भारतीय शेयर बाजार में लगातार गिरावट, टॉप-10 कंपनियों की वैल्यूएशन 2.51 लाख करोड़ घटी
Mumbai : भारतीय शेयर बाजार में पिछले हफ्ते भारी गिरावट देखने को मिली। प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी 50 लगातार दबाव में रहे। टॉप-10 सबसे वैल्यूएबल कंपनियों में से 9 की मार्केट वैल्यूएशन कुल 2.51 लाख करोड़ रुपये घट गई। इस गिरावट में रिलायंस इंडस्ट्रीज को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ, जिसकी वैल्यूएशन 96,960.17 करोड़ रुपये कम होकर 18.75 लाख करोड़ रुपये रह गई।
बीते 5 कारोबारी दिनों में बीएसई सेंसेक्स में 2,032.65 अंक या 2.43 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितता, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली, रुपये की कमजोरी और कमजोर कॉर्पोरेट नतीजों ने बाजार पर दबाव बनाए रखा।
टॉप-10 कंपनियों में सबसे ज्यादा गिरावट
- रिलायंस इंडस्ट्रीज: 96,960.17 करोड़ रुपये घटी, अब 18.75 लाख करोड़
- आईसीआईसीआई बैंक: 48,644.99 करोड़ रुपये घटी, अब 9.60 लाख करोड़
- एचडीएफसी बैंक: 22,923.02 करोड़ रुपये घटी, अब 14.09 लाख करोड़
- भारती एयरटेल: 17,533.97 करोड़ रुपये घटी, अब 11.32 लाख करोड़
- टीसीएस: 16,588.93 करोड़ रुपये घटी, अब 11.43 लाख करोड़
- एलएंडटी: 15,248.32 करोड़ रुपये घटी, अब 5.15 लाख करोड़
- बजाज फाइनेंस: 14,093.93 करोड़ रुपये घटी, अब 5.77 लाख करोड़
- एसबीआई: 11,907.5 करोड़ रुपये घटी, अब 9.50 लाख करोड़
- इंफोसिस: 7,810.77 करोड़ रुपये घटी, अब 6.94 लाख करोड़
केवल हिंदुस्तान यूनिलीवर की वैल्यूएशन 12,311.86 करोड़ रुपये बढ़कर 5.66 लाख करोड़ रुपये हो गई।
मार्केट कैपिटलाइजेशन क्या है?
मार्केट कैपिटलाइजेशन (मार्केट कैप) किसी कंपनी के कुल आउटस्टैंडिंग शेयरों की मौजूदा कीमत से निकाला जाता है।
- फॉर्मूला: मार्केट कैप = कुल जारी शेयर × शेयर की मौजूदा कीमत
- उदाहरण: यदि कंपनी 'A' के 1 करोड़ शेयर बाजार में हैं और एक शेयर 20 रुपये का है, तो मार्केट कैप = 1 करोड़ × 20 = 20 करोड़ रुपये।
मार्केट कैप शेयर कीमतों के बढ़ने-घटने के साथ बदलता रहता है।
मार्केट कैप बढ़ने या घटने के प्रमुख कारण
बढ़ने के कारण
- मजबूत वित्तीय नतीजे
- पॉजिटिव न्यूज या कॉर्पोरेट इवेंट
- अच्छा मार्केट सेंटिमेंट
- हाई वैल्यू पर शेयर जारी करना
घटने के कारण
- कमजोर तिमाही नतीजे
- नेगेटिव न्यूज या घटना
- आर्थिक मंदी या बाजार में गिरावट
- शेयर बायबैक या डीलिस्टिंग
कंपनी और निवेशकों पर असर
- कंपनी पर: बड़ा मार्केट कैप फंड जुटाने, लोन लेने या अधिग्रहण में आसानी देता है। कम मार्केट कैप से फाइनेंशियल निर्णय लेने की क्षमता घटती है।
- निवेशकों पर: मार्केट कैप बढ़ने से शेयर मूल्य बढ़ता है, जिससे निवेशकों को फायदा होता है। गिरावट से नुकसान हो सकता है और वे शेयर बेचने पर मजबूर हो सकते हैं।
- उदाहरण के तौर पर, यदि TCS का मार्केट कैप 11.43 लाख करोड़ से बढ़ता है, तो निवेशकों की संपत्ति बढ़ेगी और कंपनी को भविष्य में निवेश के लिए ज्यादा पूंजी मिलेगी। वहीं गिरावट से नुकसान हो सकता है।
विशेषज्ञों की राय
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट वैश्विक अनिश्चितता और FII की बिकवाली का नतीजा है। कुछ सेक्टर जैसे FMCG और फार्मा में रिलेटिव मजबूती दिख रही है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे लंबी अवधि के लिए मजबूत कंपनियों में निवेश करें और शॉर्ट टर्म में सतर्क रहें। अगले कुछ सत्रों में FII प्रवाह, कॉर्पोरेट नतीजे और वैश्विक संकेतों पर बाजार की नजर रहेगी। फिलहाल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है।