Hello बोलते ही सामने से नहीं आई कोई आवाज? तो हो सकते है फ्रॅाड के शिकार जानिए क्या है Silent Call Scam
Jun 10, 2026, 20:12 IST
आज के डिजिटल दौर में साइबर अपराधी लोगों को ठगने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। अब ठगी का एक नया तरीका सामने आया है, जिसे 'साइलेंट कॉल स्कैम' कहा जा रहा है। इसको लेकर भारत सरकार के साइबर जागरूकता प्लेटफॉर्म 'साइबर दोस्त' ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
दरअसल, कई लोगों के पास अनजान नंबरों से कॉल आती है। कॉल रिसीव करने पर सामने से कोई आवाज नहीं आती और कुछ सेकंड बाद कॉल कट जाती है। अधिकांश लोग इसे नेटवर्क की समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन साइबर विशेषज्ञों के अनुसार यह ठगों की एक सोची-समझी चाल हो सकती है।
साइबर दोस्त के मुताबिक, स्कैमर्स ऑटोमेटेड सिस्टम के जरिए हजारों नंबरों पर कॉल करते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति कॉल उठाकर "हेलो" बोलता है, सिस्टम यह पहचान लेता है कि नंबर सक्रिय है और उसका उपयोग किया जा रहा है। इसके बाद उस नंबर को संभावित शिकारों की सूची में शामिल कर लिया जाता है, जिससे भविष्य में फर्जी कॉल, बैंकिंग फ्रॉड, OTP स्कैम और अन्य साइबर अपराधों का खतरा बढ़ जाता है।
क्या करें?
अगर किसी अनजान नंबर से कॉल आए और सामने से कोई जवाब न मिले तो तुरंत कॉल काट दें। बार-बार ऐसे कॉल करने वाले नंबरों को ब्लॉक कर दें। साथ ही संदिग्ध नंबरों की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज करें।
क्या न करें?
साइलेंट कॉल आने पर उस नंबर पर दोबारा कॉल बैक करने की गलती न करें। इसके अलावा किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपनी निजी या बैंकिंग जानकारी साझा करने से बचें।
शिकायत कहां करें?
यदि आपको किसी प्रकार की साइबर ठगी का संदेह हो या आप किसी साइबर अपराध का शिकार हो जाएं, तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करें। इसके अलावा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज की जा सकती है। शिकायत दर्ज करते समय पूरी और सही जानकारी देने से कार्रवाई तेजी से हो सकती है।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि थोड़ी सी सावधानी और जागरूकता आपको बड़े आर्थिक नुकसान से बचा सकती है। इसलिए अनजान कॉल और संदेशों के प्रति हमेशा सतर्क रहें।
दरअसल, कई लोगों के पास अनजान नंबरों से कॉल आती है। कॉल रिसीव करने पर सामने से कोई आवाज नहीं आती और कुछ सेकंड बाद कॉल कट जाती है। अधिकांश लोग इसे नेटवर्क की समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन साइबर विशेषज्ञों के अनुसार यह ठगों की एक सोची-समझी चाल हो सकती है।
साइबर दोस्त के मुताबिक, स्कैमर्स ऑटोमेटेड सिस्टम के जरिए हजारों नंबरों पर कॉल करते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति कॉल उठाकर "हेलो" बोलता है, सिस्टम यह पहचान लेता है कि नंबर सक्रिय है और उसका उपयोग किया जा रहा है। इसके बाद उस नंबर को संभावित शिकारों की सूची में शामिल कर लिया जाता है, जिससे भविष्य में फर्जी कॉल, बैंकिंग फ्रॉड, OTP स्कैम और अन्य साइबर अपराधों का खतरा बढ़ जाता है।
क्या करें?
अगर किसी अनजान नंबर से कॉल आए और सामने से कोई जवाब न मिले तो तुरंत कॉल काट दें। बार-बार ऐसे कॉल करने वाले नंबरों को ब्लॉक कर दें। साथ ही संदिग्ध नंबरों की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज करें।
क्या न करें?
साइलेंट कॉल आने पर उस नंबर पर दोबारा कॉल बैक करने की गलती न करें। इसके अलावा किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपनी निजी या बैंकिंग जानकारी साझा करने से बचें।
शिकायत कहां करें?
यदि आपको किसी प्रकार की साइबर ठगी का संदेह हो या आप किसी साइबर अपराध का शिकार हो जाएं, तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करें। इसके अलावा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज की जा सकती है। शिकायत दर्ज करते समय पूरी और सही जानकारी देने से कार्रवाई तेजी से हो सकती है।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि थोड़ी सी सावधानी और जागरूकता आपको बड़े आर्थिक नुकसान से बचा सकती है। इसलिए अनजान कॉल और संदेशों के प्रति हमेशा सतर्क रहें।