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अब हवा से बनेगी बिजली! जहरीली गैसों से बिजली बनाने वाली नई टेक्नोलॉजी

 

New Delhi : जलवायु परिवर्तन और बढ़ते प्रदूषण के बीच वैज्ञानिकों ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। शोधकर्ताओं ने ऐसा डिवाइस विकसित किया है, जो वायु प्रदूषण को न सिर्फ कम कर सकता है, बल्कि उससे बिजली भी उत्पन्न कर सकता है।

इस नई तकनीक को गैस कैप्चर एंड इलेक्ट्रिसिटी जनरेटर (GCEC) नाम दिया गया है। इसे “गैस बैटरी” भी कहा जा रहा है, जो प्रदूषित गैसों को ऊर्जा में बदलने की क्षमता रखती है।

कैसे काम करता है यह डिवाइस?

यह डिवाइस हवा में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड जैसी जहरीली गैसों को अपने अंदर कैप्चर करता है। जैसे ही ये गैसें इसकी सतह से संपर्क में आती हैं, डिवाइस के भीतर चार्ज्ड पार्टिकल्स सक्रिय हो जाते हैं और बिना किसी बाहरी ऊर्जा स्रोत के बिजली उत्पन्न होने लगती है।

यह तकनीक कार्बन-आधारित सामग्री और हाइड्रोजेल से तैयार की गई है, जिसमें प्रदूषण खुद एक तरह के फ्यूल के रूप में काम करता है।

मौजूदा तकनीक से कैसे अलग है GCEC?

अब तक वायु से कार्बन डाइऑक्साइड को पकड़ने और स्टोर करने की तकनीक मौजूद थी, लेकिन उसमें काफी ऊर्जा खर्च होती थी और लागत भी अधिक होती थी।

नई GCEC तकनीक इस प्रक्रिया को उलट देती है—यह गैस कैप्चर करने के बजाय उसी प्रक्रिया से बिजली उत्पन्न करती है, जिससे सिस्टम ज्यादा कुशल और सस्टेनेबल बन जाता है।

कहां हो सकता है इस्तेमाल?

यह डिवाइस उन उपकरणों को ऊर्जा दे सकता है जिन्हें कम बिजली की जरूरत होती है, जैसे इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) डिवाइस। इसके अलावा इसे औद्योगिक क्षेत्रों में भी उपयोग किया जा सकता है, जहां अधिक प्रदूषण होता है। इससे न सिर्फ हवा साफ होगी, बल्कि अतिरिक्त बिजली भी पैदा की जा सकेगी।

जलवायु परिवर्तन में बड़ी उम्मीद

विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में सस्टेनेबल एनर्जी सिस्टम को मजबूत कर सकती है और देशों को कार्बन न्यूट्रल लक्ष्य हासिल करने में मदद कर सकती है।

इस खोज को पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।