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सिर्फ रास्ता नहीं, पूरी दुनिया चलाता है GPS! बंद हुआ तो जानिए कितना होगा नुकसान

 

 

Mumbai : आज के दौर में GPS (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) सिर्फ रास्ता बताने वाली तकनीक नहीं रह गया है, बल्कि यह दुनिया की कई महत्वपूर्ण सेवाओं की रीढ़ बन चुका है। मोबाइल नेविगेशन, बैंकिंग, इंटरनेट, बिजली ग्रिड, एयर ट्रैफिक, रेलवे और समुद्री परिवहन जैसी कई सेवाएं GPS पर निर्भर हैं। ऐसे में अगर GPS लंबे समय के लिए बंद हो जाए या उसके सिग्नल बाधित हो जाएं, तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।

सिर्फ मैप नहीं, कई सेवाएं होंगी प्रभावित

GPS सटीक समय और लोकेशन उपलब्ध कराता है, जिसकी मदद से कई डिजिटल और सार्वजनिक सेवाएं संचालित होती हैं। इसके प्रभावित होने पर:

- मोबाइल मैप्स सही दिशा नहीं दिखाएंगे।

- कैब और डिलीवरी सेवाएं प्रभावित होंगी।

- बैंकिंग और डिजिटल भुगतान प्रणाली में दिक्कतें आ सकती हैं।

- इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क की टाइम सिंक्रोनाइजेशन प्रभावित हो सकती है।

- एयर ट्रैफिक, रेलवे और समुद्री जहाजों के संचालन में बाधा आ सकती है।

एक दिन में अरबों डॉलर का नुकसान

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जैक कासास का कहना है कि अगर GPS पूरी तरह बंद हो जाए, तो केवल अमेरिका को ही एक दिन में करीब 1 अरब डॉलर का आर्थिक नुकसान हो सकता है। शुरुआती असर आम लोगों पर नेविगेशन और ट्रांसपोर्ट सेवाओं के रूप में दिखाई देगा।

क्या है GPS जामिंग और स्पूफिंग?

विशेषज्ञों के अनुसार, GPS पर दो बड़े खतरे हैं:

- GPS Jamming : इसमें GPS सिग्नल को जानबूझकर बाधित किया जाता है, जिससे डिवाइस सही लोकेशन नहीं पकड़ पाता।

- GPS Spoofing : इसमें नकली GPS सिग्नल भेजकर डिवाइस को गलत लोकेशन दिखाई जाती है। यह तकनीक विमान, जहाज और अन्य वाहनों के लिए गंभीर सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकती है।

हवाई और समुद्री यात्रा पर बढ़ सकता है खतरा

अगर जहाजों या विमानों को गलत GPS सिग्नल मिलते हैं, तो वे अपनी वास्तविक स्थिति से भटक सकते हैं। इससे दुर्घटनाओं, टकराव और आर्थिक नुकसान का खतरा बढ़ जाता है। यही कारण है कि हाल के वर्षों में GPS सुरक्षा वैश्विक चिंता का विषय बन गई है।

क्या है समाधान?

विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया को अब केवल GPS पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। इसके विकल्प के रूप में:

- मल्टी-सोर्स पोजिशनिंग सिस्टम,

- नई सैटेलाइट नेविगेशन तकनीक,

- बैकअप नेविगेशन सिस्टम,

- और एडवांस लोकेशन टेक्नोलॉजी

पर तेजी से काम किया जा रहा है, ताकि भविष्य में GPS में किसी तरह की समस्या आने पर जरूरी सेवाएं बिना बाधा के चलती रहें।