एलन मस्क का नया सपना: चांद पर बसेंगी फैक्ट्रियां, रोबोट करेंगे काम; स्पेस में AI डेटा सेंटर भी बनाएगी SpaceX
नई दिल्ली। दुनिया के सबसे अमीर उद्योगपति एलन मस्क एक बार फिर अपने भविष्यवादी विजन को लेकर सुर्खियों में हैं। अंतरिक्ष में AI डेटा सेंटर बनाने की योजना के बाद अब उन्होंने चंद्रमा पर फैक्ट्रियां स्थापित करने का महत्वाकांक्षी खाका पेश किया है। SpaceX की हालिया अर्निंग्स कॉल के दौरान मस्क ने बताया कि भविष्य में कंपनी ह्यूमनॉइड रोबोट्स की मदद से चांद पर औद्योगिक ढांचा और फैक्ट्रियां विकसित करना चाहती है।
मस्क का कहना है कि यदि यह योजना सफल होती है तो पृथ्वी की मौजूदा अर्थव्यवस्था की तुलना में करीब 1,000 गुना बड़ी स्पेस इकोनॉमी विकसित की जा सकती है। उन्होंने माना कि फिलहाल यह विचार साइंस फिक्शन जैसा लगता है, लेकिन आने वाले वर्षों में इसे वास्तविकता में बदला जा सकता है।
रोबोट करेंगे निर्माण और संचालन
SpaceX के अनुसार, चंद्रमा पर फैक्ट्री स्थापित करने का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि वहां इंसानी श्रमिकों की जरूरत बहुत कम पड़ेगी। ह्यूमनॉइड रोबोट निर्माण कार्य, मशीनों के रखरखाव और संसाधनों की प्रोसेसिंग जैसे अधिकांश काम खुद कर सकेंगे। इसके अलावा अंतरिक्ष के प्राकृतिक वातावरण के कारण फैक्ट्रियों को ठंडा रखने में भी पृथ्वी की तुलना में कम संसाधनों की आवश्यकता होगी, जिससे संचालन की लागत घट सकती है।
'मास एक्सेलरेटर' तकनीक पर भी काम
एलन मस्क ने बताया कि भविष्य में यही रोबोट 'मास एक्सेलरेटर' नामक एक विशेष प्रणाली के निर्माण में भी मदद कर सकते हैं। इस तकनीक के जरिए चंद्रमा से कार्गो को बिना रॉकेट के अंतरिक्ष में भेजा जा सकेगा। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि फिलहाल यह अवधारणा काफी असामान्य और शुरुआती चरण में है।
अभी नहीं बताई गई समयसीमा
SpaceX ने अभी तक इस परियोजना की समयसीमा, लागत या निवेश का कोई खुलासा नहीं किया है। कंपनी ने यह भी स्पष्ट नहीं किया है कि इस मिशन में टेस्ला के मौजूदा Optimus ह्यूमनॉइड रोबोट्स का इस्तेमाल होगा या इसके लिए नए रोबोट विकसित किए जाएंगे।
स्पेस में AI डेटा सेंटर के लिए Nvidia से साझेदारी
इस बीच SpaceX ने अमेरिकी चिप निर्माता Nvidia के साथ नई साझेदारी की घोषणा की है। दोनों कंपनियां मिलकर Starmind AI-1 नाम का ऑर्बिटल AI डेटा सेंटर विकसित करेंगी। इस प्रोजेक्ट में Nvidia के नए Rubin GPU और Vera CPU का उपयोग किया जाएगा, जिससे सैटेलाइट्स की कंप्यूटिंग क्षमता लगभग 250 किलोवाट तक पहुंच सकेगी।