ईंधन कीमतों में रोजाना बदलाव से ट्रांसपोर्ट सेक्टर परेशान, केंद्र सरकार से नई व्यवस्था की मांग
New Delhi : भारत में पेट्रोल, डीज़ल और सीएनजी की कीमतों में लगातार हो रहे बदलावों ने ट्रांसपोर्ट उद्योग की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ट्रांसपोर्ट कारोबारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के आधार पर घरेलू ईंधन दरों में बार-बार बदलाव से संचालन लागत का सही अनुमान लगाना मुश्किल हो रहा है।
इसी मुद्दे को लेकर अखिल भारतीय मोटर एवं माल परिवहन संघ ने केंद्र सरकार से ईंधन मूल्य निर्धारण व्यवस्था में बदलाव की मांग की है।
आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता बनी वजह
भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है।
ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों का कहना है कि पेट्रोल, डीज़ल और सीएनजी के दामों में धीरे-धीरे और रोजाना बदलाव होने से कारोबार की आर्थिक योजना बनाना मुश्किल हो गया है।
बढ़ती लागत से ट्रांसपोर्ट कारोबार पर दबाव
ट्रांसपोर्ट सेक्टर पहले से ही टोल टैक्स, बीमा प्रीमियम, स्पेयर पार्ट्स, चालान और अन्य परिचालन खर्चों के बढ़ते दबाव का सामना कर रहा है। ऐसे में ईंधन की कीमतों में लगातार बदलाव से ट्रक ऑपरेटरों और चालकों का बजट प्रभावित हो रहा है।
व्यवसायियों के अनुसार रोज बदलती कीमतों के कारण भाड़ा तय करने और खर्च प्रबंधन में भारी दिक्कतें आ रही हैं।
लंबी दूरी के ट्रकों पर सबसे ज्यादा असर
ट्रांसपोर्ट कंपनियों का कहना है कि लंबी दूरी तय करने वाले ट्रकों को कई बार एक राज्य से दूसरे राज्य तक आने-जाने में 8 से 10 दिन या उससे अधिक समय लग जाता है।
इस दौरान डीज़ल की कीमतों में बदलाव होने से चालकों और ट्रांसपोर्टरों को नकद भुगतान, एडवांस राशि और खर्च के हिसाब-किताब में परेशानी झेलनी पड़ती है। इससे कारोबार में अनिश्चितता और आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।
आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ता है असर
देश में करीब 75 प्रतिशत से अधिक माल परिवहन सड़क मार्ग से होता है। ऐसे में डीज़ल महंगा होने का असर खाद्यान्न, निर्माण सामग्री और रोजमर्रा के सामान की कीमतों पर भी पड़ता है।
ट्रांसपोर्ट सेक्टर का कहना है कि ईंधन मूल्य अस्थिरता का बोझ आखिरकार आम उपभोक्ताओं तक पहुंचता है।
सरकार से महीने में एक बार समीक्षा की मांग
अखिल भारतीय मोटर एवं माल परिवहन संघ के अध्यक्ष राजेंद्र कपूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी से अपील की है कि पेट्रोल, डीज़ल और सीएनजी की कीमतों की समीक्षा रोजाना करने के बजाय महीने में एक बार की जाए।
उन्होंने सुझाव दिया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की औसत कीमतों के आधार पर महीने में एक बार ही दाम बढ़ाए या घटाए जाएं, ताकि ट्रांसपोर्ट उद्योग और व्यापारियों को स्थिरता मिल सके।