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LinkedIn पर बड़ा आरोप: बिना अनुमति यूजर्स के ब्राउजर स्कैन करने का दावा, प्राइवेसी पर उठे सवाल
 

 

अगर आप भी LinkedIn का इस्तेमाल करते हैं तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह प्लेटफॉर्म बिना यूजर की अनुमति के उनके वेब ब्राउजर को स्कैन कर रहा है, जिससे उनकी कार्यशैली और इस्तेमाल किए जाने वाले सॉफ्टवेयर की जानकारी हासिल की जा सकती है।

यूरोप के डिजिटल अधिकार संगठन Fairlinked e.V. द्वारा चलाए गए “BrowserGate” अभियान के तहत यह खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया कि प्लेटफॉर्म छिपे हुए जावास्क्रिप्ट कोड के जरिए यूजर्स के ब्राउजर में इंस्टॉल एक्सटेंशन्स की जांच करता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, जैसे ही यूजर Google Chrome, Microsoft Edge, Opera या Vivaldi जैसे ब्राउजर में LinkedIn खोलता है, एक स्क्रिप्ट बैकग्राउंड में सक्रिय हो जाती है। यह स्क्रिप्ट हजारों ब्राउजर एक्सटेंशन्स से जुड़ी सार्वजनिक फाइलों को एक्सेस कर यह पता लगाने की कोशिश करती है कि कौन-कौन से ऐड-ऑन इंस्टॉल हैं।

बताया जा रहा है कि यह पूरी प्रक्रिया कुछ मिलीसेकंड में पूरी हो जाती है और यूजर को इसकी भनक तक नहीं लगती। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि Mozilla Firefox और Safari यूजर्स इस स्कैनिंग से प्रभावित नहीं होते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि LinkedIn प्रोफाइल पर मौजूद व्यक्तिगत और पेशेवर जानकारी के साथ यदि ब्राउजर एक्सटेंशन्स की जानकारी भी जुड़ जाए, तो इससे यूजर की पहचान, काम करने का तरीका और कंपनी में इस्तेमाल होने वाली तकनीकों का अंदाजा लगाया जा सकता है। इससे कॉर्पोरेट जासूसी (Corporate Intelligence) का खतरा भी बढ़ सकता है।