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थोक महंगाई ने बढ़ाई चिंता, दिसंबर में 0.83% पर पहुंची दर, 8 महीने का उच्चतम स्तर

 

New Delhi : महंगाई के मोर्चे पर आम आदमी के लिए राहत की जगह चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। खुदरा महंगाई के बाद अब थोक महंगाई दर (WPI) में भी इजाफा दर्ज किया गया है। दिसंबर महीने में थोक महंगाई बढ़कर 0.83 फीसदी पर पहुंच गई है, जो पिछले आठ महीनों का उच्चतम स्तर है। खाद्य पदार्थों, गैर-खाद्य वस्तुओं और विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में मासिक आधार पर बढ़ोतरी के चलते यह उछाल देखने को मिला है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, नवंबर 2025 में थोक महंगाई दर -0.32 फीसदी और अक्टूबर में -1.21 फीसदी थी। वहीं, दिसंबर 2024 में यह दर 2.57 फीसदी दर्ज की गई थी। मंत्रालय ने बयान में कहा कि दिसंबर 2025 में थोक महंगाई दर में बढ़ोतरी मुख्य रूप से अन्य विनिर्माण, खनिज, मशीनरी एवं उपकरण, खाद्य उत्पादों के निर्माण और वस्त्रों की कीमतों में इजाफे के कारण हुई है।

खाद्य महंगाई में गिरावट, लेकिन दबाव बरकरार

आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर में खाद्य पदार्थों की कीमतों में 0.43 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जबकि नवंबर में यह दर 4.16 फीसदी थी। सब्जियों की महंगाई दर में भी दिसंबर में 3.50 फीसदी की कमी आई, जो नवंबर में 20.23 फीसदी थी। हालांकि, अन्य श्रेणियों में बढ़ती कीमतों ने कुल थोक महंगाई को ऊपर की ओर धकेला।

विनिर्मित और गैर-खाद्य वस्तुएं महंगी

- दिसंबर में विनिर्मित उत्पादों की महंगाई दर बढ़कर 1.82 फीसदी हो गई, जो नवंबर में 1.33 फीसदी थी।
- गैर-खाद्य वस्तुओं की श्रेणी में महंगाई 2.95 फीसदी रही, जबकि नवंबर में यह 2.27 फीसदी थी।
- ईंधन और बिजली क्षेत्र में भी महंगाई दर दिसंबर में 2.31 फीसदी दर्ज की गई, जो नवंबर के 2.27 फीसदी से थोड़ी अधिक है।

खुदरा महंगाई भी बढ़ी

इससे पहले दिसंबर में खुदरा महंगाई दर भी बढ़कर तीन महीने के उच्च स्तर 1.33 फीसदी पर पहुंच गई थी। सब्जी, अंडा, दाल और अन्य आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी इसका मुख्य कारण रही। नवंबर में खुदरा महंगाई 0.71 फीसदी थी, जबकि सितंबर में यह 1.44 फीसदी के उच्च स्तर पर थी।

आरबीआई की नजर महंगाई पर

गौरतलब है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) खुदरा महंगाई दर को मौद्रिक नीति का प्रमुख आधार मानता है। केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए महंगाई अनुमान को 2.6 फीसदी से घटाकर 2 फीसदी कर दिया है। आरबीआई अब तक इस वित्त वर्ष में रेपो रेट में कुल 1.25 फीसदी की कटौती कर चुका है, जिसके बाद नीतिगत ब्याज दर घटकर 5.5 फीसदी रह गई है।

महंगाई के ताजा आंकड़ों से संकेत मिल रहे हैं कि कीमतों पर दबाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और आने वाले महीनों में नीति निर्माताओं के लिए यह एक बड़ी चुनौती बना रह सकता है।