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बच्चों के लिए WhatsApp लॉन्च! पैरेंट्स कर सकेंगे निगरानी, जानिए फायदे और जोखिम

 

Mumbai : लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप WhatsApp अब बच्चों के लिए नया फीचर लेकर आया है। कंपनी ने पैरेंट-मैनेज्ड अकाउंट की शुरुआत की है, जिसके जरिए अब 13 साल से कम उम्र के बच्चे भी अकाउंट बना सकेंगे। इस फीचर में माता-पिता अपने बच्चों के अकाउंट को अपने डिवाइस से लिंक कर सकते हैं और उनकी गतिविधियों पर नजर रख सकते हैं।

हालांकि जहां कई देशों में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने की चर्चा हो रही है, वहीं इस नए फीचर को लेकर विशेषज्ञों ने इसके फायदे और संभावित खतरों दोनों की ओर ध्यान दिलाया है।

पैरेंटल कंट्रोल के बावजूद बने रहते हैं खतरे

आईटी एक्सपर्ट का कहना है कि पैरेंटल कंट्रोल से बच्चों का एक्सपोजर कम किया जा सकता है, लेकिन टेक्नोलॉजी के तेजी से विकसित होने और एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन जैसी तकनीकों के कारण जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं होता। इसलिए बच्चों को ऑनलाइन खतरों के बारे में जागरूक करना भी जरूरी है।

एनक्रिप्शन के कारण निगरानी मुश्किल

आजकल WhatsApp, Snapchat और Discord जैसे प्लेटफॉर्म पर चैट एंड-टू-एंड एनक्रिप्टेड होती है। ऐसे में यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि बच्चे किससे बातचीत कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार बच्चे अक्सर आसानी से लोगों पर भरोसा कर लेते हैं, जिससे उनके ऑनलाइन स्कैम या फ्रॉड में फंसने का खतरा बढ़ जाता है।

इस तरह बच्चों को निशाना बनाते हैं स्कैमर्स

आईटी विशेषज्ञों के मुताबिक स्कैमर्स अक्सर फेक प्रोफाइल बनाकर बच्चों को टारगेट करते हैं। पहले वे पब्लिक ग्रुप में उनकी तारीफ करते हैं और फिर डायरेक्ट मैसेज भेजकर दोस्ती करने की कोशिश करते हैं। इसके बाद वे फोटो-वीडियो मांगते हैं या OTP और निजी जानकारी हासिल करने के लिए रिवॉर्ड का लालच देते हैं।

बच्चों के लिए क्या हैं सुरक्षा उपाय

विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए कुछ जरूरी कदम उठाए जा सकते हैं:

- Apple Family Sharing या Google Family Link जैसे टूल का उपयोग करें।

- बच्चों के लिए पैरेंट-मैनेज्ड WhatsApp अकाउंट बनाएं।

- सोशल मीडिया ऐप्स पर टीन-पैरेंट मोड और कंटेंट फिल्टर चालू रखें।

- लोकेशन शेयरिंग और डिसअपीयरिंग मैसेज जैसे फीचर बंद करें।

- डिवाइस में मजबूत पासवर्ड और स्क्रीन-टाइम लिमिट लागू करें।

बच्चों के मानसिक विकास पर असर

साइकोलॉजिस्ट अर्पिता कोहली के अनुसार कम उम्र में मैसेजिंग ऐप्स का ज्यादा उपयोग बच्चों के सोशल और इमोशनल डेवलपमेंट को प्रभावित कर सकता है। इससे उनका फेस-टू-फेस इंटरैक्शन कम हो जाता है, जिससे कम्युनिकेशन स्किल और सामाजिक संबंध विकसित होने में बाधा आ सकती है। उन्होंने कहा कि पैरेंट-मैनेज्ड अकाउंट बच्चों को ऑनलाइन दुनिया में सुरक्षित और जिम्मेदार बनने में मदद कर सकता है, लेकिन अगर स्क्रीन टाइम सीमित नहीं किया गया तो बच्चे पूरी तरह डिजिटल कम्युनिकेशन पर निर्भर हो सकते हैं।

माता-पिता के लिए क्या सलाह

विशेषज्ञों का कहना है कि माता-पिता को बच्चों पर सिर्फ निगरानी रखने के बजाय उनसे खुलकर बातचीत करनी चाहिए। उन्हें ऑनलाइन सुरक्षा के बारे में समझाना चाहिए और स्क्रीन टाइम के लिए स्पष्ट नियम तय करने चाहिए।

अगर बच्चे का व्यवहार अचानक बदलने लगे, वह फोन छिपाने लगे या उसकी नींद और मूड में बदलाव दिखे, तो इसे चेतावनी संकेत माना जा सकता है। ऐसे में माता-पिता को बच्चों से बात कर उनकी समस्या समझने की कोशिश करनी चाहिए।