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घर में रखा सोना बेचने पर भी देना पड़ सकता है टैक्स, जानिए किन सामानों की बिक्री पर नहीं लगता आयकर

घर में रखा सोना, चांदी या आभूषण बेचने पर हर बार टैक्स से छूट नहीं मिलती। आयकर नियमों के तहत सामान्य व्यक्तिगत सामान और आभूषणों में अंतर है। जानिए मोबाइल, फर्नीचर और कपड़ों की बिक्री पर टैक्स क्यों नहीं लगता, जबकि सोने के आभूषण बेचने पर पूंजीगत लाभ कर देना पड़ सकता है।
 

Personal Effects Income Tax: घर में इस्तेमाल होने वाला मोबाइल, फर्नीचर, कपड़े या बर्तन बेचने पर आमतौर पर होने वाले लाभ पर आयकर नहीं लगता। लेकिन हर निजी इस्तेमाल की वस्तु इस छूट के दायरे में नहीं आती। सोना-चांदी के आभूषण, कीमती पत्थर, पेंटिंग, मूर्तियां और पुरातात्विक संग्रह जैसी चीजें बेचने पर होने वाला मुनाफा पूंजीगत लाभ माना जा सकता है और उस पर टैक्स देना पड़ सकता है।

क्या होता है व्यक्तिगत सामान?

आयकर अधिनियम की धारा 2(14) के तहत व्यक्ति या उसके आश्रित परिवार के सदस्यों के व्यक्तिगत या दैनिक इस्तेमाल में आने वाली वस्तुओं को व्यक्तिगत सामान माना जाता है। इसमें कपड़े, फर्नीचर, बर्तन, मोबाइल फोन, लैपटॉप और रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रॉनिक सामान जैसी वस्तुएं शामिल हैं।

इन सामान्य व्यक्तिगत वस्तुओं को बेचने से होने वाले लाभ पर आमतौर पर पूंजीगत लाभ कर नहीं लगता। हालांकि, आभूषण और कुछ दूसरी मूल्यवान वस्तुओं को व्यक्तिगत सामान की इस छूट से बाहर रखा गया है।

सोना और आभूषण बेचने पर लगेगा टैक्स

सोने, चांदी, प्लेटिनम या अन्य कीमती धातुओं से बने आभूषणों को व्यक्तिगत सामान की सामान्य श्रेणी में नहीं रखा जाता। कीमती और अर्ध-कीमती पत्थर भी आभूषण की श्रेणी में आते हैं।

इसलिए अगर किसी व्यक्ति को ऐसे आभूषण को बेचने पर मुनाफा होता है तो यह कैपिटल गेन हो सकता है और उस पर लागू आयकर नियमों के अनुसार टैक्स देना पड़ सकता है।

कीमती पत्थर लगते ही बदल सकती है श्रेणी

फर्नीचर, कपड़े या बर्तन जैसी वस्तुएं सामान्य तौर पर व्यक्तिगत सामान हैं। लेकिन यदि इनमें कीमती या अर्ध-कीमती पत्थर का इस्तेमाल किया गया है, तो टैक्स के लिहाज से इनकी श्रेणी बदल सकती है और इन्हें आभूषण माना जा सकता है। ऐसी वस्तु की बिक्री से होने वाले लाभ पर टैक्स देय हो सकता है।

3 लाख का सोना 5 लाख में बेचा तो कितना मुनाफा?

मान लीजिए आपने 3 लाख रुपये में सोने का आभूषण खरीदा और बाद में उसे 5 लाख रुपये में बेच दिया। ऐसे मामले में खरीद और बिक्री मूल्य के बीच 2 लाख रुपये का अंतर है। लागू नियमों के अनुसार यह राशि पूंजीगत लाभ की गणना का हिस्सा होगी।

आभूषण कितने समय तक आपके पास रहा, इसके आधार पर पूंजीगत लाभ की प्रकृति और उस पर लागू टैक्स का निर्धारण किया जाता है। इसे शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।

विरासत में मिले आभूषण पर भी रखें ध्यान

अगर आभूषण आपको विरासत में मिला है या उपहार में मिला है, तो पूंजीगत लाभ की गणना करते समय केवल वर्तमान मालिक की अवधि को नहीं देखा जाता। ऐसे मामलों में पिछले मालिक की खरीद लागत और होल्डिंग अवधि भी महत्वपूर्ण हो सकती है।

इसलिए पुराने आभूषण बेचने से पहले उसकी खरीद से जुड़े दस्तावेज, बिल और उपलब्ध रिकॉर्ड संभालकर रखना फायदेमंद है।

बिक्री से पहले इन बातों का रखें ध्यान

  • सामान बेचने से पहले जांच लें कि वह व्यक्तिगत सामान की टैक्स छूट में आता है या नहीं।
  • बड़ी खरीद-बिक्री के बिल, रसीद और बैंक लेनदेन का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।
  • विरासत या उपहार में मिले आभूषणों के पुराने दस्तावेज संभालकर रखें।
  • व्यक्तिगत सामान की बिक्री से होने वाले नुकसान को आमतौर पर दूसरे पूंजीगत लाभ या आय के खिलाफ समायोजित नहीं किया जा सकता और न ही उसे आगे ले जाया जा सकता है।