देश की पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार लॉन्च, जानिए कीमत, फीचर्स और क्या है इसकी खासियत
नई दिल्ली। भारत में स्वच्छ और वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इंडिया गैस फ्लेक्स इवेंट के दौरान मारुति सुजुकी की पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार से पर्दा उठाया। कंपनी ने अपनी लोकप्रिय हैचबैक वैगनआर को फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक के साथ पेश किया है, जो पेट्रोल के साथ-साथ E85 (85 प्रतिशत एथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल) ईंधन पर भी चलने में सक्षम है।
इस अवसर पर नितिन गडकरी ने कहा कि भारत को अब तेजी से वैकल्पिक ईंधन और बायोफ्यूल की ओर बढ़ना होगा। उन्होंने बताया कि देश में लगभग 40 प्रतिशत वायु प्रदूषण के लिए परिवहन क्षेत्र जिम्मेदार है। ऐसे में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का उपयोग प्रदूषण कम करने और पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
गडकरी ने यह भी कहा कि भारत हर साल लगभग 22 से 23 लाख करोड़ रुपये का कच्चा तेल आयात करता है। फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के बढ़ते इस्तेमाल से विदेशी ईंधन पर निर्भरता कम होगी और आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती मिलेगी।
फ्लेक्स-फ्यूल वैगनआर की प्रमुख खूबियां
E85 ईंधन पर चलने की क्षमता:
नई वैगनआर का इंटरनल कंबशन इंजन (ICE) सामान्य पेट्रोल के साथ-साथ E85 एथेनॉल मिश्रित ईंधन पर भी बेहतर प्रदर्शन करने में सक्षम है।
अपग्रेडेड इंजन और फ्यूल सिस्टम:
एथेनॉल के सुरक्षित और प्रभावी उपयोग के लिए इंजन, फ्यूल सिस्टम तथा इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स में विशेष बदलाव किए गए हैं, जिससे वाहन की परफॉर्मेंस और टिकाऊपन बरकरार रहे।
कम प्रदूषण, ज्यादा बचत:
फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद करेगी। साथ ही एथेनॉल आधारित ईंधन पेट्रोल की तुलना में अधिक किफायती साबित हो सकता है, जिससे वाहन मालिकों की ईंधन लागत में भी कमी आएगी।
मारुति सुजुकी की यह पहल भारत में हरित ऊर्जा आधारित परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के बढ़ते उपयोग से न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि किसानों को एथेनॉल उत्पादन के माध्यम से आर्थिक लाभ भी मिलेगा।