि AI मॉडल में डेटा का इस्तेमाल नई और अलग तरह की तकनीक तैयार करने के लिए किया जाता है। वहीं, प्रकाशकों का आरोप है कि AI सिस्टम उनके मूल कंटेंट के सीधे विकल्प के तौर पर काम कर रहे हैं और इससे उनकी वेबसाइटों का ट्रैफिक और कमाई प्रभावित हो रही है।
Paywall वाले कंटेंट को लेकर भी उठे गंभीर सवाल
सार्वजनिक हुए कोर्ट दस्तावेजों में paywall वाले कंटेंट को लेकर भी चर्चा सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, Microsoft CEO सत्या नडेला ने गवाही में कहा कि अगर उन्हें पहले पता होता कि paywall के पीछे की सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है, तो वह मॉडल को दोबारा ट्रेन कराने की मांग करते।
दूसरी ओर, कानूनी दस्तावेजों में OpenAI के कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच ऐसे तरीकों पर चर्चा का भी जिक्र है जिनसे ऑनलाइन सामग्री तक पहुंच हासिल की जा सके। इन बातों को अब प्रकाशक कंपनियां AI कंपनियों के खिलाफ अपने कानूनी तर्क को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल कर रही हैं।
AI से कंटेंट क्रिएटर्स को कितना खतरा?
यह विवाद सिर्फ कॉपीराइट तक सीमित नहीं है। इसका सीधा असर पत्रकारों, लेखकों, वेबसाइटों और दूसरे डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स पर पड़ सकता है।
प्रकाशकों का तर्क है कि अगर यूजर किसी AI चैटबॉट से किसी खबर या विषय का जवाब सीधे प्राप्त कर लेता है, तो वह मूल वेबसाइट पर जाने की जरूरत कम महसूस कर सकता है। इससे वेबसाइट का ट्रैफिक, विज्ञापन आय और सब्सक्रिप्शन प्रभावित हो सकते हैं।
यही वजह है कि कई मीडिया संस्थान AI कंपनियों के साथ लाइसेंसिंग समझौते कर रहे हैं, जबकि कुछ कंपनियां अदालत में अपने अधिकारों और कॉपीराइट दावों को चुनौती दे रही हैं।
AI कंपनियों के सामने अब बड़ा सवाल
AI इंडस्ट्री तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन उसके साथ यह सवाल भी बड़ा होता जा रहा है कि AI मॉडल बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले डेटा पर किसका अधिकार है।
क्या इंटरनेट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सामग्री को AI ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल करना अपने आप में वैध है? या फिर कॉपीराइट कंटेंट के लिए लेखकों और प्रकाशकों की अनुमति जरूरी होनी चाहिए?
इन सवालों का जवाब आने वाले वर्षों में AI कंपनियों, मीडिया संस्थानों और कंटेंट क्रिएटर्स के बीच संबंधों को काफी हद तक तय कर सकता है। फिलहाल अमेरिकी अदालतों में चल रहे मामलों पर टेक इंडस्ट्री और कंटेंट जगत दोनों की नजर है।