डॉलर कमजोर, सोना चमका…तीन महीने के हाई के करीब पहुंचा भाव, जानिए तेजी की बड़ी वजह
सोने की कीमतों में सोमवार को एक बार फिर तेजी देखने को मिली। अमेरिकी बॉन्ड बाजार में ट्रेजरी की बढ़ती दखलअंदाजी और डॉलर के कमजोर होने की आशंका के बीच निवेशकों का रुझान सोने की तरफ बढ़ा है। माना जा रहा है कि अमेरिकी कर्ज और डॉलर को लेकर बढ़ती चिंता सोने की कीमतों को आगे भी सहारा दे सकती है।
कॉमेक्स गोल्ड 0.14 फीसदी की बढ़त के साथ 4,688.80 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि इससे पहले इसका बंद भाव 4,673.40 डॉलर था। दूसरी ओर, कॉमेक्स सिल्वर 0.16 फीसदी गिरकर 69.420 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। इसका पिछला बंद भाव 69.345 डॉलर था।
सोने की कीमत क्यों बढ़ रही है?
सोने में तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह अमेरिकी ट्रेजरी का लंबे समय वाले सरकारी कर्ज की बायबैक बढ़ाने का फैसला माना जा रहा है। इस कदम का असर बॉन्ड यील्ड और डॉलर दोनों पर पड़ा है। बॉन्ड यील्ड में गिरावट के साथ डॉलर भी कमजोर हुआ, जिससे सोने को मजबूती मिली।
पिछले सप्ताह भी सोने की कीमत में 5 फीसदी से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई थी। बुलियन की कीमत 4,620 डॉलर प्रति औंस के स्तर को पार कर गई थी और लगातार तीसरे सप्ताह बढ़त में रही। बाजार में इस बात को लेकर भी चिंता है कि अमेरिकी सरकार की ओर से उधारी की लागत को नियंत्रित करने के लिए सीधे हस्तक्षेप से डॉलर पर निवेशकों का भरोसा प्रभावित हो सकता है।
अमेरिकी बॉन्ड बाजार और सोने का क्या संबंध है?
दरअसल, सोना अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर में कारोबार करता है। ऐसे में जब डॉलर कमजोर होता है तो दूसरे देशों की मुद्राओं में सोना अपेक्षाकृत सस्ता हो जाता है और इसकी मांग बढ़ सकती है। यही वजह है कि डॉलर में कमजोरी अक्सर सोने के लिए सकारात्मक मानी जाती है।
अमेरिकी ट्रेजरी की गतिविधियों ने एक बार फिर डॉलर की भविष्य की स्थिति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। इसी तरह की आशंकाओं को 2025 में सोने की करीब 65 फीसदी तेजी के पीछे भी एक अहम कारण माना गया था।
ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने भी महंगे कर्ज की बायबैक को और बढ़ाने की इच्छा जताई है। उन्होंने संकेत दिया है कि अमेरिकी प्रशासन ऊंची उधारी लागत से निपटने के लिए जल्द ही वित्तीय योजना सामने ला सकता है।
क्या निवेशकों को सोने में निवेश बढ़ाना चाहिए?
सोने को लेकर निवेशकों का भरोसा सिर्फ मौजूदा तेजी तक सीमित नहीं है। ब्रिजवॉटर एसोसिएट्स के संस्थापक रे डालियो ने हाल ही में निवेशकों को बॉन्ड में अपनी हिस्सेदारी कम करने और पोर्टफोलियो के 15 फीसदी तक हिस्से को बुलियन में रखने पर विचार करने की सलाह दी है। यह सलाह मुख्य रूप से अमेरिकी कर्ज से जुड़े संभावित जोखिमों से बचाव के नजरिए से दी गई है।
हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि हर निवेशक को अपने पोर्टफोलियो का 15 फीसदी हिस्सा सोने में लगा देना चाहिए। निवेश से पहले अपनी जोखिम क्षमता, निवेश अवधि और वित्तीय लक्ष्य को ध्यान में रखना जरूरी है। मौजूदा समय में सोने की तेजी को समझने के लिए सबसे अहम बात डॉलर और अमेरिकी कर्ज से जुड़ी चिंताओं को समझना है।
कच्चे तेल की कीमतों ने भी दिया सहारा
इस बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत 93 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई है। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने भी महंगी धातुओं के लिए माहौल को थोड़ा अनुकूल बनाया है।
फिलहाल सोने के बाजार पर तीन बड़े फैक्टर का असर दिखाई दे रहा है—कमजोर डॉलर, अमेरिकी कर्ज को लेकर चिंता और बॉन्ड बाजार में सरकारी दखल। ऐसे में आने वाले दिनों में सोने की दिशा काफी हद तक अमेरिकी आर्थिक नीतियों, बॉन्ड यील्ड और डॉलर की चाल पर निर्भर करेगी। निवेशकों के लिए यह तेजी आकर्षक जरूर दिख रही है, लेकिन ऊंचे स्तरों पर निवेश करते समय जोखिम को नजरअंदाज करना भी सही नहीं होगा।