10 साल बाद फिर बदलेंगे नोट? RBI पॉलिमर करेंसी लाने पर कर रहा विचार
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जल्द ही देश में पॉलिमर यानी प्लास्टिक आधारित बैंकनोट शुरू करने पर विचार कर सकता है। बढ़ती नकदी की मांग, नोट छापने की बढ़ती लागत और कागजी नोटों के जल्दी खराब होने की समस्या को देखते हुए आरबीआई इस विकल्प पर गंभीरता से मंथन कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार, RBI की हालिया बोर्ड बैठकों में पॉलिमर बैंकनोटों को लेकर चर्चा हुई है। माना जा रहा है कि ये नोट पारंपरिक कागजी नोटों की तुलना में अधिक टिकाऊ होते हैं और लंबे समय तक उपयोग में बने रहते हैं। इससे नोटों की छपाई और उनके प्रतिस्थापन पर होने वाला खर्च भी कम किया जा सकेगा।
क्या होते हैं पॉलिमर बैंकनोट?
पॉलिमर बैंकनोट विशेष प्रकार के सिंथेटिक प्लास्टिक से बनाए जाते हैं, जिन्हें आमतौर पर प्लास्टिक नोट कहा जाता है। इनके निर्माण में मुख्य रूप से Biaxially Oriented Polypropylene (BOPP) सामग्री का उपयोग होता है। ये नोट हल्के, लचीले और मजबूत होते हैं तथा सामान्य कागजी नोटों की तुलना में फटने या खराब होने की संभावना काफी कम होती है।
इसके अलावा, पॉलिमर नोटों में आधुनिक सुरक्षा फीचर्स को बेहतर तरीके से शामिल किया जा सकता है, जिससे नकली नोटों पर भी प्रभावी रोक लगाने में मदद मिल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा एटीएम मशीनें भी इन नोटों के वितरण में सक्षम होंगी।
बढ़ती लागत बनी चिंता
RBI के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में बैंकनोटों की छपाई पर 6,372.8 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए, जबकि वित्त वर्ष 2023-24 में यह खर्च करीब 5,101.4 करोड़ रुपये था। रिजर्व बैंक की रिपोर्ट में भी कहा गया है कि नकदी की बढ़ती मांग के कारण नोटों की छपाई पर लगातार अधिक खर्च करना पड़ रहा है।
इसके साथ ही बड़ी संख्या में कागजी नोट जल्दी खराब हो जाते हैं। वर्ष 2025 में करोड़ों खराब बैंकनोटों को चलन से बाहर करना पड़ा, जिनमें 100 रुपये और 500 रुपये के नोटों की संख्या सबसे अधिक रही। ऐसे में अधिक समय तक चलने वाले पॉलिमर नोट एक बेहतर और किफायती विकल्प माने जा रहे हैं।
दुनिया के कई देशों में सफल प्रयोग
भारत में पॉलिमर नोटों का विचार नया नहीं है। वर्ष 2012 में तत्कालीन यूपीए सरकार ने प्रायोगिक आधार पर ऐसे नोट शुरू करने की योजना बनाई थी, लेकिन तकनीकी कारणों से यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी।
वर्तमान में दुनिया के 60 से अधिक देशों में पॉलिमर बैंकनोट प्रचलन में हैं। सबसे पहले 1988 में Australia ने इन्हें अपनाया था। इसके बाद Canada, Singapore, Indonesia, Thailand, Malaysia और Romania सहित कई देशों ने पॉलिमर नोटों को अपनी मुद्रा प्रणाली का हिस्सा बनाया है।
यदि RBI इस दिशा में अंतिम निर्णय लेता है, तो आने वाले वर्षों में भारतीय करेंसी के स्वरूप में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इससे नोटों की उम्र बढ़ेगी, रखरखाव की लागत घटेगी और नकली नोटों पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा।