AI Deepfake से आधार हैक! अहमदाबाद में हाईटेक गैंग का पर्दाफाश, मिनटों में बदल देते थे मोबाइल नंबर
May 9, 2026, 20:59 IST
भारत में डिजिटल पहचान और आधार सुरक्षा को लेकर एक बड़ा साइबर फ्रॉड सामने आया है। अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने ऐसे हाईटेक गिरोह का खुलासा किया है, जो एआई-जनरेटेड डीपफेक वीडियो के जरिए लोगों की आधार पहचान हाइजैक कर रहा था। इस मामले ने साइबर सुरक्षा एजेंसियों और डिजिटल विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया है।
पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से आर्थिक रूप से सक्षम लोगों को निशाना बनाता था। अपराधी पहले पीड़ितों की तस्वीरें और आधार से जुड़ी जानकारी जुटाते थे। इसके बाद एआई टूल्स की मदद से ऐसे डीपफेक वीडियो तैयार किए जाते थे, जिनमें व्यक्ति की आंख झपकाना और चेहरे की हलचल बिल्कुल असली लगती थी।
ऐसे होता था आधार डेटा का दुरुपयोग
जांच में सामने आया कि गिरोह Telegram बॉट्स और अन्य डिजिटल टूल्स की मदद से आधार से जुड़ी जानकारी इकट्ठा करता था। सोशल मीडिया से ली गई तस्वीरों को एआई सॉफ्टवेयर के जरिए “ब्लिंकिंग डीपफेक वीडियो” में बदला जाता था।
इन वीडियो का इस्तेमाल आधार वेरिफिकेशन सिस्टम को धोखा देने के लिए किया जाता था। अपराधी बिना पीड़ित की जानकारी के आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर बदल देते थे। इसके बाद उन्हें उस व्यक्ति की डिजिटल पहचान तक पूरी पहुंच मिल जाती थी।
मोबाइल नंबर बदलते ही खुल गया पूरा सिस्टम
जैसे ही आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर बदलता था, अपराधियों को बैंकिंग अलर्ट, डिजिटल लॉकर और कई अन्य सेवाओं का एक्सेस मिल जाता था।
इसके बाद गिरोह फर्जी सिम कार्ड और बैंक खाते खुलवाकर ₹25 हजार से ₹50 हजार तक के इंस्टेंट पर्सनल लोन हासिल करता था। जांच एजेंसियों के अनुसार, पैसों को कई खातों में ट्रांसफर कर ट्रैकिंग से बचने की कोशिश की जाती थी।
ऐसे सामने आया पूरा मामला
यह साइबर फ्रॉड तब उजागर हुआ जब अहमदाबाद के एक कारोबारी को अपने आधार-लिंक्ड ट्रांजैक्शंस के OTP मिलना बंद हो गए।
जांच में पता चला कि उनका मोबाइल नंबर और बायोमेट्रिक डेटा बिना OTP वेरिफिकेशन के बदल दिया गया था। इतना ही नहीं, उनके नाम पर लोन भी लिया जा चुका था।
7 गिरफ्तार, मास्टरमाइंड फरार
पुलिस ने अब तक इस मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। हालांकि गिरोह का मुख्य आरोपी ओली उल्लाह अभी फरार बताया जा रहा है।
जांच में सामने आया कि अपराधियों ने Common Service Centres (CSCs) का इस्तेमाल कर आधार से जुड़े मोबाइल नंबर अपडेट किए। गिरोह का तकनीकी विशेषज्ञ रब्बुल हुसैन भी गिरफ्तार किया गया है, जो एआई टूल्स और आइडेंटिटी थेफ्ट ऑपरेशन संभाल रहा था।
डिजिटल सुरक्षा पर बड़ा सवाल
यह मामला भारत की डिजिटल पहचान प्रणाली में मौजूद कमजोरियों की ओर बड़ा संकेत माना जा रहा है। अधिकारियों ने UIDAI को इस पूरे मामले की जानकारी दे दी है।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर शेयर की गई तस्वीरें अब साइबर अपराधियों के लिए सबसे आसान हथियार बनती जा रही हैं। ऐसे में लोगों को अपनी निजी तस्वीरें और जानकारी साझा करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से आर्थिक रूप से सक्षम लोगों को निशाना बनाता था। अपराधी पहले पीड़ितों की तस्वीरें और आधार से जुड़ी जानकारी जुटाते थे। इसके बाद एआई टूल्स की मदद से ऐसे डीपफेक वीडियो तैयार किए जाते थे, जिनमें व्यक्ति की आंख झपकाना और चेहरे की हलचल बिल्कुल असली लगती थी।
ऐसे होता था आधार डेटा का दुरुपयोग
जांच में सामने आया कि गिरोह Telegram बॉट्स और अन्य डिजिटल टूल्स की मदद से आधार से जुड़ी जानकारी इकट्ठा करता था। सोशल मीडिया से ली गई तस्वीरों को एआई सॉफ्टवेयर के जरिए “ब्लिंकिंग डीपफेक वीडियो” में बदला जाता था।
इन वीडियो का इस्तेमाल आधार वेरिफिकेशन सिस्टम को धोखा देने के लिए किया जाता था। अपराधी बिना पीड़ित की जानकारी के आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर बदल देते थे। इसके बाद उन्हें उस व्यक्ति की डिजिटल पहचान तक पूरी पहुंच मिल जाती थी।
मोबाइल नंबर बदलते ही खुल गया पूरा सिस्टम
जैसे ही आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर बदलता था, अपराधियों को बैंकिंग अलर्ट, डिजिटल लॉकर और कई अन्य सेवाओं का एक्सेस मिल जाता था।
इसके बाद गिरोह फर्जी सिम कार्ड और बैंक खाते खुलवाकर ₹25 हजार से ₹50 हजार तक के इंस्टेंट पर्सनल लोन हासिल करता था। जांच एजेंसियों के अनुसार, पैसों को कई खातों में ट्रांसफर कर ट्रैकिंग से बचने की कोशिश की जाती थी।
ऐसे सामने आया पूरा मामला
यह साइबर फ्रॉड तब उजागर हुआ जब अहमदाबाद के एक कारोबारी को अपने आधार-लिंक्ड ट्रांजैक्शंस के OTP मिलना बंद हो गए।
जांच में पता चला कि उनका मोबाइल नंबर और बायोमेट्रिक डेटा बिना OTP वेरिफिकेशन के बदल दिया गया था। इतना ही नहीं, उनके नाम पर लोन भी लिया जा चुका था।
7 गिरफ्तार, मास्टरमाइंड फरार
पुलिस ने अब तक इस मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। हालांकि गिरोह का मुख्य आरोपी ओली उल्लाह अभी फरार बताया जा रहा है।
जांच में सामने आया कि अपराधियों ने Common Service Centres (CSCs) का इस्तेमाल कर आधार से जुड़े मोबाइल नंबर अपडेट किए। गिरोह का तकनीकी विशेषज्ञ रब्बुल हुसैन भी गिरफ्तार किया गया है, जो एआई टूल्स और आइडेंटिटी थेफ्ट ऑपरेशन संभाल रहा था।
डिजिटल सुरक्षा पर बड़ा सवाल
यह मामला भारत की डिजिटल पहचान प्रणाली में मौजूद कमजोरियों की ओर बड़ा संकेत माना जा रहा है। अधिकारियों ने UIDAI को इस पूरे मामले की जानकारी दे दी है।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर शेयर की गई तस्वीरें अब साइबर अपराधियों के लिए सबसे आसान हथियार बनती जा रही हैं। ऐसे में लोगों को अपनी निजी तस्वीरें और जानकारी साझा करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।