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विमान हादसे के बाद रडार पर क्यों नहीं दिखता प्लेन? समझिए टेक्नीक

 

New Delhi : जब भी किसी विमान हादसे की खबर सामने आती है, तो सबसे पहले यही सवाल उठता है कि क्या विमान रडार से गायब हो गया था। आम तौर पर यात्रियों को लगता है कि रडार से गायब होने का मतलब प्लेन का अचानक लापता हो जाना है, लेकिन हकीकत में इसके पीछे कई तकनीकी और पर्यावरणीय कारण हो सकते हैं।

कैसे काम करता है विमान को ट्रैक करने वाला रडार सिस्टम

एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) विमान की निगरानी के लिए मुख्य रूप से दो तरह के रडार सिस्टम का इस्तेमाल करता है—प्राइमरी रडार और सेकेंडरी रडार।
प्राइमरी रडार विमान से टकराकर लौटने वाले सिग्नल के जरिए उसकी स्थिति बताता है, जबकि सेकेंडरी रडार विमान में लगे ट्रांसपोंडर से मिलने वाले डेटा पर निर्भर करता है। यदि ट्रांसपोंडर काम करना बंद कर दे, तो विमान सेकेंडरी रडार से गायब दिखाई दे सकता है।

विमान का ट्रांसपोंडर उसकी पहचान, ऊंचाई और गति जैसी अहम जानकारियां कंट्रोल रूम तक भेजता है। तकनीकी खराबी, पावर फेल्योर या आग लगने जैसी स्थितियों में यह सिस्टम बंद हो सकता है। ऐसे में विमान रडार स्क्रीन से अचानक गायब नजर आता है, जबकि वह हवा में मौजूद रहता है।

मौसम और वातावरण भी बनते हैं बाधा

तेज तूफान, भारी बारिश, बिजली गिरना या सोलर एक्टिविटी जैसी परिस्थितियां रडार सिग्नल को प्रभावित कर सकती हैं। इसके अलावा समुद्र के ऊपर या दूर-दराज के इलाकों में उड़ान के दौरान रडार कवरेज सीमित होने से भी विमान की ट्रैकिंग में दिक्कत आती है।

अगर विमान के नेविगेशन सिस्टम गलत डेटा दिखाने लगें, तो पायलट को सही दिशा और ऊंचाई का अनुमान नहीं रहता। सेंसर की गलत रीडिंग के चलते गलत निर्णय लिए जा सकते हैं, जो हादसे की वजह बन सकते हैं।

क्या प्लेन को जानबूझकर रडार से गायब किया जा सकता है?

कुछ दुर्लभ मामलों में मानवीय गलती या जानबूझकर सिस्टम बंद करने से भी विमान रडार से ओझल हो सकता है। हालांकि आधुनिक विमानों में ऐसे उन्नत सिस्टम लगे होते हैं, जो किसी भी असामान्य गतिविधि की तुरंत सूचना देते हैं।

विमान का रडार से गायब होना हमेशा रहस्यमय घटना नहीं होती। इसके पीछे ट्रांसपोंडर फेल्योर, खराब मौसम, तकनीकी खराबी या रडार कवरेज की सीमाएं जैसे कई कारण हो सकते हैं।