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फर्जी मैसेज और ठगी पर लगेगी लगाम, अब SMS में आने वाले लिंक और नंबर होंगे पहले से तय

 

अब आपके फोन पर आने वाले फर्जी मैसेज और ठगी वाले लिंक काफी हद तक कम हो जाएंगे। TRAI ने मोबाइल मैसेजिंग को सुरक्षित बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। नए नियमों के मुताबिक, कंपनियों को अपने हर SMS टेम्पलेट में मौजूद लिंक, ऐप डाउनलोड URL या कॉल बैक नंबर जैसे वैरिएबल फील्ड को पहले से रजिस्टर कराना होगा।

आसान भाषा में समझें – क्या बदला है?

अक्सर हम सभी के फोन पर बैंक, ऐप, ऑफर और OTP से जुड़े कई मैसेज आते हैं। इन्हीं के बीच ठग फर्जी लिंक डालकर लोगों को धोखा दे देते हैं। ये लिंक दिखने में असली कंपनी जैसा होता है, लेकिन क्लिक करते ही बैंक अकाउंट, पासवर्ड, डेटा या मोबाइल की जानकारी चोरी होने का खतरा बढ़ जाता है।

TRAI की जांच में सामने आया कि फ्रॉड करने वाले लोग असली कंपनियों के नाम से नकली लिंक डालकर आसानी से लोगों को जाल में फंसा लेते थे। इसी को रोकने के लिए अब कंपनियों को पहले से बताना होगा कि किसी SMS में कौनसा लिंक, कौनसा नंबर और किस उद्देश्य से आएगा।

नए नियमों से क्या बदल जाएगा?

  • कंपनियों को हर SMS टेम्पलेट में मौजूद लिंक या नंबर को पहले से रजिस्टर करना होगा।

  • पुराने सभी टेम्पलेट्स को 60 दिनों के अंदर अपडेट करना जरूरी है।

  • अपडेट न होने पर ऐसे मैसेज मोबाइल नेटवर्क से होकर भेजे ही नहीं जाएंगे।

  • नेटवर्क यह पहचान सकेगा कि SMS में आया लिंक असली है या फर्जी और जरूरत पड़ने पर उसे तुरंत ब्लॉक कर देगा।

आम लोगों को बड़े फायदे

  • मोबाइल पर आने वाले फ्रॉड और फिशिंग मैसेज में भारी कमी आएगी।

  • बैंक और सरकारी सेवाओं से आने वाले मैसेज पर लोगों का भरोसा बढ़ेगा।

  • साइबर अपराधों पर काबू पाने में यह कदम बड़ा और असरदार साबित होगा।

  • हर लिंक और नंबर पहले से वेरिफाई होगा, जिससे मैसेज ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी बनेंगे।

सरकार का कहना है कि यह नियम मोबाइल यूज़र्स को साइबर ठगी से बचाने के लिए बेहद जरूरी था। बढ़ते ऑनलाइन फ्रॉड के बीच यह कदम डिजिटल कम्युनिकेशन को सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव है।